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29 October 2020

4:34 PM : Annual Sardar Patel Memorial Lecture

3:34 PM : पाकिस्तान में पीएम मोदी का 'खौफ'

पीएम मोदी के ‘खौफ’ से पाकिस्तान ने किया था विंग कमांडर अभिनंदन को रिहा

भारतीय वायुसेना के पायलट विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान से हर कोई वाकिफ है। जी हां वही अभिनंदन जो विमान क्रैश होने के बाद पाकिस्‍तान की सरहद में पहुंच गए थे और फिर पाकिस्तान ने उन्हें भारत को सौंप दिया था। पाकिस्तान ने अभिनंदन को भारत को सौंपते वक्त कहा कि उसने यह फैसला मानवता के नाते लिया है, जबकि सच तो यह है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने यह फैसला भारत के पीएम नरेंद्र मोदी के डर से लिया। जी हां यह खुलासा पाकिस्तान के ही पूर्व विदेश मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने किया है। उनका कहना है कि जब अभिनंदन की रिहाई को लेकर उच्च स्तरीय वार्ता चल रही थी, तब पाकिस्तानी सेना के जीव जनरल बाजवा के हाथ-पैर कांप रहे थे।

इस पूरे वाक्‍ये को समझने के लिए सबसे पहले एक नज़र दौड़ाते हैं पाकिस्‍तानी पीएम इमरान खान के शब्‍दों पर जो उन्‍होंने पाकिस्‍तान संसद में अभिनंदन पर अपने बयान में कहे। इमरान खान ने कहा, “ये जो टेंशन है, ये न पाकिस्तान को फायदा देती है, और न हिन्दुस्तान को। मैंने कल भी कोशिश की, नरेंद्र मोदी से बात करने की और सिर्फ डीएस्कलेट करने के लिए। हमनें यह भी कोशिश की है कि बाकी मेरे दोस्तों से शाम को बात हो रही है, तुर्की के राष्‍ट्रपति से भी। हम उनको भी चाहेंगे अपनी राय रखें। हम जो कोश‍िश कर रहे हैं, डीएस्कलेशन की, उसको कमजोरी न समझा जाये। ह‍िन्दुस्तान का पायलट जो हमने पकड़ा हुआ है। हम एस आ पीस जेस्चर, हम उसको कल उन्हें सौंप देंगे।”

पूर्व स्पीकर ने भी कही यही बात

इस बयान के करीब 20 महीने बाद पाक मीडिया में खबर आयी, जिसमें उन्हीं के पूर्व विदेश मंत्री ख्‍वाजा मोहम्मद आसिफ ने कहा, “पाकिस्तान ने भारतीय वायुसेना के पायलट अभिनंदन को भारत के खौफ की वजह से रिहा किया था। मो. आसिफ ने कहा कि भारत के खौफ की वजह से बीते साल विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान की रिहाई हुई थी। दरअसल यह फैसला भारत को खुश करने के लिए लिया गया था।”

पूर्व मंत्री मो. आसिफ की यह बात तब और पक्की हो गई, जब पाकिस्तानी संसद के पूर्व स्पीकर अयाज सादिक ने भी इसी विषय पर स्‍दन के अंदर एक बयान दिया। अयाज ने संसद में कहा, “रात 10 बजे के करीब जब अभिनंदन की रिहाई पर चर्चा चल रही थी तब पाकिस्तान को डर था कि कहीं भारत उस पर हमला न कर दे। इसी डर की वजह से भारत के हमले सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा के पैर कांप रहे थे और चेहरे पर पसीना आ रहा था।”

अगर इमरान खान के सदन में दिए गए बयान को इन दो पाकिस्तानी नेताओं के बयानों से जोड़ कर देखें, तो साफ है कि जिस टेंशन की बात इमरान खान कर रहे थे, वो यह था कि अगर भारत ने हमला कर दिया, तो क्या होगा। और तो और पीएम खान का सदन में यह कहना कि उन्होंने अपने दोस्तों से बात की है, इस बात की ओर इशारा है कि सरकार ने एक रात पहले इस मुद्दे पर गहन चर्चा की।

12 मिसाइलें लेकर तैयार हैं मोदी

इसी वाक्‍ये से जुड़ा पीएम मोदी का वो बयान भी आपको जरूर याद होगा, जो उन्होंने गुजरात के पाटन में आयोजित चुनावी रैली में दिया था। प्रधानमंत्री ने कहा था, “अमेरिका के उच्च पद पर बेठे ऐसे एक शख्स ने अपना बयान दिया था कि मोदी अब कुछ बड़ा कर बैठेंगे। भारत ने एक साथ 12 मिसाइलें लगाई थीं। अमेरिका ने कहा था कि अच्छा हुआ कि पाकिस्‍तान ने पायलट को वापस कर दिया वरना वो रात कत्ल की रात होती।”

बता दें कि फरवरी 2019 में पाकिस्तान ने हमले के लिए अपने फाइटर जेट भारत में भेजे थे जिसका जवाब देने के लिए भारतीय वायु सेना के विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान ने मिग-21 में उड़ान भरी थी। उस दौरान उनका विमान क्रैश हो गया और पीओ के में जा गिरे थे।

3:04 PM : Cabinet Briefing by Union Minsters

Cabinet approves Mechanism for procurement of ethanol by Public Sector Oil Marketing Companies under Ethanol Blended Petrol Programme. Revised ethanol prices for supply to Public Sector OMCs for Ethanol Supply Year 2020-21.

Cabinet approves extension of Norms for Mandatory Packaging in Jute Materials. 100% of the food-grains and 20% of the sugar shall be mandatorily packaged in diversified jute bags.

Cabinet approves Externally Aided Dam Rehabilitation and Improvement Project (DRIP)–Phase II & Phase III To improve the safety and operational performance of selected 736 dams across the country, this project worth Rs 10,211 crore, will be implemented from April 2021-March 2031.

Cabinet approves Memorandum of Cooperation between India and Japan on cooperation in the field of Information and Communication Technologies.

2:39 PM : COVID-19 UPDATES:

2:29 PM : COVID-19 UPDATES:

2:15 PM : meeting with Delhi Health Secretary

Union Health Secretary Rajesh Bhushan holds meeting with Delhi Health Secretary in view of rising COVID-19 cases in national capital. Top officials of Delhi government participated in meeting.

12:55 PM : Air quality in Delhi

12:55 PM : Recovery rate improves

11:23 AM : Corona Virus Updates:

11:29 AM : BCG vaccination

10:30 AM : भारतीय सेनाएं में बनेंगी तीन कमांड

चीन-अमेरिका की तर्ज पर भारतीय सेनाएं में बनेंगी तीन कमांड, अंतरिक्ष से लेकर जमीनी युद्ध की होगी जिम्मेदारी

निरंतर अपनी सैन्य क्षमता को मजबूती प्रदान कर रहा भारत अब अपनी तीनों सेनाओं का पुनर्गठन कर चीन और अमेरिका की तर्ज पर तीन कमांड बनाएगा। दुनिया में बदलते युद्ध के पारंपरिक तौर-तरीके और ‘मॉडर्न वार’ को देखते हुए तीनों सेनाओं को एक करने का फैसला लिया गया है। इन्हीं तीन कमांड्स की अंतरिक्ष से लेकर साइबर स्पेस और जमीनी युद्धों में महत्वपूर्ण भूमिका होगी। यही नहीं चीन और पाकिस्तान से निपटने के लिए अलग से एक-एक कमांड बनेंगी। आपको बता दें कि सेना के थिएटर कमांड्स की व्यवस्था सिर्फ चीन और अमेरिका में है। फिलहाल यह ‘रोडमैप’ तैयार किया गया है, जिसे 2022 तक लागू किये जाने पर भारत ऐसा करने वाला तीसरा देश हो जाएगा।

मौजूदा समय में थल, नौसेना और वायुसेना के अपने-अपने कमांड्स हैं लेकिन पुनर्गठन होने पर हर थिएटर कमांड में भारत की तीनों सेनाओं नौसेना, वायुसेना और थल सेना की टुकड़ियां शामिल होंगी। सुरक्षा चुनौती की स्थिति में तीनों सेनाएं साथ मिलकर लड़ेगी। थिएटर कमांड का नेतृत्व केवल ऑपरेशनल कमांडर के हाथ में होगा। इसे देखते हुए भारत की सेनाओं को भी अत्याधुनिक बनाकर जमीनी युद्ध के साथ-साथ अंतरिक्ष, इंटरनेट और सीक्रेट वॉरफेयर के लायक सक्षम बनाने की जरूरत समझी गई। इसी के तहत बनाये गए ‘रोडमैप’ में तीनों सेनाओं को मिलाकर तीन स्पेशल कमांड गठित करने का फैसला लिया गया है, जो दुश्मन को किसी भी परिस्थिति में मुंहतोड़ जवाब दे सकें।

सीडीएस को सौंपी गई है जिम्मेदारी

केंद्र सरकार ने भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत को सेनाओं की तीन नई कमांड बनाने की जिम्मेदारी सौंपी है। मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद जल्द ही सैन्य मामलों के विभाग के साथ इसके लिए अतिरिक्त और संयुक्त सचिव के पद सृजित किये जाने हैं। पहले से काम कर रही डिफेंस इंफॉर्मेशन एश्योरेंस एंड रिसर्च एजेंसी का विस्तार करते हुए इसे डिफेंस सा इबर एजेंसी (डीसीए) में बदला जाएगा।

एसओडी के लिए सेंट्रल पूल

इसी तरह स्पेशल ऑपरेशंस डिवीजन (एसओडी) के लिए तीनों सेनाओं से मिलाकर खास तौर पर एक ‘सेंट्रल पूल’ बनाया जाएगा। इसे गैर-पारंपरिक युद्धों की तकनीकों से लैस करके हर तरह की आधुनिक विशेषज्ञता मुहैया कराई जाएगी। यानी सबसे पहले डिफेंस सा इबर एजेंसी (डीसीए) बनेगी और इसके बाद डिफेंस स्पेस एजेंसी (डीएसए) व स्पेशल ऑपरेशंस डिवीजन (एसओडी) तैयार की जाएंगी ।

सीडीएस के पास साइबर कमांड

तैयार किये गए रोडमैप के मुताबिक इन तीनों कमांड का नेतृत्व चीफ ऑफ डि फेंस स्टाफ (सीडीएस) के हाथों में होगा । इसके अलावा सीडीएस के पास सशस्त्र बल स्पेशल ऑपरेशन डिवीजन, साइबर कमांड और उसके तहत रक्षा खुफिया एजेंसी होगी, जिसमें तीनों सेनाओं के अधिकारी शामिल होंगे। सेनाओं का नया ढांचा बनने के बाद थल सेनाध्यक्ष, वायु सेना प्रमुख और नौसेनाध्यक्ष के पास ऑपरेशनल जिम्मेदारी नहीं होगी लेकिन अमेरिकी सेना की तर्ज पर थिएटर कमांडरों के लिए संसाधन जुटाना इन्हीं के जिम्मे रहेगा।

एकीकृत कमांड में तीनों सेनाओं के अधिकारी

एकीकृत कमांड के तहत सेना, वायु सेना और नौसेना की इकाइयां रहेंगीं, जिसके परिचालन के लिए तीनों सेनाओं में से एक-एक अधिकारी को शामिल किया जायेगा। पांचों कमांड्स का नेतृत्व लेफ्टिनेंट जनरल या समकक्ष रैंक के कमांडरों के हाथों में होगा जो मौजूदा कमांड प्रमुखों के रैंक के बराबर होंगे।

चीन, पाकिस्तान के लिए विशेष कमांड

चीन और पाकिस्तान के लिए अलग से बनने वाली कमांड्स की जिम्मेदारी सिर्फ अपनी-अपनी सीमाओं तक सीमित होगी। चीन के लिए बनने वाली उत्तरी कमांड के पास वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के 3,425 किलोमीटर की सीमा के रख-रखाव की जिम्मेदारी होगी। इस कमांड का कार्यक्षेत्र लद्दाख के काराकोरम दर्रे से लेकर अरुणाचल प्रदेश की अंतिम भारतीय चौकी किबिथु तक रहेगा । इस कमांड का मुख्यालय लखनऊ हो सकता है। इसी तरह पाकिस्तान के लिए अलग से पश्चिमी कमांड बनेगी, जिसकी जिम्मेदारी चीन और सियाचिन ग्लेशियर क्षेत्र के सॉल्टोरो रिज पर इंदिरा कर्नल से गुजरात तक होगी, जिसका मुख्यालय जयपुर में रखे जाने की योजना है।

प्रायद्वीपीय कमांड

तीसरी कमांड प्रायद्वीपीय होगी, जिसका मुख्यालय केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में हो सकता है। चौथी एयर डिफेन्स कमांड देश की वायु सीमाओं की सुरक्षा के लिए समर्पित होगी, जिसकी जिम्मेदारी दुश्मनों पर नजर रखने और हवाई हमले करने की होगी। यह कमांड सभी लड़ाकू विमान, मिसाइलें, मल्टी रोल एयर क्राफ्ट पर अपना नियंत्रण रखेगी और भारतीय हवाई क्षेत्र की रक्षा करने के लिए भी जिम्मेदार होगी।

मौजूदा समय में भारतीय सेना, भारतीय वायु सेना और भारतीय नौसेना अलग-अलग तरह से बिना किसी तालमेल के भारतीय हवाई क्षेत्र की रक्षा करती हैं। यह भी एक तथ्य है कि भारतीय सेना के सभी कोर मुख्यालय वायुसेना के हवाई अड्डों के बगल में स्थित हैं, जिसकी वजह से खर्च का बोझ भी दोगुना पड़ता है। इस कमांड को भविष्य में जरूरत को देखते हुए एयरोस्पेस कमांड के रूप में विस्तारित किये जाने का भी प्रस्ताव है।

समुद्री सीमाओं पर नज़र रखेगी पांचवीं कमांड

भारत के पास पांचवीं और आखिरी समुद्री कमांड होगी, जिसमें मौजूदा अंडमान-निकोबार द्वीप कमांड (एएनसी) को इसके साथ मिला दिया जाएगा। चीन से जुड़ी समुद्री सीमा पर नौसेना की अंडमान-निकोबार कमांड (एएनसी) 2001 में बनाई गई थी। यह कमांड देश की पहली और इकलौती है, जो एक ही ऑपरेशनल कमांडर के अधीन जमीन, समुद्र और एयर फोर्स के साथ काम करती है।

पुनर्गठन के बाद समुद्री कमांड का काम हिन्द महासागर और भारत के द्वीप क्षेत्रों की रक्षा करना होगा और साथ ही समुद्री गलियारों को किसी भी बाहरी दबाव से मुक्त और खुला रखना होगा। शुरुआत में भारतीय नौसेना की समुद्री संपत्ति पूर्वी सीबोर्ड पर पश्चिमी समुद्र तट, विशाखापट्टनम पर करवार में और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में रखी जाएगी। खतरे के रूप में चीन के उभरने पर समुद्री कमांड का वैकल्पिक मुख्यालय आंध्र प्रदेश की नई राजधानी में रखने और नौसेना संचालन के लिए पोर्ट ब्लेयर को एक और प्रमुख आधार बनाने का प्रस्ताव है।

(हिन्दुस्थान समाचार)

10:13 AM : US presidential election

10:00 AM : COVID-19 Testing Update

9:38 AM : COVID-19 Testing Update

28 October 2020

3:01PM : एम्स बठिंडा में अत्याधुनिक सुविधाओं वाले उपकरण का उद्घाटन

2:48 PM : COVID-19 diagnostic machine

2:31 PM : eSanjeevani

1:58 PM : Festival of democracy

1:43 PM : All schools in Delhi will remain closed

1:23 PM : Manasi G. Joshi

1:23 PM : Manasi G. Joshi

11:47 AM : ऊंटनी का दूध

ऊंटनी का दूध सिर्फ दूध नहीं बल्कि कई रोगों का है ईलाज, जानें फायदे

कोरोना महामारी का प्रकोप सबसे ज्यादा डायबिटीज, कैंसर, टीबी, बीपी, हार्ट रोग से ग्रसित मरीजों को पर हो रहा है। गर्मी के बाद बदलते मौसम और सर्दी में अस्थमा और सांस के मरीजों प्रभावित होते हैं। ऐसे में उन्हें ज्यादा सतर्क रहना है। लेकिन कोरोना से बचाव के नियमों के पालन के साथ ही अस्थमा से राहत के लिये ऊंटनी का दूध काफी फायदेमंद साबित हो रहा है। सिर्फ अस्थमा ही नहीं वैज्ञानिकों ने पाया कि ऊंटनी का दूध डायबिटीज और अति मंदबुद्धि बच्चों को भी ठीक करने में यह मददगार है। इसका अनुसंधान भी वैज्ञानिक कर चुके हैं।

कई रोगों से निजात दिलाता है ऊंटनी का दूध

ऊंटनी का दूध कई रोगों की गंभारता को कम करने में भी मददगार होता है, जिनमें कैंसर, किडनी, आटिज्म के लक्षणों को कम करने, माइक्रोबियल संक्रमण से आराम दिलाए, आंत से जुड़ी समस्या से आराम, एलर्जी से आराम दिलाए, ऑटोइम्यून रोगों से आराम पहुंचाता है।

ऊंटनी के दूध में पाये जाने वाले पोषक तत्व

जिंक, मैंगनीज, मैग्नीशियम, आयरन, सोडियम, पोटेशियम, कैल्शियम के अलावा कई विटामिन जिनमें -ए, बी, सी, डी और विटामिन-ई पाये जाते हैं।

लॉकडाउन में चर्चा में आया था ऊंटनी का दूध

कोरोना की वजह से लॉकडाउन में ऊंटनी का दूध उस वक्त भी चर्चा में आया जब एक ऑटिज्म और खाने की दूसरी एलर्जी से जूझ रहे साढे तीन साल के बच्चे के लिये उसकी मां ने सोशल मीडिया पर ऊंटनी के दूध के लिये गुहार लगाई। जिसके बाद उड़िसा के एक आईपीएस अधिकारी अरुण बोथरा ने महिला से उन्होंने संपर्क कर मुंबई में रहने वाली महिला तक दूध पहुंचवाया। ऐसा नहीं है कि देश में ऊंटनी के दूध की कमी है बल्कि इसके फायदे से अनजान और ऊंटनी के दूध का न तो कोई सेंटर है और ना ही सरकार ने कोई प्रोत्साहन स्वरूप प्लांट लगाया।

क्या कहते हैं राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान संस्थान के निदेशक

इस बारे में राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान संस्थान (एनआरसीसी) के पूर्व निदेशक डॉ. एन.वी.पाटिल सरकार का इस ओर ध्यान आकर्षित कराना चाहते हैं। उनका कहना है कि वर्तमान परिदृश्य में ऊंट जिस दौर से गुजर रहा है उससे लगता है कि आने वाली सदी में ऊंट चिडिय़ाघर में ही देखे जाएंगे। कागजों में बहुत सारी पॉलिसी बनती हैं लेकिन धरातल पर काम नहीं दिख रहा। एक जानी-मानी दूध की कंपनी ने ऊंटनी के दूध से चॉकलेट बनाई और प्रधानमंत्री से उसका शुभारंभ कराया लेकिन उसके बाद काम बंद हो गया। राजस्थान में राज्य पशु घोषित किया गया लेकिन उसके दूध के मार्केट को लेकर सरकार की ओर से अभी तक कोई कदम दिखाई नहीं दिया। उन्होंने बताया कि अकेले राजस्थान में ऊंटनी का दूध करीब चार लाख लीटर उत्पादन होता है लेकिन इसकी वैल्यू अभी तक न तो सरकार ने समझी और ना ही किसानों ने।

प्रदेश का एकमात्र जैसलमेर जिला है जहां एक संस्था प्रतिदिन 200 से 300 लीटर दूध बेचती है। यहां से कुछ दूध बाहर की कंपनियां भी ले जाती हैं लेकिन शेष 32 जिलों में ऊंटनी के दूध पर कहीं काम नहीं हो रहा है। प्रदेश में अब ऊंटों की संख्या करीब ढाई लाख बची है जिसमें से 50 प्रतिशत ऊंटनी है। यही वजह है कि इतने बड़े स्तर पर ऊंटनी के दूध का कोई उपयोग नहीं हो पा रहा।

11:31 AM : State-wise details

11:05 AM : Voters being felicitated at polling booths

10:55 AM : Global COVID-19 cases

10:43 AM : COVID-19 Updates

10:38 AM : COVID-19 Updates

10:29 AM : COVID-19 Updates

10:01 AM : बिहार विधानसभा चुनाव

9:38 AM : बिहार विधानसभा चुनाव

बिहार विधानसभा चुनाव – पहले चरण में 71 सीटों पर मतदान शुरू

(1111 words)

बिहार विधानसभा की 243 सीटों के लिए तीन चरण में 28 अक्टूबर, 3 नवम्बर और 7 नवम्बर को मतदान कराया जाना है। पहले चरण में 16 जिलों के 71 सीट पर आज मतदान शुरू हो गया है। चुनाव परिणाम 10 नवंबर को घोषित किए जाएंगे। चुनाव के पहले चरण में राज्य सरकार के 8 मंत्रियों की परीक्षा है। पहले चरण में महागठबंधन की अग्निपरीक्षा होने वाली है। बिहार में आरजेडी और कांग्रेस के साथ तीन प्रमुख वामपंथी दलों का एक चुनावी गठबंधन पर जनता मे शक है. भिन्न विचारधारा और कई आर्थिक-सामाजिक मुद्दों पर मतभेदों के बावजूद आरजेडी और कांग्रेस से इन वामदलों के चुनावी तालमेल असरदार नहीं है।

कोरोना महामारी के दौरान हो रहे बिहार विधानसभा के चुनाव के पहले चरण में कोविड-19 प्रोटोकॉल के साथ शांतिपूर्वक वोट डाले जा रहे हैं। मतदान केंद्रों पर सुबह से ही मतदाता मतदान केंद्रों पर पहुंचना शुरू हो गए। भभुआ के बूथ संख्या 142, कुर्था, शेखपुरा, बरबीघा, सासाराम, बांका और लखीसराय आदि स्थानों के कुछ बूथों पर ईवीएम मशीन खराब होने के कारण कुछ समय मतदान प्रभावित हुआ।

पहला चरण मे इन जिलों में हो रही है वोटिंग

बक्सर, भोजपुर, अरवल, जहानाबाद, औरंगाबाद, गया, कैमूर, रोहतास, नवादा, शेखपुरा, मुंगेर, बांका, जमुई और लखीसराय जिले में वोटिंग होगी।

71 विधानसभा सीटें

बिहार चुनाव के पहले चरण की विधानसभा सीटें है, जिनमें कहलगांव, सुल्तानगंज, अमरपुर, धोरैया (एससी), बांका, कटोरिया (एसटी), बेलहर, तारापुर, मुंगेर, जमालपुर, सूर्यगढ़, लखीसराय, शेखपुरा, बारबीघा, मोकामा, बाढ़, मसौढ़ी (एससी), पालीगंज, बिक्रम, संदेश, बराहरा, आरा, अगियांव (एससी), तरारी, जगदीशपुर, शाहपुर, ब्रह्मपुर, बक्सर, दुमरांव, रायपुर (एससी), मोहनिया (एससी), भाबुआ, चैनपुर, चेनारी (एससी), सासाराम, करगहर, दिनारा, नोखा, देहरी, कराकट, अरवल, कुर्था, जेहानाबाद, घोसी, मखदूमपुर (एससी), गोह, ओबरा, नबी नगर, कुटुम्बा (एससी), औरंगाबाद, रफीगंज, गुरुआ, शेरघाटी, इमामगंज, (एससी), बाराचट्टी (एससी), बोध गया (एससी), गया टाउन, टीकरी, बेलागंज, अतरी, वजीरगंज, राजौली (एससी), हिसुआ, नवादा, गोबिंदपुर, वरसालीगंज, सिकंदरा (एससी), जमुई, झाझा, चकाई सीटें शामिल हैं।

हेलीकॉप्‍टर से रखी जा रही निगरानी

पहले चरण की 71 सीटों में से 35 नक्सल प्रभावित हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुबह सात से शाम चार बजे तक वोट डाले जायेंगे जबकि अन्य सीटों पर शाम छह बजे तक मतदान होगा। कोरोना के चलते चुनाव आयोग ने वोटिंग का समय एक घंटे बढ़ाया है। इस बीच औरंगाबाद के ढिबरा में सीआरपीएफ ने दो आईईडी बरामद की हैं, जिन्हें बाद में डिफ्यूज कर दिया गया।

सभी बूथों पर अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है। इसके अलावा हेलीकॉप्टर से भी निगरानी की जा रही है। इस काम के लिए दो हेलीकॉप्टर लगाये गये हैं। पहले चरण में 31 हजार 380 मतदान केंद्र बनाये गये हैं। दो करोड़, 14 लाख, 6 हजार 96 मतदाता अपने अधिकार का इस्तेमाल करेंगे। पहले चरण में 1,066 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। इनमें 114 महिला और 952 पुरुष हैं। राजद के 42, जदयू के 35, भाजपा के 29, कांग्रेस के 21, रालोसपा के 43, लोजपा के 42, बसपा के 27 माले के आठ, हम के छह और वीआईपी के एक उम्मीदवार हैं।

पहले चरण के राजनीतिक समीकरण

पहले चरण में चुनाव एनडीए के लिए खास राजद के बाद दूसरे नंबर नीतीश कुमार की जेडीयू थी जिसने 19 सीटों पर पिछले चुनाव में जीत दर्ज की थी वहीं 12 सीट पर एनडीए की दूसरी सहयोगी भाजपा के विधायक हैं। इस बार पहले चरण में एनडीए गठबंधन के तहत जदयू ने 35, भाजपा ने 29, हम ने 6 और वीआईपी ने इकलौती सीट ब्रह्मपुर से अपने प्रत्याशी दिए हैं। एनडीए के चारों दल ने अच्छी संख्या में नए लड़ाकों को मैदान में उतारा है।

इनमें से कई को मौका पुराने और दिग्गज नेताओं का टिकट काटकर दिया गया है। इन चारों दलों के उम्मीदवारों की बात करें तो 71 में से 21 सीटों पर ऐसे उम्मीदवार मैदान में हैं जो पहली बार विधानसभा के दंगल में उतरे हैं।

जदयू ने अपने हिस्से की 115 सीटों में से 27 पर नए प्रत्याशियों को मौका दिया है। इनमें सबसे अधिक 11 पहले ही चरण में चुनाव मैदान में हैं। हम की ओर से भी पहले चरण में कुटुंबा सीट से श्रवण भुंइयां और सिकंदरा सीट से प्रउल्ल मांझी जबकि वीआईपी से ब्रह्मपुर से जयराम चौधरी पहली ही बार चुनाव लड़ने उतरे पहले चरण के चुनाव में आरजेडी 42 सीट पर चुनाव लड़ रही है। कांग्रेस 21 सीट पर चुनाव लड़ रही है।

27 October 2020

8:31 AM : India's Fatality Rate has touched 1.5%

8:23 AM : Special suburban trains

8:13 AM : मतदान कल

पहले चरण के लिए थमा चुनाव प्रचार, 71 सीटों के लिए मतदान कल

बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर पहले चरण में 16 जिलों की 71 सीटों पर प्रचार का दौर सोमवार शाम पांच बजे समाप्त हो गया। अब प्रत्याशी चुनाव प्रचार नहीं कर सकेंगे। पहले चरण के लिए 28 अक्टूबर को मतदान होगा। पहले चरण में कुल 1,064 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। पहले चरण में जिनके भाग्य का फैसला होना है, उनमें राजद के 42 तो जदयू के 35, भाजपा के 29, कांग्रेस के 21, रालोसपा के 43, लोजपा के 42, बसपा के 27 माले के आठ, हम के छह और वीआईपी के एक उम्मीदवार शामिल हैं।

पहले चरण में कई सियासी दिग्गजों पर नजरें टिकी हैं। इनमें नीतीश सरकार के 8 मंत्रियों की साख भी दांव पर लगी है। इनमें चार भाजपा और चार जदयू कोटे के मंत्री है। जिन मंत्रियों के भाग्य का फैसला 28 को होने वाला है उनमें कृषि मंत्री डॉ. प्रेम कुमार, शिक्षा मंत्री कृष्नंदन वर्मा, ग्रामीण विकास मंत्री शैलेश कुमार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जय कुमार सिंह, परिवहन मंत्री संतोष कुमार निराला, राजस्व मंत्री रामनारायण मंडल, श्रम मंत्री विजय कुमार सिन्हा और अनुसूचित जाति-जनजाति कल्याण मंत्री बृजकिशोर बिंद शामिल हैं।

इनके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी, पूर्व मंत्री विजय प्रकाश, रामेश्वर चौरसिया, राजेंद्र सिंह, श्रेयसी सिंह, भगवान सिंह कुशवाहा और मोकामा से बाहुबलि विधायक अनंत सिंह की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी हुई है।

(हिन्दुस्थान समाचार)

26 October 2020

3:52 PM : The bilateral meeting

3:23 PM : Raksha Mantri dedicates BRO Road to the Nation

3:04 PM : Pompeo arrives India

2:55 PM : Fresh snowfall

2:25 PM : IndiaEnergyForum

9:51 AM : COVID-19

9:42 AM : COVID-19 Update

9:38 AM : COVID-19 Testing Update

9:23 AM : COVID-19 Update

9:19 AM : एयर इंडिया वन

दूसरा ‘एयर इंडिया वन’ भी पहुंचा भारत

भारत के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की यात्रा ओं के लिए भारत के वीवीआईपी बेड़े का दूसरा ‘एयर इंडिया वन’ रविवार को अमेरिका से आ गया। अत्याधुनिक मिसाइल रक्षा प्रणाली से लैस यह वीवीआईपी विमान दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरा। पहला वीवीआईपी एयरक्राफ्ट एक अक्टूबर को भारत आया था। ये दोनों विमान 2018 तक एयर इंडिया के वाणिज्यिक बेड़े का हिस्सा थे, जिन्हें वीवीआईपी विमान बनाने के लिए अमेरिका भेजा गया था ।

भारत के वीवीआईपी बेड़े के लिए ‘एयर इंडिया वन’ का इंतजार अब खत्म हो गया है, क्योंकि अब दोनों हाई-टेक विमान भारत आ चुके हैं। इ नका इस्तेमाल प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति की उड़ान के लिए किया जाएगा, जिसे वायु सेना के पायलट उड़ाएंगे।

मिसाइल डिफेंस सिस्टम से लैस

मिसाइल डिफेंस सिस्टम से लैस दूसरे ‘एयर इंडिया वन’ में भी अशोक की लाट बनी है, जिसके एक तरफ हिन्दी में ‘भारत’ और दूसरी तरफ अंग्रेजी में ‘INDIA’ लिखा है। साथ ही विमान की पूंछ पर बना ‘तिरंगा’ भारत की शान दर्शा रहा है। दोनों विमान को जुलाई में ही बोइंग कंपनी से भारत को मिलने थे लेकिन पहले कोविड-19 महामारी के कारण और फिर तकनीकी कारणों से देरी हुई।

25 साल पुराने बोइंग-747 की होगी विदाई

भारत को मिले ‘एयर इंडिया वन’ में भारत सरकार के ऑर्डर पर बड़े मिसाइल इन्फ्रारेड काउंटरमेशर (एलएआईआरसीएम) और सेल्फ-प्रोटेक्शन सूट (एसपीएस) नामक अत्याधुनिक मिसाइल रक्षा प्रणाली फिट की गई है। मौजूदा समय में प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति घरेलू यात्रा के लिए भारतीय वायु सेना के विमान और अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए एयर इंडिया के बोइंग-747 में उड़ान भरते हैं।

इनके आने के बाद एयर इंडिया वीवीआईपी बेड़े से 25 साल पुराने बोइंग-747 विमान हटा लिये जाएंगे। यह दोनों विमान भारतीय वायुसेना के पायलट उड़ाएंगे। विमानों का मेंटेनेंस एयर इंडिया इंजीनियरिंग सर्विसेज लिमिटेड (एआईईएसएल) द्वारा किया जाएगा। दोनों विमानों के पुनर्निर्माण में लगभग 8,400 करोड़ रुपये की लागत आई है।

अत्याधुनिक तकनीक से लैस

एयर इंडिया वन विमान पूर्ण हवाई कमान केंद्र की तरह काम करते हैं, जिनके अत्याधुनिक ऑडियो-वीडियो संचार को टैप या हैक नहीं किया जा सकता। दोनों विमान एक तरह से मजबूत हवाई किले की तरह हैं। राष्ट्रपति और प्रधान मंत्री के लिए इ न विमानों में उन्नत इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट की सुविधा है, जो विमान पर किसी भी तरह के हमले को न केवल रोकते हैं बल्कि हमले के समय जवाबी कार्रवाई भी कर सकते हैं।

सेल्फ-प्रोटेक्शन सूट (एसपीएस) से लैस होने के नाते यह विमान दुश्मन के रडार सिग्नल्स को जाम कर के पास आने वाली मिसाइलों की दिशा भी मोड़ सकते हैं । विमान के अंदर एक कॉन्फ्रेंस रूम, वीवीआईपी यात्रियों के लिए एक केबिन, एक मेडिकल सेंटर और अन्य गण्यमान्य व्यक्तियों, स्टाफ के लिए सीटें हैं। यह विमान एक बार ईंधन भरने के बाद लगातार 17 घंटे तक उड़ान भर सकेंगे ।

हो सकती है हवा में रीफ्यूलिंग

वर्तमान में प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति ए य र इंडिया के बी – 747 विमानों से यात्रा करते हैं, जिन पर ए य र इंडिया का चिह्न होता है। भारतीय वीवीआईपी बेड़े के मौजूदा विमान सिर्फ 10 घंटे तक ही लगातार उड़ सकते हैं लेकिन इन दोनों हाई-टेक विमा नों की वायु सेना के विमानों की तरह ही उड़ने में असीमित रेंज होगी। इमरजेंसी की स्थिति में प्लेन मिड-एयर रीफ्यूल करने में भी सक्षम होगा।

ट्विन जीई90-115 इंजन वाला ‘एयर इंडिया वन’ अधिकतम 559.33 मील प्रति घंटे की रफ़्तार से उड़ सकता है। इनमें सफेद, हल्का नीला और नारंगी रंग है। हल्का नीला और सफेद रंग का इस्तेमाल अधिक किया गया है जबकि नारंगी रंग की हवाई जहाज के बीच में लाइन दी गई है।

( हिन्दुस्थान समाचार)

9:01 AM : Prime Minister will interact with CEOs

25 October 2020

4:30 PM : गंगटोक-नाथुला वैकल्पिक मार्ग का उद्घाटन

रक्षमंत्री ने किया गंगटोक-नाथुला वैकल्पिक मार्ग का उद्घाटन

नई दिल्ली, 25 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर-पूर्व क्षेत्र में परिचालन स्थिति और सैन्य तैयारियों की समीक्षा करने के दो दिवसीय दौरे के दूसरे दिन रक्षा मंत्री राजनाथ ने रविवार को सुकना में 33 कोर मुख्यालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सिक्किम सेक्टर में राष्ट्रीय राजमार्ग-310 के गंगटोक-नाथुला वैकल्पिक मार्ग का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि गंगटोक से नाथूला को जोड़ने वाला एनएच-310 पूर्वी सिक्किम के सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों की जीवन रेखा है। 19.35 किलोमीटर लम्बे वैकल्पिक मार्ग का निर्माण करके सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने पूर्वी सिक्किम के निवासियों और सेना की आकांक्षाओं को पूरा किया है।

एनएच-310 पूर्वी सिक्किम के सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों की जीवन रेखा

राजनाथ सिंह ने कहा कि पुराने वैकल्पिक मार्ग एनएच-310 पर भारी मात्रा में भूस्खलन और सिंकिंग की संभावनाओं वाला क्षेत्र है। इससे बरसात के मौसम में यहां के लोगों और सेना को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अब यह 19.35 किलोमीटर वैकल्पिक मार्ग बनने से ये दिक्कतें दूर हो सकेंगी। मैं आप सबको यह भी बताना चाहता हूं कि बीआरओ सिक्किम की अधिकांश सीमावर्ती सड़कों का डबल लेन में उन्नयन कर रहा है। इसमें से पूर्व सिक्किम में 65 किलोमीटर सड़क निर्माण-कार्य प्रगति पर है और 55 किलोमीटर सड़क निर्माण योजना के तहत है। नॉर्थ सिक्किम में भारतमाला परियोजना के अंतर्गत चु मगन-चुगथांग-यूमेसेमडोंग और चुगंथांग-लाचेन-गामा-मुगुथांग-नचुला 225 किलोमीटर डबल लेन सड़क का निर्माण कार्य नियोजित है। ये कार्य 9 पैकेजों में नियोजित किए गए हैं जिनकी अनुमानित लागत 5710 करोड़ रुपये है।

बीआरओ ने पूर्वी क्षेत्र के निवासियों और सेना की आकांक्षाओं को पूरा किया

रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के दिशा-निर्देश में पूर्वोत्तर राज्यों में बुनियादी ढांचे के निर्माण में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। बीआरओ के पास पूर्वोत्तर क्षेत्र में कुल 8090 किमी. लम्बाई की सड़कें हैं। इनमें से 5734 किमी. निर्माण योजना में है। पैकेज 1 की स्वीकृति शीघ्र ही होने वाली है। शेष पैकेज के डीपीआर में है। इस प्रोजेक्ट में आधुनिक तकनीक से बनी सड़कों से नॉर्थ सिक्किम के दूर-दराज के इलाके जोड़े जायेंगे। इससे न केवल स्थानीय सामाजिक एवं आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा बल्कि सैन्य तत्परता भी बेहतर होगी। हमारी सरकार का शुरू से ही देश के सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क, पुल, सुरंग एवं इन्फ्रास्ट्रक्चर के निर्माण पर ध्यान केन्द्रित रहा है। सड़कें किसी भी राष्ट्र के सामाजिक-आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

उन्होंने कहा कि कुछ समय तक पहले तक हमारे यहां एक विषम धारणा थी कि सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़कों का विकास हमारे हित में नहीं है। समझा जाता था कि सीमा की सड़कें विपरीत परिस्थितियों में हमारा ही नुकसान कर सकती हैं। हमने इस धारणा को तोड़ा और सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास की नई रहें खुलीं। प्रधानमंत्री नियमित रूप से इन परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा कर रहे हैं और हर समय निधि प्रवाह सुनिश्चित किया जा रहा है। संगठन का वार्षिक बजट आज से पांच-छह साल पहले तक तीन से चार हज़ार करोड़ के बीच हुआ था, अब वह 11000 करोड़ रुपये तक हो चुका है।

युद्ध स्मारक में शस्त्र पूजन

उन्होंने सिक्किम राज्य सरकार के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री, उनके मंत्रिमंडल और अधिकारियों का योगदान प्रशंसनीय है। बीआरओ को सड़क निर्माण के लिए शीघ्र भूमि अधिग्रहण, वन विभाग से मंजूरी और पत्थर खदान की स्थापना में आप लोगों का विशेष सहयोग मिला।

इससे पूर्व रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने दार्जिलिंग में सुकना युद्ध स्मारक में शस्त्र पूजन किया। आज सुबह दार्जिलिंग में सुकना युद्ध स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की और जवानों को संबोधित किया। उनके साथ सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे भी उपस्थित रहे। उन्होंने पूजन के बाद कहा कि भारतीय सेना के जवानों से भेंट करके मुझे हमेशा बेहद ख़ुशी होती है। उनका मनोबल बहुत ऊंचा रहा है, इसकी जितनी भी प्रशंसा की जाए कम है। भारत चाहता है कि तनाव ख़त्म हो और शांति स्थापित हो। मैं पूरी तरह आश्वस्त हूं कि हमारी सेना भारत की एक इंच ज़मीन भी दूसरे के हाथ में नहीं जाने देगी।

(हिन्दुस्थान समाचार)

24 October 2020

1:59 PM : अगले तीन महीने होंगे निर्णायक

1:06 PM : Industry 4.0 Technology

12:56 PM : Industry 4.0 Technology

इस प्रक्रिया में ऐसी स्मार्ट मशीनों का उत्पादन शामिल है, जो मानव हस्तक्षेप के बिना उत्पादन से जुड़ी समस्याओं का विश्लेषण और निदान कर सकती है।

चौथी पीढ़ी के उद्योगों (इंडस्ट्री-4.0) के मौजूदा दौर में इन स्मार्ट तकनीकों के उपयोग से पारंपरिक विनिर्माण और औद्योगिक कार्यप्रणालियों के ऑटोमेशन पर विशेष बल दिया जा सकता है।

12:32 PM : गिरनार में रोपवे का शुभारंभ

12:01 PM : Covid update

12:01 PM : Covid update

11:59 PM : प्रधानमंत्री का संबोधन

 

गिरनार पर्वत पर मां अंबे भी विराजती हैं, गोरखनाथ शिखर भी है, गुरु दत्तात्रेय का शिखर है और जैन मंदिर भी है। यहां की सीढ़ियां चढ़कर जो शिखर पर पहुंचता है, वो अद्भुत शक्ति और शांति का अनुभव करता है। अब यहां विश्व स्तरीय रोप-वे बनने से सबको सुविधा मिलेगी, दर्शन का अवसर मिलेगा।

इस नई सुविधा के बाद यहां ज्यादा से ज्यादा श्रद्धालु आएंगे, ज्यादा पर्यटक आएंगे। आज जिस रोप-वे की शुरुआत हुई है, वो गुजरात का चौथा रोप-वे है। बनासकांठा में अंबाजी के दर्शन के लिए, पावागढ़ में, सतपूड़ा में तीन और रोप-वे पहले से काम कर रहे हैं।

अगर गिरनार रोप-वे कानूनी उलझनों में नहीं फंसा होता, तो लोगों को इसका लाभ बहुत पहले ही मिलने लग गया जाता। हमें सोचना होगा कि जब लोगों को इतनी बड़ी सुविधा पहुंचाने वाली व्यवस्थाओं का निर्माण, इतने लंबे समय तक अटका रहेगा, तो लोगों का कितना नुकसान होता है।

आयुष्मान भारत योजना के तहत गुजरात के 21 लाख लोगों को मुफ्त इलाज मिला है। सस्ती दवाइयां देने वाले सवा 5 सौ से ज्यादा जनऔषधि केंद्र गुजरात में खुल चुके हैं। इसमें से लगभग 100 करोड़ रुपए की बचत गुजरात के सामान्य मरीज़ों को भी हुई है।

बीते दो दशकों में गुजरात ने आरोग्य के क्षेत्र में अभूतपूर्व काम किया है। चाहे वो आधुनिक अस्पतालों का नेटवर्क हो, मेडिकल कॉलेज हों, गांव-गांव को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ने का बहुत बड़ा काम किया गया है।

गुजरात ने तो बिजली के साथ सिंचाई और पीने के पानी के क्षेत्र में भी शानदार काम किया है। इस कार्यक्रम में जुड़े हम सभी जानते हैं कि गुजरात में पानी की क्या स्थिति थी। बीते दो दशकों के प्रयासों से आज गुजरात उन गांवों तक भी पानी पहुंच गया है, जहां कोई पहले सोच भी नहीं सकता था।

इस योजना के तहत अगले 2-3 वर्षों में लगभग साढ़े 3 हज़ार सर्किट किलोमीटर नई ट्रांसमिशन लाइनों को बिछाने का काम किया जाएगा। मुझे बताया गया है कि आने वाले कुछ दिनों तक हज़ार से ज्यादा गांवों में ये योजना लागू भी हो जाएगी। इनमें भी ज्यादा गांव आदिवासी बाहुल्य इलाकों में हैं।

10:03 PM : In Conversation

23 October 2020

11:48 AM : बिहार चुनाव: सासाराम में जनसभा को संबोधित करने पहुंचे प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री ने कहा :

भारत की विकास यात्रा में अहम योगदान देने वाले बिहार आकर बेहद खुश हूं।

11:21 AM : बार-बार कपड़े धोने से बच सकते हैं

कोरोना काल में सर्दी के मौसम में बार-बार कपड़े धोने से बच सकते हैं, रखें इन बातों का ध्यान

भारत की स्वदेशी वैक्सीन बायोटेक की कोरोना वैक्सीन के दो फेज के सफल ट्रायल के बाद अब तीसरे फेज के ट्रायल की मंजूरी मिल गई है। लेकिन जब तक तीसरे फेज के परिणाम आयेंगे तब तक कोरोना से बचाव की इलाज है। इसलिये पीएम मोदी ने भी बार-बार दोहराया है कि जब तक दवाई नहीं तक ढिलाई नहीं। वहीं बसंत ऋतु से शुरू हुये कोरोना ने गर्मी, बारिश के बाद सर्दी अब भारत में सर्दी के मौसम में प्रवेश करने वाला है। ऐसे में लोगों में ठंड में कोरोना के प्रकोप से बचने के लिये क्या कुछ सावधानी रखनी है, इस बारे में आरएमएल, नई दिल्ली के डॉ. ए के वार्ष्‍णेय ने कई महत्वपूर्ण जानकारी दी।

सांस और अस्थमा के मरीज रखें सावधानी

डॉ. वार्ष्‍णेय ने कोरोना काल में सांस के मरीजों को सलाह देते हुये कहा कि सर्दी के मौसम में अस्‍थमा और सांस के मरीजों को तकलीफ बढ़ जाती है, क्योंकि मौसम में कई प्रकार के रेस्प‍िरेटरी वायरस एक्टिव हो जाते हैं और रेस्‍प‍िरेटरी इंफेक्शन बार-बार होता है। इस बार जहां तक संभव हो ऐसे लोग घर में ही रहें। अगर बाहर निकलते हैं, तो अपनी दवाइयां बिलकुल भी कम मत करें। अगर लक्षण बढ़ते हैं, तो तुरंत डॉक्‍टर से संपर्क करें। मास्‍क लगाने में कोताही मत बरतें और धूम्रपान से दूर रहें। हो सके तो इंफ्लुएंजा वैक्‍सीन लगवा लें।

सर्दी के मौसम में कपड़े धोने से बच सकते है

वहीं सर्दी के मौसम में बार-बार बाहर से आने पर नहाने और कपडे़ धोने की चिंता भी लोगों को सता रही है। इस बारे में उन्होंने कहा कि जिस जगह पर आप जा रहे हैं, वहां अगर सभी लोग मास्क लगाये हुए हैं, तो आपके कपड़ों पर इंफेक्शन आने की संभावना बहुत कम होगी। लगभग न के बराबर। फिर भी अगर मान लें कि वायरस कपड़े पर आ गया है, तो सूखी सतहों पर वायर 8-10 घंटे से अधिक जीवित नहीं रहता है। इस तरह से प्लान करें कि एक जैकेट या स्वेटर हर बार ऊपर पहनें, घर आते ही उसे उतार कर कहीं अलग रख दें, या धूप में डाल दें। वैसे कोशिश करें कि सर्दियों में बाहर नहीं निकलें।

फ्रिज का खाना न खायें

सर्दियों में खान-पान पर विशेष ध्यान देने को लेकर डॉ वार्ष्णेय ने कहा कि घर का बना खाना ही खायें, लेकिन ध्‍यान रहे खाना फ्र‍िज का रखा या बहुत अधिक ठंडा नहीं हो। अगर फ्र‍िज से कुछ निकाल कर कुछ खाना है, तो उसे थोड़ी देर के लिए बाहर रख दें, जब तापमान सामान्य हो जाए तभी खायें। अगर किसी चीज से आपको एलर्जी है, तो उसे तो कतई मत खायें।

11:03 AM : COVID-19 Updates

10:44 AM : Decline in the active cases

9:12 AM : Anti-ship missile (AShM)

9:05 AM : India's cumulative Positivity Rate

8:50 AM : कोरोना से 11 लाख मौतें

8:45 AM : अमेरिकी चुनाव

जो बाइडेन पर हमला करते हुए ट्रंप ने कहा कि हम अपने राष्ट्र को बंद नहीं कर सकते, 99.9% लोग ठीक हो गए; राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि हमारे पास कोरोना वायरस का एक टीका आने वाला है, जैसे ही वैक्सीन आती है हम उसके वितरण के लिए तैयार हैं, जो बिडेन के पास कोई योजना नहीं

22 October 2020

5:01 PM : कोविड-19

कोविड-19 : महंगी पड़ सकती है लापरवाही और बेफिक्री

(627 words)

दुनियाभर में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा चार करोड़ को पार कर चुका है। दूसरी ओर राहत की खबर यह सामने आई कि भारत में कोरोना संक्रमण का पहला दौर बीत चुका है और बीते तीन सप्ताह के दौरान कोरोना के नए मामलों और इससे होने वाली मौतों में कमी आई है। स्वस्थ होने वालों की दर बढ़कर 88.03 फीसदी हो गई है और देश में सक्रिय मरीजों की संख्या अब 8 लाख से कम है। हालांकि कुछ विशेषज्ञ कहते रहे हैं कि कोरोना का असली प्रभाव आना बाकी है और अब नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल ने सर्दियों में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर आने की बात कहकर विशेषज्ञों की इस आशंका की पुष्टि भी कर दी है।

दरअसल महामारी की पहली लहर थमने के बाद यूरोप में कोरोना संक्रमण फिर से बढ़ गया है, जहां अबतक 63 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं और दुनिया के हर 100 संक्रमितों में से 34 व्यक्ति यूरोपीय देशों के ही हैं। ब्रिटेन में सर्दी शुरू होते ही 40 फीसदी मामले बढ़ गए हैं। यही वजह है कि कोरोना से निपटने के प्रयासों के लिए बने विशेषज्ञ पैनल के प्रमुख वीके पॉल भारत में भी सर्दियों में संक्रमण की दूसरी लहर आने की आशंका जताते हुए कह रहे हैं कि देश बेहतर स्थिति में है लेकिन अभी हमें लंबा रास्ता तय करना है।

त्योहार का सीजन शुरू हुआ भारत में

भारत में त्योहारी सीजन की शुरुआत हो चुकी है। जिस प्रकार देशभर में कोरोना को लेकर लापरवाही और बेफिक्री का माहौल देखा जा रहा है, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को त्योहारी मौसम में लोगों से वायरस के प्रति लापरवाही न बरतने की अपील करने के लिए राष्ट्र को सम्बोधित करना पड़ा। उनका सीधा और स्पष्ट संदेश था कि जबतक दवाई नहीं, तबतक ढिलाई नहीं। देशवासियों को चेताते हुए उन्होंने कहा कि सावधानी का परिचय न देने के वैसे ही खतरनाक परिणाम हो सकते हैं, जैसे कई यूरोपीय देशों और अमेरिका में देखने को मिल रहे हैं, जहां कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर ने सिर उठा लिया है और इसीलिए प्रतिबंधात्मक उपाय वहां फिर से लागू करने पड़ रहे हैं।

कोरोना को लेकर प्रधानमंत्री को एकबार फिर जनता को इसीलिए सचेत करने के लिए सामने आना पड़ा क्योंकि विभिन्न सरकारी एजेंसियां चेतावनियां दे रही हैं कि अगर पूरी एहतियात नहीं बरती गई तो कोरोना की दूसरी लहर सर्दियों में आ सकती है, जो पहली लहर से ज्यादा भयावह होगी।

प्रधानमंत्री ने अपने 12 मिनट के सम्बोधन में लोगों को भीड़ से बचने और दो गज की दूरी अपनाने की हिदायतें दोहरायी लेकिन उनके इस सम्बोधन के बाद सरकारी तंत्र पर कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न भी खड़े हुए हैं। मसलन, क्या कोरोना संक्रमण रोकने के लिए जारी किए जाने वाले तमाम दिशा-निर्देश केवल आम जनता के लिए ही हैं? प्रधानमंत्री को कोरोना प्रोटोकॉल की लगातार धज्जियां उड़ाते रहे राजनीतिक लोगों की जमात के लिए भी कुछ सख्त शब्द बोलने चाहिए थे।

स्वतंत्र टिप्पणीकार योगेश कुमार गोयल का कहना है कि त्योहारी सीजन में जिस प्रकार लोग कोरोना से पूरी तरह बेफिक्र होकर बगैर मास्क के सार्वजनिक स्थानों पर घूमने लगे हैं, वह आने वाले दिनों में वाकई काफी खतरनाक साबित हो सकता है। विशेषज्ञों की तमाम चेतावनियों पर गौर करने के बाद हमें समझ लेना चाहिए कि जब तक कोरोना की वैक्सीन नहीं आ जाती, तबतक कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए मास्क का इस्तेमाल सबसे प्रभावी उपाय है। सर्दियों में कोरोना का संक्रमण तेजी से बढ़ने की जिस तरह की रिपोर्टें आ रही हैं, ऐसे में बेहद जरूरी है कि हम लापरवाही बरतकर अपने साथ-साथ दूसरों को भी मुश्किल में डालने से परहेज करें क्योंकि यदि हमने सामाजिक दूरी और मास्क पहनने जैसी हिदायतों को दरकिनार किया तो संक्रमण का स्तर काफी ऊपर जा सकता है और हालात बिगड़ सकते हैं।

4:43 PM : सर्दियों में कैसे करें त्वचा की देखभाल

सर्दियों में कैसे करें त्वचा की देखभाल, बता रही हैं सौंदर्य विशेषज्ञ

अक्टूबर के पहले सप्ताह से ही देश के उत्तरी छोर पर स्थित ऊंचे हिमालय की पर्वत श्रृंखलाओं पर सीजन की पहली बर्फबारी रिकॉर्ड की गई है। इस बर्फबारी के बाद पहाड़ों के साथ-साथ मैदानी इलाकों में भी ठण्ड का आगाज हो गया है। वातावरण में अचानक बदलाव से त्वचा, सिर, होठों तथा नाखून बुरी तरह प्रभावित होते हैं। सर्द ऋतु की तेज हवाओं से त्वचा शुष्क तथा पपड़ीदार होने के साथ ही होठों का फटना भी शुरू हो जाता है।

सर्दियों के आरम्भ में मौसम में आर्द्रता की कमी से त्वचा में खिंचाव आना शुरू हो जाता है। जैसे ही वातावरण में आर्द्रता कम होना शुरू होती है वैसे ही शुष्क तथा फोड़े-फुन्सी से ग्रसित त्वचा के लिए परेशानियों का सबब शुरू हो जाता है। ऐसी परिस्‍थ‍ितियों में त्वचा की देखभाल कैसे करें, बता रही हैं लखनऊ की सौंदर्य विशेषज्ञ शहनाज हुसैन।

दरअसल सर्दियों के मौसम में हमारी त्वचा को दोहरी मार झेलनी पड़ती है क्योंकि पहले तो वातावरण में नमी की कमी तथा ठण्डी हवाओं से त्वचा रूखी-सूखी हो जाती है तो दूसरी और ठण्ड की मार से बचने के लिए हम गर्म पानी से नहाते हैं और घर में हॉट एयर कंडीशनर, अंगीठी, हॉट रॉड, हीटर आदि का जमकर प्रयोग करते हैं, जिससे घर के वातावरण में भी नमी की कमी हो जाती है।

यह सभी विद्युत उपकरण हमारे घर के वातावरण और शरीर में नमी की कमी कर देते हैं। इससे हमारी त्वचा सूखकर फटने लगती है। इस सीजन में संवेदनशील त्वचा के लोग ज्यादा प्रभावित होते हैं जिसमें त्वचा से खून बहना शुरू हो जाता है तथा इन्फेक्शन कई नई बीमारियों को दावत देती है। इसीलिए हमें सर्दियों में हमें अपनी त्वचा के प्रति ज्यादा सतर्क और संवेदनशील रहने की जरूरत है।

त्वचा की देखभाल को लेकर शहनाज हुसैन की टिप्‍स इस प्रकार हैं-

> इस मौसम में सबसे ज्यादा जरूरत त्वचा की नमी बनाये रखने की होती है इसलिए दिन में आठ-दस गिलास शुद्ध जल नियमित रूप से पीयें। अपनी दिनचर्या में जूस, सूप, नारियल पानी सहित अनेक द्रव्य पदार्थों का सेवन करें, जिससे शरीर में नमी और आद्रता बनी रहे। इसके लिए आप मौसमी फलों जैसे स्ट्रॉबेरी, ब्लू बेर्री, ब्लैक बेरी, पल्म, सेब, अमरूद आदि को जरूर शामिल कीजिये।

> इस मौसम में त्वचा के अनुकूल वस्त्रों का उपयोग कीजिये। हालाँकि इस मौसम में ऊनी कपड़े पहनने की अनिवर्यता होती है लेकिन ऊनी स्वेटर/ पुल ओवर/ जुराबें आपकी त्वचा में जलन पैदा कर सकती हैं। इसलिए ज्यादातर सूती/ सिल्क के प्राकृतिक फाइबर को प्राथमिकता दें ताकि त्वचा सहज महसूस कर सके।

> घर से बाहर जाते समय हाथों को दस्ताने से कवर कर लें तथा यदि बारिश आदि की वजह से आपके कपड़े /जुराबें/ दस्ताने भीग जाएँ तो इन्हें तत्काल बदल दीजिये अन्यथा आपकी त्वचा में खारिस जलन आदि पैदा हो सकती है।

> फटी तथा शुष्क त्वचा को स्वास्थ्यप्रद बनाने के लिए नहाने से पहले नारियल तेल से मालिश कीजिये। नहाने के लगभग आधा घण्टा तक घर पर ही सामान्य वातावरण में रहें। अपने नहाने के पानी की बाल्टी में कुछ बूंदें ऑलिव ऑयल, कोकोनट ऑयल, आलमंड ऑयल डाल लें इससे नहाती बार आपकी त्वचा से कम हुई नमी को शरीर में बरकरार रखने में मदद मिलेगी।

> अगर आप नहाने से पहले शरीर में ऑलिव ऑयल, कोकोनट ऑयल के गर्म तेल या दूध से शरीर की मालिश करें, ज्यादा गर्म पानी से नहाने से परहेज करें तथा नहाने की अवधि को कम करें तो त्वचा की नमी बनाये रखने में मदद मिलेगी।

> सर्दियों में सही खानपान त्वचा की सेहत में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। इस मौसम में तेल नमी को बरकरार रख सकते हैं। अपनी डाइट में ऑलिव ऑयल, कोकोनट ऑयल, आलमंड ऑयल, अवोकेडो ऑयल आदि को शामिल कीजिये। इससे आपके शरीर के आंतरिक भाग को स्वास्थ्यवर्धक बनाकर त्वचा की लालिमा और आकर्षण को प्राकृतिक तौर पर बरकरार रखा जा सकेगा।

> अपनी त्वचा को ठण्डी /बर्फीली हवाओं से बचाने के लिए हमेशा ढंक कर रखें। अल्कोहल युक्त सौन्दर्य प्रसाधनों के उपयोग से बचें। नहाने तथा अन्य दैनिक कार्यों में केमिकल युक्त साबुन की बजाय हल्के फेसवॉश का प्रयोग करें तथा अपने पैरों, हाथों, होंठों को मुलायम रखने के लिए त्वचा के अनुकूल सौन्दर्य प्रसाधनों/ क्रीम का उपयोग करें।

> सर्द मौसम के शुरुआती दिनों में त्वचा को क्रीम, माइस्चराईजर, फलों, पेय पदार्थो तथा उचित पोषाहार के माध्यम से नमी तथा आर्द्रता प्रदान की जानी चाहिए।

> अगर आप अपनी रसोई तथा किचन गार्डन से कुछ पदार्थों का सही उपयोग करें तो त्वचा से सम्बन्धित सभी परेशानियों को प्राकृतिक तरीके से आसानी से उपचार किया जा सकता है। सर्दियों में सामान्य तथा शुष्क त्वचा को सुबह तथा रात्रि में क्लीजिंग क्रीम तथा जैल से सामान्य पानी से धोना चाहिए। इस मौसम में त्वचा की आर्द्रता वातावरण में मिल जाती है तथा त्वचा को खोई हुई आर्द्रता को प्रदान करना अत्यधिक आवश्यक होता है।

> त्वचा में आर्द्रता तथा नमी की लगातार कमी से त्वचा में रूखापन, पपड़ी, खुरदरापन तथा लालगी आनी शुरू हो जाती है। रात्रि में त्वचा से मेकअप तथा प्रदूषण की वजह से नमी गन्दगी को हटाने के लिए त्वचा की क्लींजिंग अत्यधिक जरूरी हो जाती है। त्वचा पर क्लींजर की मदद से हल्के से मालिश कीजिए तथा गीली कॉटन वूल से साफ कर दीजिए।

> गीली कॉटन वूल त्वचा से किसी भी प्रकार की नमी को नहीं सोखती जिसकी वजह से त्वचा में शुष्कता को रोकने में मदद मिलती है। सुबह त्वचा की क्लीजिंग के बाद त्वचा को गुलाब जल आधारित स्किन टाॅनिक या गुलाब जल से कॉटन वूल की मदद से टोन कीजिए। टोनिंग की वजह से त्वचा में रक्त संचार बढ़ता है।

> सर्दियों के मौसम में दिन के समय त्वचा को धूप की किरणों से बचाने के लिए सनस्क्रीन का उपयोग कीजिए। सूर्य की तपिश की वजह से त्वचा में नमी में कमी आ जाती है।

> अधिकतर सनस्क्रीन में माईस्चराईजर विद्यमान होते हैं। माइस्चराईजर क्रीम तरल पदार्थ के रूप में उपलब्ध होते हैं। तरल माइस्चराईजर को फाउंडेशन लगाने से पहले प्रयोग करना चाहिए। जब भी त्वचा में रूखापन बढ़ना शुरू होता है तभी त्वचा पर द्रव्य माईस्चराईजर का प्रयोग कीजिए।

> रात्रि को त्वचा को नाईटक्रीम से पोषित करना चाहिए। त्वचा पर नाईटक्रीम लगाने से त्वचा चिकनी तथा मुलायम हो जाती है। जिससे त्वचा में नमी बनी रहती है। त्वचा की क्लींजिंग के बाद त्वचा पर पोषक क्रीम लगाकर त्वचा के ऊपरी तथा निचले हिस्से में अच्छी तरह मालिश करनी चाहिए तथा इसके बाद क्रीम को गीली कॉटन वूल से साफ करना चाहिए।

> आंखों की बाहरी त्वचा के इर्द-गिर्द क्रीम लगाकर 10 मिनट बाद इसे गीले कॉटन वूल से धो डालना चाहिए। अक्सर तैलीय त्वचा को सतही तौर पर रूखेपन की समस्या से रूबरू होना पड़ता है।

> तैलीय त्वचा साफ करने के तुरन्त बाद रूखी बन जाती है। लेकिन अगर इस त्वचा पर क्रीम या माइस्चराईजर की मालिश की जाए तो फोड़े, फुन्सियां आदि उभर आती है।

> सामान्य त्वचा को मुलायम तथा कोमल बनाने के लिए प्रतिदिन दस मिनट चेहरे पर शहद लगाकर इसे साफ एवं ताजे पानी से धो डालिए। शुष्क त्वचा के लिए शहद में अण्डे का पीला भाग या एक चम्मच शुद्ध नारियल तेल डालकर त्वचा को मालिश कीजिए। तैलीय त्वचा के लिए शहद में अण्डे का सफेद हिस्सा तथा कुछ बूंदे नींबू जूस डालकर त्वचा की मालिश कीजिए।

> सेब के छिल्के तथा गूदे वाले भाग को बलेंडर में पूरी तरह पीस कर लेप बना लीजिए। इसे 15 मिनट तक चेहरे पर फेश मास्क की तरह लगाइए तथा इसके बाद ताजे ठण्डे पानी से धो डालिए। यह सभी प्रकार की त्वचा के लिए अत्याधिक प्रभावी स्किन टोनर साबित होता है।

> धृतकुमारी सबसे प्रभावकारी माइस्चराईजर है। प्रतिदिन चेहरे पर ऐलोवेरा जेल लगाकर चेहरे को 20 मिनट बाद ताजे साफ पानी से धो डालिए। यदि आपके घर आंगन में धृतकुमारी का पौधा उगा है तो आप पौधे से सीधे जैल या जूस चेहरे पर लगा सकते हैं। एलोवेरा जैल पत्तियों के बाहरी भाग के बिल्कुल नीचे विद्यमान रहता है। यदि आप इसे अपने आंगन से सीधा प्रयोग में ला रहे हैं तो पौधे को साफ करना कतई न भूलें।

(ह‍िन्दुस्थान समाचार)

8:27 AM : India continues to report one of the lowest cases/million population

8:19 AM : Vande Bharat Mission

8:08 AM : चीन बॉर्डर पर शस्त्र पूजन

विजयदशमी पर चीन बॉर्डर पर शस्त्र पूजन करेंगे रक्षा मंत्री

इस साल विजयदशमी के शुभ अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह चीन सीमा पर तैनात सैनिकों के साथ दशहरा मनाएंगे। वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर ही वे शस्त्र पूजन भी करेंगे। रक्षा मंत्री 23-24 अक्टूबर को सिक्किम सेक्टर में एलएसी का दौरा करेंगे। इस दौरान वे सिक्किम सेक्टर में बनाये गए कई रणनीतिक पुलों का उद्घाटन और शुभारंभ भी करेंगे।

रक्षा मंत्री ने पिछले साल वायुसेना के फाइटर पायलटों की टीम के साथ 8 अक्टूबर को पहला राफेल लेने के लिए फ्रांस के बॉर्डेक्स में मैन्यूफैक्चरिंग प्लांट में गए थे। इसी दिन विजयादशमी पर्व पर उन्होंने फ्रांस में पहला राफेल लड़ाकू विमान हासिल करके उसका शस्त्र पूजन किया था। इस साल शस्त्र पूजन का कार्यक्रम चीन सीमा पर रखा गया है। भारत में कई जगह दशहरा पर्व पर शस्त्रों की पूजा करने का रिवाज है। इसीलिए इस बार इसी दिन चीन से लगी सीमा पर जाकर सैनिकों के साथ शस्त्र पूजन करने का फैसला लिया गया है। चीन सीमा पर दशहरा मनाने का मकसद यहां तैनात सैनिकों का मनोबल बढ़ाना भी है।

रणनीतिक पुलों का होगा उद्घाटन

रक्षा मंत्री 23-24 अक्टूबर को दौरे के समय सिक्किम सेक्टर में बनाये गए कई रणनीतिक पुलों का उद्घाटन और शुभारंभ भी करेंगे। राजनाथ सिंह की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब भारत और चीन के बीच चल रहे गतिरोध को कम करने के लिए सैन्य वार्ता चल रही है। एलएसी पर तीन बार फायरिंग की घटना भी हो चुकी है और गलवान की हिंसक झड़प में दोनों देशों के जवान अपनी जान गंवा चुके हैं। इसलिए अपने दो दिवसीय दौरे में रक्षा मंत्री उन स्थानों पर भी जा सकते हैं, जहां भारत ने चीन की ओर से होने वाली संभावित घुसपैठ की कोशिश को रोकने के लिए बड़ी संख्या में सैनिकों और टैंकों की तैनाती की है।

(हिन्दुस्थान समाचार)

8:00 AM : Aditi Urja Sanch

21 October 2020

6:19 PM : Khadi and Village Industries Commission

6:00 PM : चीन बॉर्डर पर शस्त्र पूजन

विजयदशमी पर चीन बॉर्डर पर शस्त्र पूजन करेंगे रक्षा मंत्री

इस साल विजयदशमी के शुभ अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह चीन सीमा पर तैनात सैनिकों के साथ दशहरा मनाएंगे। वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर ही वे शस्त्र पूजन भी करेंगे। रक्षा मंत्री 23-24 अक्टूबर को सिक्किम सेक्टर में एलएसी का दौरा करेंगे। इस दौरान वे सिक्किम सेक्टर में बनाये गए कई रणनीतिक पुलों का उद्घाटन और शुभारंभ भी करेंगे।

रक्षा मंत्री ने पिछले साल वायुसेना के फाइटर पायलटों की टीम के साथ 8 अक्टूबर को पहला राफेल लेने के लिए फ्रांस के बॉर्डेक्स में मैन्यूफैक्चरिंग प्लांट में गए थे। इसी दिन विजयादशमी पर्व पर उन्होंने फ्रांस में पहला राफेल लड़ाकू विमान हासिल करके उसका शस्त्र पूजन किया था। इस साल शस्त्र पूजन का कार्यक्रम चीन सीमा पर रखा गया है। भारत में कई जगह दशहरा पर्व पर शस्त्रों की पूजा करने का रिवाज है। इसीलिए इस बार इसी दिन चीन से लगी सीमा पर जाकर सैनिकों के साथ शस्त्र पूजन करने का फैसला लिया गया है। चीन सीमा पर दशहरा मनाने का मकसद यहां तैनात सैनिकों का मनोबल बढ़ाना भी है।

रणनीतिक पुलों का होगा उद्घाटन

रक्षा मंत्री 23-24 अक्टूबर को दौरे के समय सिक्किम सेक्टर में बनाये गए कई रणनीतिक पुलों का उद्घाटन और शुभारंभ भी करेंगे। राजनाथ सिंह की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब भारत और चीन के बीच चल रहे गतिरोध को कम करने के लिए सैन्य वार्ता चल रही है। एलएसी पर तीन बार फायरिंग की घटना भी हो चुकी है और गलवान की हिंसक झड़प में दोनों देशों के जवान अपनी जान गंवा चुके हैं। इसलिए अपने दो दिवसीय दौरे में रक्षा मंत्री उन स्थानों पर भी जा सकते हैं, जहां भारत ने चीन की ओर से होने वाली संभावित घुसपैठ की कोशिश को रोकने के लिए बड़ी संख्या में सैनिकों और टैंकों की तैनाती की है।

5:35 PM : India-ROK Special Strategic Partnership

5:03 PM : Ministry of Jal Shakti

3:00 PM : Watch Live: Cabinet briefing by Union Minister

3:00 PM : Watch Live: Cabinet briefing by Union Minister

2:45 PM : NIMHANS toll free helpline

12:59 PM : COVID-19 Updates:

12:57 PM : COVID-19 Updates:

12:02 PM : गांवों में पर्यटन को बढ़ावा

11:49 AM : NASA’s OSIRIS-REx spacecraft

11:31 AM : India- Sri Lanka: #SLINEX20

11:05 AM : COVID-19 in India

10:46 AM : US Senators group support India's decision

8:28 AM : Police Commemoration Day

7:23 AM : आयुष्‍मान सहकार योजना

ग्रामीण भारत को स्वस्‍थ्‍य बनाने में वरदान सिद्ध होगी आयुष्‍मान सहकार योजना

ग्रामीण भारत में रहने वाले लोगों को बेहतर व उच्च स्तर की स्वास्थ्‍य सेवाएं मुहैया कराने के लिए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तहत अंतर्गत शीर्ष स्वायत्त विकास वित्त संस्थान राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) ने आयुष्‍मान सहकार योजना तैयार की है, जिसका शुभारम्‍भ सोमवार को किया गया।

यह योजना क्या है, और कैसे ग्रामीण भारत को और अधिक स्वस्थ्‍य बनाने का कार्य करेगी, यह जानने के लिए प्रसार भारती ने कुछ विशेषज्ञों से बात की। विशेषज्ञों की राय जानने से पहले एक नज़र इस योजना पर।

क्या है आयुष्मान सहकार योजना

यह योजना विभिन्न आयामों में स्वास्थ्य प्रणालियों को आकार देने के उद्देश्य से स्वास्थ्य में निवेश, स्वास्थ्य सेवाओं के संगठन, प्रौद्योगिकियों तक पहुंच, मानव संसाधन का विकास करने, चिकित्सा बहुलवाद को प्रोत्साहित करने, किसानों को सस्ती स्वास्थ्य देखभाल इत्यादि को सम्मिलित करती है। इसका स्वरूप- अस्पतालों, स्वास्थ्य सेवा, चिकित्सा शिक्षा, नर्सिंग शिक्षा, पैरामेडिकल शिक्षा, स्वास्थ्य बीमा एवं समग्र स्वास्थ्य प्रणालियों जैसे आयुष के साथ व्यापक है । आयुष्मान सहकार योजना सहकारी अस्पतालों को मेडिकल/ आयुष शिक्षा में भी वित्त पोषण करेगी।

आयुष्मान सहकार में अस्पताल के निर्माण, आधुनिकीकरण, विस्तार, मरम्मत, नवीकरण, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा के बुनियादी ढांचे के साथ निम्न को सम्मिलित किया गया है। इसके अंतर्गत अस्पताल और / या मेडिकल कॉलेज, आयुष, दंत चिकित्सा, नर्सिंग, फार्मेसी, पैरामेडिकल, फिजियोथेरेपी आदि के कॉलेजों में स्नातक या स्नातकोत्तर कार्यक्रम चलाने जाएंगे।

इसके तहत देश भर में योग कल्याण केंद्र, आयुर्वेद, एलोपैथी, यूनानी, सिद्ध, होम्योपैथी अन्य पारंपरिक चिकित्सा स्वास्थ्य केंद्र, आपातकालीन चिकित्सा सेवाएँ और आघात केंद्र, फिजियोथेरेपी सेंटर, मोबाइल क्लिनिक सेवाएँ, हेल्थ क्लब और जिम, डेंटल केयर सेंटर, नेत्र देखभाल केंद्र, प्रयोगशाला सेवाएं, ब्लड बैंक, पंचकर्म/थोक्कनम/ क्षार सूत्र चिकित्सा केंद्र,आदि स्थापित किए जाएंगे।

साथ ही बुजुर्गों, विकलांग व्यक्तियों के लिए स्वास्थ्य देखभाल के लिए विशेष सेवाएं शुरू होंगी। यही नहीं यूनानी चिकित्सा पद्धति (इलाज बिल तदबीर) की रेजिमेंटल थेरेपी, मातृ एवं शिशु देखभाल सेवाएँ, प्रजनन और बाल स्वास्थ्य सेवाएं, उपलब्‍ध करायी जाएंगी।

10 हजार करोड़ आबंटित

आयुष्‍मान सहकार योजना पर एनसीडीसी के प्रबंध निदेशक संदीप नायक ने कहा, “आयुष्‍मान सहकार फंड बहुत अलग फंड है। इसका मुख्‍य लक्ष्‍य सहकारिता के माध्‍यम से देश भर में हेल्‍थ इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर एवं सविसेस को मजबूत बनाना है। सरकार ने फिलहाल 10 हजार करोड़ रुपए का फंड आबंटित किया है। इस योजना का खास फोकस ग्रामीण क्षेत्रों पर होगा।”

सहकार भारती के नेशनल वाइस प्रेसिडेंट दीनानाथ ठाकुर ने प्रसार भारती से बातचीत में कहा कि सहकारी समितियां तो पूरे देश में फैली हैं। खास तौर से देश के गांवों में आपको समितियां जरूर मिलेंगी। हेल्‍थ सेक्टर की बात करें तो केरल, कर्नाटक और महाराष्‍ट्र ही सहकारी समितियों का बड़ा योगदान है। बाकी राज्यों में सहकारी समितियों ने काम बहुत किए, लेकिन स्वास्थ्‍य क्षेत्र की दिशा में नहीं या फिर बहुत कम।

उन्‍होंने आगे कहा कि यह स्‍वस्‍थ्‍य भारत बनाने में बड़ा योगदान देगी। वो ऐसे कि गांव में रह रहे लोगों को जब कोई बीमारी होती है, तो बहुत देर में पता चल पाता है। इसका मुख्‍य कारण अस्‍पताल जाने में देरी और उनके क्षेत्र में टेस्‍ट‍िंग आदि की सुविधाएं उपलब्‍ध नहीं होना है। हमें यह मानना होगा कि देश में प्राइमरी हेल्‍थ फेसिलिटी बहुत अच्‍छी नहीं है। उसे दुरुस्‍त करने के लिए सहकारिता समितियों के साथ मिलकर काम करेंगे। अगर अब तक की क्षमता की बात करें तो देश भर में इस वक्‍त 52 अस्‍पताल सहकारी समितियां चला रही हैं।

7:14 AM : NASA set to make history

7:07 AM : मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्क

20 लाख से अधिक लोगों के लिए रोजगार सृजन करेगा मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्क

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को वर्चुअल माध्यम से असम में देश के पहले परिवहन के विभिन्न साधनों वाले मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्क का शिलान्यास किया। 693.97 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस पार्क से लोगों को हवाई, सड़क, रेल और जलमार्ग से सम्पर्क की सीधी कनेक्टिविटी की सुविधा मिलेगी। इसे भारत सरकार की महत्वाकांक्षी भारत माला परियोजना के तहत विकसित किया जाएगा।

190 एकड़ में फैला होगा लॉजिस्टिक्स पार्क

भारतमाला परियोजना के अंतर्गत देश का पहला मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क असम में बन रहा है। परियोजना की कुल लागत लगभग 693.97 करोड़ रुपये होगी। जोगीघोपा शहर के नजदीक 190 एकड़ में फैला लॉजिस्टिक्स पार्क की राष्ट्रीय राजमार्ग 17 और 31, मुख्य रेल मार्ग, जलमार्ग तथा गुवाहाटी एयरपोर्ट से सीधी कनेक्टिविटी होगी।

बांग्लादेश, भूटान, नेपाल और म्यांमार के साथ बढ़ेगा व्यापार

पूर्वोत्तर के त्वरित विकास को समर्पित भारत सरकार के इस प्रोजेक्ट से अब असम में अंतरराष्ट्रीय व्यापार की राह सुगम होगी। असम पूर्वोत्तर भारत का बिजनेस हब बनेगा। बांग्लादेश, भूटान, नेपाल और म्यांमार के साथ व्यापार बढ़ेगा। 20 लाख से ज्यादा रोजगार और स्वरोजगार का सृजन होगा। इस पार्क के बनने से सामान का स्टोरेज व ढुलाई आसान होगी। साथ ही परिवहन लागत में 10 प्रतिशत से अधिक की कमी आएगी।

प्रतिवर्ष 13 मिलियन मिट्रिक टन कार्गो संचालन की क्षमता होगी

यह मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क विश्वस्तरीय सुविधाओं से सुसज्जित होगा। 13 मिलियन मिट्रिक टन तक प्रतिवर्ष कार्गो संचालन की क्षमता होगी। इंटीग्रेटेड कोल्ड चेन में अधिक मात्रा में भंडारण की सुविधा होगी। अत्याधुनिक सुरक्षा उपकरणों से लैस होगा।

स्थानीय एवं क्षेत्री स्तर पर उत्पादों की मार्किटिंग करना आसान होगा और इससे व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। कार्गो, वेयरहाउसिंग, कस्टम क्लीयरेंस, पार्किंग एवं रख-रखाव से संबंधित सेवाएं एक ही जगह पर उपलबध होंगी। सभी मौसम के अनुकूल भंडारण की सुविधा उपलब्ध होगी। कंपनियों के कंटेनर्स के लिए सुरक्षित व ज्यादा स्थान उपलब्ध होगा।

पहले चरण का काम नवंबर 2020 से

केंद्रीय मत्री गडकरी ने कहा कि मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्क के निर्माण से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 20 लाख से अधिक रोजगार और स्वरोजगार के अवसर पैदा होंगे।

उन्होंने कहा कि लॉजिस्टिक पार्क के निर्माण का काम दो चरणों में होगा। पहले चरण का काम नवंबर 2020 से शुरू हो जाएगा और 2023 में पूरा होगा। उन्होंने परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण सहित तमाम कार्यों की गति बढ़ाने के लिए राज्य सरकार से आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ब्रह्मपुत्र एक्सप्रेस हाईवे योजना पर विचार किया जा रहा है। इस योजना से गांवों को बाढ़ से बचाया जा सकता है। गडकरी ने कहा कि देश में 35 मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक पार्क बना रहे हैं।

7:00 AM : मालाबार अभ्यास

19 October 2020

1:59 PM : NCDC Ayushman Sahakar Fund

1:10 PM : COVID-19 UPDATES

1:10 PM : COVID-19 UPDATES

11:16 AM : Convocation of University of Mysore

9:31 AM : Birds Connect Our World

9:12 AM : बदली आर्थिक तस्वीर

यूपी में फार्मर फर्स्ट परियोजना से जुड़े हल्दी किसानों की बदली आर्थिक तस्वीर

कोरोना महामारी के दौरान, अधिकांश किसान कृषि उपज से अच्छा लाभ नहीं कमा सके। लेकिन, केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान से फार्मर फर्स्ट परियोजना के अन्तर्गत जुड़े हल्दी किसानों की कहानी पूरी तरह से अलग है। कोरोना के कारण, कच्ची हल्दी की मांग बढ़ रही है और इसकी कीमत 50 रुपये से 60 रुपये प्रति किलोग्राम तक बढ़ गई है, जबकि पिछले साल किसानों ने इसी हल्दी को 15-20 रुपये प्रति किलोग्राम बेचा था।

आम के बागों में हल्दी-जिमीकंद की जैविक खेती को बनाया लोकप्रिय

फार्मर फर्स्ट प्रोजेक्ट (एफएफपी) के तहत किसानों की आय को दोगुना करने के लिए आम के बागों में पेड़ों के बीच में उपलब्ध जमीन पर अशरफ अली खेती करके आय बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। एफएफपी के तहत आम के बागों में हल्दी और जिमीकंद की जैविक खेती को लोकप्रिय बनाया गया। तीन साल पहले, मलिहाबाद के मोहम्मदनगर तालुकेदार और नबीपनाह गांवों के 20 किसानों को हल्दी किस्म, नरेंद्र देव हल्दी-2 के बीज उपलब्ध कराए गए थे। किसानों ने सफलतापूर्वक प्रति एकड़ 40-45 क्विंटल हल्दी का उत्पादन किया।

जानवरों से नहीं पहुंचता नुकसान, पौष्टिक तत्वों से भरपूर है गोल्डन केसर

दिलचस्प तथ्य यह है कि इसकी पत्तियों को जानवरों द्वारा क्षति नहीं होती है, इसलिए फसल मवेशी, नीलगाय, बंदर आदि से सुरक्षित है। मुख्य अन्वेषक डॉ. मनीष मिश्रा के मुताबिक हल्दी को भारतीय गोल्डन केसर के नाम से जाना जाता है जो पौष्टिक तत्वों से भरपूर है।

एंटी ऑक्सीडेंट, एंटी बायोटिक और एंटी वायरल गुणों के कारण कोरोना काल ने कच्ची हल्दी को अधिक महत्वपूर्ण बना दिया। नरेंद्र देव हल्दी-2 में करक्यूमिन की 5 प्रतिशत मात्रा होती है, जो शरीर से फ्री रेडिकल्स को हटाकर कई बीमारियों से बचाता है। सर्दी-खांसी, श्वास-संबंधी रोग, ऊपरी श्वसन पथ के संक्रमण या संबंधित रोगों, वायरल बुखार जैसी कई समस्याओं से हल्दी के प्रयोग द्वारा बचा जा सकता है। आयुष मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी की गई सलाह में कहा गया है कि कोरोना के प्रति प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए हल्दी वाले दूध (स्वर्ण दूध) का सेवन दिन में कम से कम एक या दो बार करें।

हल्दी के उन्नत बीज विकसित कर रहे ग्रामीण

संस्थान के निदेशक डॉ. शैलेन्द्र राजन ने बताया कि बदलती परिस्थितियों में किसानों ने उन्नत किस्म के बीज गांव का विकास किया है। आज, 50 से अधिक किसानों ने आम के बागों में इस फसल को अन्तः फसल के रूप में अपनाया है और गांव को बीज गांव में बदल दिया है। हल्दी के उन्नत बीज की मांग लखनऊ और अन्य जिलों से है। मलीहाबाद के किसान अन्य किसानों को बीज बेचकर अपनी आय बढ़ा रहे हैं और साथ ही साथ अन्य किसानों की आय भी बढ़ाने में सहायता कर रहे हैं।

हल्दी प्रसंस्करण की नयी विधि का प्रशिक्षण किया हासिल

संस्थान ने पिछले वर्ष किसानों को हल्दी प्रसंस्करण की नयी विधि का प्रशिक्षण दिया जिसमें हल्दी के कंदो को बिना उबाले, चिप्स बनाकर, फिर इसे सुखाकर पीस कर उत्तम किस्म का हल्दी पाउडर बनाया गया। इस गांव के किसान राम किशोर मौर्य बताते हैं कि अब उन्होंने हल्दी चिप्स बनाने और सुखाने में महारत हासिल कर ली है और अब हल्दी पाउडर पैक कर के बेचते हैं। संस्थान ने किसानों को संगठित करके स्वयं सहायता समूह बनाकर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य कर रही है, संस्थान द्वारा प्रशिक्षित किसान हल्दी पाउडर का आकर्षक पैकिंग करके अच्छा लाभ कमाने के साथ ही साथ अन्य किसानों को समूह में जोड़कर आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने में मदद करेंगे।

कच्ची हल्दी की बढ़ रही है मांग

हममें से ज्यादातर लोग रोजाना खाना पकाने में सूखी हल्दी पाउडर का उपयोग करने के अभ्यस्त हैं। धीरे-धीरे लोग कच्ची हल्दी के लाभ को समझ गए हैं। कच्ची हल्दी की मांग बढ़ रही है क्योंकि गृहिणियां सूखे पाउडर हल्दी के स्थान पर इसे पसंद कर रही हैं। सब्जी की दुकान पर अब आप कच्ची हल्दी भी प्राप्त कर सकते हैं। यह नया चलन मूल्य श्रृंखला में एक बदलाव है जो अंततः किसान को लाभान्वित करता है क्योंकि उसे पाउडर बनाने के लिए हल्दी को संसाधित नहीं करना पड़ता। प्रसंस्करण में अतिरिक्त लागत शामिल होती है और अंतिम उत्पाद (सूखी हल्दी) भी कम मात्रा में प्राप्त होती है। इसलिए किसान अपनी कच्ची हल्दी को आकर्षक कीमत पर बेचने में अधिक प्रसन्न हैं।

(हिन्दुस्थान समाचार)

9:00 AM : 8th annual joint exercise

18 October 2020

4:32 PM : एम्स निर्माण