WhatsApp Image 2020-04-26 at 18.01.40

27 November 2020

1:44 PM: कोरोना वायरस को मात दे चुके लोग भी रहें सतर्क, जारी रखें एहतियात

कोरोना वायरस को मात दे चुके लोग भी रहें सतर्क, जारी रखें एहतियात

(616 words)

सर्दी का आगमन होते ही मौसम में भी काफी तेजी से बदलाव हो रहा है। पहले से ही संभावना जताई जा रही थी कि जैसे-जैसे ठंड बढ़ेगी कोविड के केस बढ़ सकते हैं। सर्दी का आगमन होते ही ठंड जनित बीमारी से पीड़ित भी होने लगे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य के प्रति किसी प्रकार की लापरवाही ठीक नहीं है।

बदलते मौसम और कोविड-19 के दूसरे दौर में आमलोगों के साथ-साथ कोविड-19 को मात देकर स्वस्थ हो चुके लोगों को सतर्क और सावधान रहने की जरूरत है। क्योंकि, उन्होंने बीमारी को मात दिया है ना कि कोविड-19 के दौर को। लापरवाही बरतने पर ऐसे लोग फिर संक्रमित हो सकते हैं। इसके कारण बचाव के लिए आवश्यक सतर्कता जारी रखें। बेगूसराय में संक्रमितों की संख्या में एक बार फिर से वृद्धि शुरू हो जाने के कारण गृह मंत्रालय द्वारा विशेष दिशा-निर्देश जारी किया गया है। उसका सभी लोगों को पालन करना चाहिए, ऐसा नहीं होने पर एक बार फिर लॉकडाउन की स्थिति बन सकती है।

दोबारा संक्रमित होने पर बढ़ेगी परेशानी

बेगूसराय के अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. विरेश्वर प्रसाद ने बताया कि लगातार बदल रहे मौसम में जहां सर्दी-खांसी, जुकाम समेत अन्य ठंडजनित बीमारी आम हो गई है। वहीं, कोविड-19 का दूसरा दौर भी शुरू हो चुका है। ऐसे जो लोग पूर्व में भी कोविड-19 को मात देने में सफल हो चुके हैं उन्हें भी विशेष सतर्क और सावधान रहने की जरूरत है। क्योंकि, थोड़ी सी लापरवाही से वे फिर संक्रमित हो सकते हैं और दोबारा संक्रमित होने पर पूर्व के सापेक्ष ज्यादा परेशानी होगी।

ठीक हो चुके मरीज कराएं एंटीबॉडी टेस्ट

अगर आप नियमित तौर पर रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने पर ध्यान दे रहे हैं तो ठीक है, नहीं तो आपको नियमित अंतराल पर अपनी एंटीबॉडी टेस्ट करा लेनी चाहिए। इससे आपको पता चल जाएगा कि आपका शरीर कोविड-19 से लड़ने में कितना सक्षम है। जिस तरह की रिपोर्ट आती है उसके हिसाब से आप सावधानी बरतना शुरू कर दें। कोविड-19 से ठीक होने के बाद कुछ दिनों तक एंटीबॉडी रहती है। इसके बाद कमजोर पड़ने लगती है। इसलिए, नियमित तौर पर एंटीबॉडी टेस्ट करा लें, जबतक वैक्सीन नहीं आ जाती है।

खान-पान के साथ व्यायाम भी है जरूरी

कोविड-19 से बचाव के लिए रोग-प्रतिरोध क्षमता मजबूत बनाने की जरूरत है। इसके लिए आप पर्याप्त समय सोएं, शरीर को आराम दें और खाने-पीने के प्रति सतर्क रहें। मौसमी फल, दूध और हरी सब्जी का सेवन करें। साथ ही पानी को उबालकर और गुनगुना पानी पीने की कोशिश करें। रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनाने के लिए व्यायाम भी काफी कारगर साबित होता है। इसलिए, नियमित रूप से व्यायाम करें। सुबह में खुली हवा के साथ टहलें, इससे रोग-प्रतिरोधक क्षमता काफी मजबूत होगा।

साफ-सफाई का रखें विशेष ख्याल

कोविड-19 से बचाव के लिए साफ-सफाई भी बेहद जरूरी है। क्योंकि, साफ-सफाई हमें ना सिर्फ कोविड-19 से बचाव के लिए जरूरी है। बल्कि, इससे कई तरह के संक्रमित बीमारियों से दूर रहा जा सकता है। साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें, शारीरिक स्वच्छता के साथ-साथ शौचालय समेत घर के अन्य परिसर की नियमित रूप सफाई करें। इतना ही नहीं आसपास की स्वच्छता भी सबके लिए जरूरी है।

इन बातों का रखें ध्यान और रहें सुरक्षित

– विवाह समारोह में एक सौ से अधिक लोग नहीं जुटें

– परिसर का सैनिटाइजेशन करें

– श्राद्ध कर्म में 25 से अधिक लोग जमा नहीं हों

– कार्तिक पूर्णिमा या किसी मांगलिक अवसर पर गंगा स्नान करने से परहेज करें

– नियमित रूप से मास्क और सैनिटाइजर का उपयोग करें

– भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें

– शारीरिक दूरी के पालन का ख्याल रखें

– बार-बार साबुन या अन्य अल्कोहल युक्त पदार्थों से हाथ धोने की आदत डालें

(हिन्दुस्थान समाचार)

1:30 PM: India’s Ambassador-designate to Portugal meets VP

1:22 PM: COVID-19 recovery rate

1:03 PM: Bilateral meeting

12:36 PM: Mann Ki Baat

12:36 PM: Mann Ki Baat

12:13 PM: कोवैक्सिन के तीसरे फेज का ट्रायल शुरू

कोवैक्सिन के तीसरे फेज का ट्रायल शुरू

कोरोना की स्वदेशी विकसित वैक्सीन के तीसरे चरण का ट्रायल गुरुवार से दिल्ली के एम्स में शुरू हो गया है। कोवैक्सिन की पहली खुराक एम्स की न्यूरोसाइंस सेंटर की चीफ डॉ. एमवी पद्म श्रीवास्तव और तीन अन्य लोगों को दी गई। इस वैक्सीन को भारत बायोटेक ने आईसीएमआर के सहयोग से बनाया है।

28 हजार 500 लोगों को दी जाएगी खुराक

वहीं अगले कुछ दिनों में वैक्सीन के तीसरे चरण के ट्रायल के दौरान ही एम्स में करीब 15 हजार लोगों को इस वैक्सीन की खुराक दी जाएगी। वैक्सीन की ये खुराक 18 साल या इससे ऊपर वाले लोगों को करीब 28 हजार 500 लोगों को दी जाएगी। इसका ट्रायल देश के 10 राज्यों में 25 स्थानों पर चलेगा। ट्रायल पहले ही कुछ जगहों पर शुरू हो चुका है। कोवैक्सिन के पहले और दूसरे चरण का ट्रायल का डेटा ड्रग कंट्रोलर को पहले ही सौंपा जा चुका है और इसमें फिलहाल अभी तक किसी भी तरह के साइड इफेक्ट नहीं पाए गए हैं।

वैक्सीन की कीमत तय नहीं

इस वैक्सीन के प्राइस यानी कीमत को लेकर तरह-तरह की खबरें चल रही हैं। इस बारे में जी बी पंत हॉस्पिटल, नई दिल्ली के डॉ. संजय पांडेय का कहना है कि वैक्सीन देना सरकार की एक पॉलिसी का हिस्सा है। कब, किसे, कैसे देना है, इन सब के लिए एक योजना बनाई जाएगी। वैक्सीन की कीमतों को लेकर जो भी खबरें आ रही हैं, अभी उनमें से किसी पर भी भारत सरकार ने मुहर नहीं लगाई है। इसलिए अभी यह सब मत सोचें कि वैक्सीन बहुत महंगी आयेगी, हम तो नहीं ले पाएंगे…। वैक्सीन जब आएगी तब हर एक व्यक्ति को मिलेगी। भ्रामक खबरों में न फंसें, सरकार की नीतियों का इंतजार करें।

11:54 AM: Passing Out Parade

11:41 AM: COVID-19 UPDATES:

11:32 AM: Covaxin के तीसरे चरण का ट्रायल

10:36 AM: COVID-19

10:11 AM: COVID-19

26 November 2020

5:30 PM: वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा निवेशक बैठक (रीइन्वेस्ट 2020) एवं प्रदर्शनी का उद्धाटन

4:15 PM: Constitution Day

4:06 PM: Constitution Day

3:39 PM: Constitution Day

3:01 PM: Emergency Credit Liquidity Guarantee scheme

2:48 PM: लॉकडाउन नहीं, नाइट कर्फ्यू

सरकार के दिशा निर्देश में लॉकडाउन नहीं, नाइट कर्फ्यू की बात, 24 घंटों में 44 हजार नए मामले

(318 words)

देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 44 हजार 489 नए मामले सामने आए हैं। इसके साथ ही कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़कर 92,66,706 पर पहुंच गई है। पिछले 24 घंटों में 524 लोगों की मौत हो गई। इसके साथ ही इस बीमारी से मरने वालों की संख्या 1,35,223 तक पहुंच गई है।

गुरुवार की सुबह केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों मुताबिक देश में 4,52,344 एक्टिव मरीज हैं। वहीं, राहत भरी खबर है कि कोरोना से अब तक 86,79,138 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। जबकि देश का रिकवरी रेट घटकर 93.65 प्रतिशत हो गया है। इससे पहले रिकवरी रेट 93.71 था।

दिशा-निर्देश में लॉकडाउन का जिक्र नहीं

बढ़ते केस और रिकवरी रेट घटने से स्थिति चिंताजनक हो सकती है ऐसे में गृह मंत्रालय ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं जो कि एक दिसंबर से प्रभावी हो जाएगी। इस बारे में जी बी पंत हॉस्पिटल, नई दिल्ली के डॉ. संजय पांडेय ने बताया कि सरकार ने जो भी नए दिशा-निर्देश जारी किये हैं, उनमें सबसे अहम बात यह है कि इसमें लॉकडाउन का जिक्र नहीं है, सिर्फ नाइट कर्फ्यू का जिक्र है। उस पर भी राज्य सरकारें फैसला लेंगी। वहीं शादी जैसे बड़े आयोजनों में 200 लोगों को उपस्थिति निश्चित की गई है। इस संख्‍या को बढ़ाने की अनुमति नहीं है। हां, राज्य सरकारें चाहें तो इस संख्‍या को कम कर सकती हैं, जैसे 100 या 50 तक सीमित कर सकती हैं। जैसा की हम जानते हैं कि अर्थव्यवस्था के लिए लॉकडाउन नहीं लगा सकते हैं, इसलिए लोगों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है।

पिछले 24 घंटे में 10 लाख से अधिक किए गए टेस्ट

देश में पिछले 24 घंटे में 10 लाख से अधिक टेस्ट किए गए। आईसीएमआर के मुताबिक 25 नवम्बर को 10,90,238 टेस्ट किए गए। देश में अबतक कुल 13,59,31,545 टेस्ट किए जा चुके हैं।

2:37 PM: India’s present active case

2:13 PM: Comparison of Cases

2:02 PM: Recovery Rate

1:57 PM: New confirmed COVID cases

11:49 AM: बंगाल की खाड़ी में बन रहा है एक और कम दबाव का क्षेत्र

बंगाल की खाड़ी में बन रहा है एक और कम दबाव का क्षेत्र

चक्रवाती तूफान ‘निवार’ गुरुवार तड़के पुडुचेरी के पास तट से टकराने के पश्चात कमजोर पड़ गया। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार आज रात करीब 2.30 बजे तट से टकराने के साथ इसकी रफ्तार घटकर 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे हो गई है, जबकि पहले इसकी गति 120 किलोमीटर प्रति घंटे की थी।

इस बीच भारतीय मौसम विभाग में वरिष्ठ वैज्ञानिक आर के जेनमाणी ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में एक और कम दबाव का क्षेत्र बन रहा है जिसके जल्द ही चक्रवात में बदलने की संभावना है। इस चक्रवात को मालदीव ने बुरेवी नाम दिया है। हालांकि इस चक्रवात पर मॉनिटरिंग जारी है और दिसंबर की शुरूआत में प्रभावी हो सकता है।

जानमाल के नुकसान की खबर नहीं

वहीं निवार चक्रवात के कारण अभी तक जानमाल के नुकसान की कोई खबर नहीं है। अलबत्ता कई स्थानों पर पेड़ उखड़ गए। तमिलनाडु के राजस्व मंत्री आर.बी. उदयकुमार ने कहा कि तमिलनाडु के कुछ हिस्सों से दीवार गिरने की घटनाएं हुई हैं। एहतियात के तौर पर राज्य भर में 1.45 लाख लोगों को 1,516 राहत शिविरों में स्थानांतरित किया गया है। आईएमडी के अनुसार यह उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ना जारी रखेगा और अगले छह घंटों में चक्रवाती तूफान और कमजोर होगा।

विल्लुपुरम के सांसद डी. रविकुमार ने अपने ट्विटर पेज पर लिखा कि चक्रवात के कारण मरक्काणम में एक महिला की मौत हो गई है। चक्रवात से हुए नुकसान के बारे में अभी तक पता नहीं चल पाया है। तमिलनाडु सरकार ने गुरुवार को सार्वजनिक अवकाश 16 जिलों में बढ़ा दिया है। तमिलनाडु और पुडुचेरी के कई क्षेत्रों में भारी बारिश हो रही है। इस वजह से बस सेवा बंद कर दी गई है। इसके अलावा चेन्नई में भी में मेट्रो सेवा अगले आदेश तक बंद कर दिया गया है।

8:28 AM: संविधान दिवस

राष्ट्र जीवन की गति का मुख्य दिक्सूचक है संविधान

(1295 words)

भारत ने 26 जनवरी 1950 को पहला गणतंत्र दिवस मनाया। भारतीय संविधान सभा की आखिरी बैठक (26 नवम्बर 1949) में डॉ0 अम्बेडकर के प्रस्ताव पर मतदान हुआ और संविधान पारित हो गया। संविधान ही राष्ट्र का धारक और राष्ट्र राज्य व्यवस्था का धर्म बना। भारत ने संविधान को ही सर्वोत्तम सत्ता माना। भारत के प्रत्येक जन को वाक्स्वातंत्र्य और विधि के समक्ष समता सहित सभी मौलिक अधिकार मिले।

इसके पहले 1947 तक भारत में ब्रिटिश सत्ता थी। भारत परतंत्र था। 26 नवम्बर के दिन से अपना संविधान प्रवर्तन हुआ था। सो जनगणमन ने समता, समरसता और सम्पन्नता के सपने देखे। अब न कोई राजा था, न कोई शासक। जनगणमन का भाग्य विधाता अब संविधान था। नागरिक संविधान के प्रति श्रद्धालु रहा है। संविधान के कार्यकरण पर चर्चा का अवसर है। 26 नवम्बर का दिन सभी संवैधानिक संस्थाओं, राजनैतिक दलों और देशभक्तों के लिए गहन आत्म विश्लेषण का उत्सव है।

संविधान की हस्तलिखित प्रति में सांस्कृतिक राष्ट्रभाव वाले 23 चित्र

उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष हृदयनारायण दीक्षित ने अपने एक लेख में लिखा है कि संविधान राष्ट्रजीवन की गति का मुख्य दिक्सूचक है। भूमि, जन और शासन से ही राष्ट्र नहीं बनते। जाति, मजहब, राजनीति और क्षेत्रीय आग्रह समाज तोड़ते हैं, संस्कृति ही इन्हें जोड़ती है। भारतीय संविधान निर्माता सनातन सांस्कृतिक क्षमता से परिचित थे। उन्होंने संविधान की हस्तलिखित प्रति में सांस्कृतिक राष्ट्रभाव वाले 23 चित्र सम्मिलित किए। मुखपृष्ठ पर राम और कृष्ण तथा भाग 1 में सिन्धु सभ्यता की स्मृति वाले मोहनजोदड़ो काल की मोहरों के चित्र हैं। भाग 2 नागरिकता वाले अंश में वैदिक काल के गुरुकुल आश्रम का दिव्य चित्र है। भाग 3 – मौलिक अधिकार वाले पृष्ठ पर श्रीराम की लंका विजय व भाग 4 – राज्य के नीति निर्देशक तत्वों वाले पन्ने पर कृष्ण अर्जुन उपदेश वाले चित्र हैं। भाग 5 में महात्मा बुद्ध, भाग 6 में स्वामी महाबीर और भाग 7 में सम्राट अशोक के चित्र हैं। भाग 8 में गुप्तकाल, भाग 9 में विक्रमादित्य, भाग 10 में नालंदा विश्वविद्यालय, भाग 11 में उड़ीसा का स्थापत्य, भाग 12 में नटराज, भाग 13 में भगीरथ द्वारा गंगावतरण, भाग 14 में मुगलकालीन स्थापत्य, भाग 15 में शिवाजी और गुरु गोविन्द सिंह, भाग 16 में महारानी लक्ष्मीबाई, भाग 17 व 18 में क्रमशः गांधीजी की दाण्डी यात्रा व नोआखाली दंगों में शान्ति मार्च, भाग 19 में नेताजी सुभाष, भाग 20 में हिमालय, भाग 21 में रेगिस्तानी क्षेत्र व भाग 23 में लहराते हिन्दु महासागर की चित्रावलि है।

डॉ. राजेंद्र प्रसाद के भाषण के अंश

हृदयनारायण दीक्षित के अनुसार संविधान पारण के बाद अध्यक्ष राजेन्द्र प्रसाद ने कहा “अब सदस्यों को संविधान की प्रतियों पर हस्ताक्षर करने हैं एक हस्तलिखित अंग्रेजी की प्रति है, इसपर कलाकारों ने चित्र अंकित किये हैं, दूसरी छपी हुई अंग्रेजी व तीसरी हस्तलिखित हिन्दी की।” (संविधान सभा कार्यवाही खण्ड 12 पृष्ठ 4261) भारतीय सभ्यता, संस्कृति और इतिहास के छात्रों के लिए संविधान की चित्रमय प्रति प्रेरक हैं। संविधान मार्गदर्शी है लेकिन राष्ट्र की समृद्धि संवैधानिक संस्थाओं पर आसीन महानुभावों पर निर्भर है। डॉ0 राजेन्द्र प्रसाद ने संविधान सभा के आखिरी भाषण (26.11.1949) में कहा, “संविधान किसी बात के लिए उपबंध करे या न करे, देश का कल्याण उन व्यक्तियों पर निर्भर करेगा, जो देश पर शासन करेंगे।”

डा. अम्बेडकर का अंतिम भाषण

अपने आखिरी भाषण में डॉ. अम्बेडकर ने भी प्राचीन भारतीय परम्परा की याद दिलाते हुए कहा था “एक समय था जब भारत गण राज्यों से सुसज्जित था। यह बात नहीं है कि भारत पहले संसदीय प्रक्रिया से अपरिचित था।” भारत संसदीय प्रक्रिया से पहले भी सुपरिचित था। यहां वैदिक काल से ही एक परिपूर्ण गणव्यवस्था थी। गणेश गणपति थे। प्राचीनतम ज्ञान अभिलेख ऋग्वेद में “गणांना त्वां गणपतिं” आया है। मार्क्सवादी चिंतक डॉ0 रामविलास शर्मा ने लिखा है “गण पुराना शब्द है, यह पुरानी समाज व्यवस्था का द्योतक है। गण और जन ऋग्वेद में पारिभाषिक हो गये हैं।” महाभारत युद्ध के बाद युधिष्ठिर ने भीष्म से आदर्श गणतंत्र के सूत्र पूछा। भीष्म ने (शांतिपर्वः 107.14) बताया कि भेदभाव से ही गण नष्ट होते हैं। उन्हें संघबद्ध रहना चाहिए। गणतंत्र के लिए बाहरी की तुलना में आंतरिक संकट बड़ा होता है – ‘आभ्यन्तरं रक्ष्यमसा बाह्यतो भयम्’ बाह्य उतना बड़ा नहीं।

हृदयनारायण दीक्षित का मानना है कि संविधान राष्ट्र का कारक है। संविधान निर्माताओं ने संसदीय जनतंत्र अपनाया है। उन्होंने अनेक संवैधानिक संस्थाओं का प्राविधान किया है। विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के मध्य शक्ति के पृथक्करण का सिद्धांत लागू है। निर्वाचन आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाएँ सारी दुनिया में प्रतिष्ठित हैं। संसद विधायी और संविधायी अधिकारों से लैस है। संवैधानिक संस्थाएँ आदरणीय है।

जब पीएम मोदी ने संसद भवन की सीढ़ियों पर साष्टांग प्रणाम किया

उनका कहना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने लोकसभा प्रवेश के पहले दिन संसद भवन की सीढ़ियों पर साष्टांग प्रणाम किया था। यह प्रेरक और ऐतिहासिक है। वे सभी संवैधानिक संस्थाओं का आदर करते हैं। संविधान निर्माताओं ने संसद को सविधान संशोधन का भी अधिकार दिया है। श्री मोदी की सरकार ने संविधान के अनुच्छेद-370 को हटाने की कार्यवाही पूरी कर ली है। इसे हटाना संविधान निर्माताओं का ही स्वप्न था। उन्होंने इसके शीर्षक में ‘अस्थायी उपबंध’ शब्द छोड़े थे। जम्मू-कश्मीर की आम जनता इससे प्रसन्न है, लेकिन अलगाववादी शक्तियाँ अभी भी सक्रिय हैं। यही स्थिति सी0ए0ए0 (नागरिकता संशोधन कानून) की है। कुछ ताकतें खुल्लमखुल्ला इसका विरोध कर रही हैं। इसी तरह संसद द्वारा किसानों के हित के लिए पारित कानूनों को लेकर भी कुछ सरकारें संसद द्वारा पारित कानून को भी चुनौती दे रही हैं। कुछ अलगाववादी और देश तोड़ ताकतें बार-बार सिर उठाती है। ऐसी ताकतें संविधान की सर्वोपरिता का सिद्धांत नहीं मानती हैं।

संविधान की जिम्मेदार संरक्षक है न्यायपालिका

हृदयनारायण दीक्षित ने अपने लेख में लिखा कि भारतीय गणतंत्र लगातार विकसित हो रहा है। न्यायपालिका संविधान की जिम्मेदार संरक्षक है। हिन्दुत्व की व्याख्या व नवीं अनुसूची के दुरुपयोग को रोकने सहित अनेक मसलों पर न्यायपीठ ने प्रशंसनीय फैसले किये हैं। मौलिक अधिकार सुरक्षित है। कृषि, विकास, गोवंश संवर्द्धन राज्य के नीति निर्देशक संवैधानिक तत्व हैं। महाभारतकार ने गणतंत्र की सभा समिति (संसदीय व्यवस्था) के सदस्य की अनिवार्य योग्यता बतायी थी “न नः स समितिं गच्छेत यश्च नो निर्वपेत्कृषिम”- “जो खेती नहीं करता वह सभा में प्रवेश न करे।” ऋग्वैदिक काल में ऋषि भी कृषि करते थे। कामन सिविल कोड नीति निर्देशक तत्व है। हिदुत्व इस देश का प्राण तत्व है, लेकिन साम्प्रदायिक कहा जाता है। अलगाववाद देशतोड़क है तो भी सेकुलर है। अल्पसंख्यकवाद की आंधी है, लेकिन संविधान और कानून में ‘अल्पसंख्यक’ शब्द की परिभाषा नहीं है। गहन आत्मचिन्तन ही एकमेव विकल्प है।

संविधान में मूल कर्तव्यों की सूची भी

संविधान में देश के प्रत्येक नागरिक को मौलिक अधिकारों की प्रतिभूित है। लेकिन इसी के साथ संविधान के अनुच्छेद-51क में मूल कर्तव्यों की भी सूची है। इस सूची में कहा गया है कि ”प्रत्येक नागरिक का मूल कर्तव्य है कि वह संविधान के पालन के साथ उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्रध्वज व राष्ट्रगान का आदर करें। स्वाधीनता के राष्ट्रीय आन्दोलन के आदर्शों को हृदय में संजोये और उनका पालन करें। राष्ट्र की सम्प्रभुता, एकता और अखण्डता की रक्षा करे। किसी भी तरह के भेदभाव से परे भारत के सभी लोगों में समरसता और भाईचारा की भावना का विकास करे। पर्यावरण की रक्षा करे, सार्वजनिक सम्पत्ति की रक्षा करे। हिंसा से दूर रहें।” मूल कर्तव्यों की यह सूची भारत के लोक जीवन को आनन्दित करने का दस्तावेज है। संविधान दिवस के अवसर पर इसका पाठ और पुनर्पाठ बहुत जरूरी है।

संविधान की उद्देशिका स्मणीय है। उद्देशिका में ‘हम भारत के लोग’ शब्द का प्रयोग ध्यान देने योग्य है। भारत की जनता के लिए किसी जाति सम्प्रदाय या वर्ग शब्द का प्रयोग नहीं है। हम सबकी पहचान भारत है। ‘हम सब भारत के लोग’ हैं। उद्देशिका में सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक न्याय प्राप्त कराने के लिए संकल्प है। इनमें प्रतिष्ठा और अवसर की समता है। उद्देशिका एक तरह से हमारी राजव्यवस्था का स्वप्न है। यह बारम्बार विचारणीय और माननीय है। संविधान भारत का राजधर्म है।

(ह‍िन्दुस्थान समाचार)

25 November 2020

5:50 PM: Cabinet approves the MoU

4:41 PM: पीलीभीत टाइगर रिजर्व

यूपी: पीलीभीत टाइगर रिजर्व का पहला अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार

उत्तर प्रदेश के पीलीभीती के टाइगर रिजर्व को पहली बार अंतरराष्ट्रीय अवार्ड मिला है। दरअसल बाघ संरक्षण की दिशा में पीलीभीत टाइगर रिजर्व और उत्तर प्रदेश वन विभाग ने 10 साल के लक्ष्य को चार साल में पूरा कर लिया और बाघों की संख्या दोगुनी से ज्यादा करने की उपलब्धि पर ग्लोबल टाइगर फोरम की ओर से 13 देशों में से उत्कृष्ट मानते हुए अंतरराष्ट्रीय TX2 पुरस्कार का खिताब दिया गया है।

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री, प्रकाश जावड़ेकर ने टाइगर रिजर्व को दिए गए पुरस्कार की सराहना की। अपने ट्वीट में केंद्रीय मंत्री ने लिखा, टीम पीलीभीत टाइगर रिजर्व को उसके सतत संरक्षण और सुरक्षा के प्रयासों से बाघों की आबादी को दोगुना की गई जो 2014 में 25 से 2018 में 65 हो गई।

बाघ परियोजना के अपर महानिदेशक एसपी यादव ने कहा कि पीलीभीती टाइगर रिजर्व विश्व का पहला ऐसा साइट बना है जहां टाइगर की संख्या कम समय में दोगुना कर लिया गया है। यह एक बड़ी उपलब्धि है। सिर्फ पीलीभीती ही नहीं भारत के लिए गौरव की बात है। वहीं असम राज्य के मानस टाइगर रिजर्व को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत किया गया है। यह पुरस्कार एक बार फिर से जानवर के संरक्षण और सुरक्षा के प्रयासों में भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

बता दें कि बाघों के संरक्षण और सुरक्षा के लिये 4 जून 2014 को टाइगर रिजर्व घोषित किया गया। उस दौरान पूरी जंगल में बाघों की संख्या 25 थी, लेकिन टाइगर रिजर्व बनने के बाद जंगल में बाघों के संरक्षण के लिये राष्ट्रीय बाघ संरक्षण की गाइडलाइन पर काम किया गया। जिसके परिणामस्वरूप वर्ष 2018 में प्राधिकरण ने जब यहां बाघों की गणना कराई तो चार साल में ही ये संख्या बढ़ कर 65 हो गई।

बाघों-गहन सुरक्षा और पारिस्थितिक स्थिति (एम-स्ट्रिप) के लिए निगरानी प्रणाली के निरंतर उपयोग के साथ मजबूत गश्त करने की सफलता, वन्यजीव अपराधियों और शिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और जंगल के वन और चरागाह प्रबंधन प्रयासों को प्राप्त करने में मुख्य अंतर साबित हुआ है।

4:32 PM: Air Quality Index

4:29 PM: Cyclone Nivar

4:03 PM: Severe Cyclonic Storm “NIVAR”

2:14 PM: All India Presiding Officers’ Conference

मावलंकर जी का मानना था कि संसद और राज्‍यों के विधानमंडल, जन-हित की सिद्धि के सर्वोच्‍च मंच हैं और सभी सदस्यों को, अपने राजनीतिक मतभेद भुलाते हुए, Consensus से यानि आम सहमति से, जन-हित का उद्देश्‍य प्राप्त करना चाहिए

भारत में आज से लगभग ढाई हजार वर्ष पहले से, ‘गण’ तथा ‘संघ’ जैसे स्वतंत्र शब्द प्रयोग में रहे। हमारे प्राचीन ग्रंथों में ‘गणतंत्र’ का उल्लेख, ‘जनतंत्र’ तथा ‘गणराज्य’ के आधुनिक संदर्भों में किया गया है। हमारे यहां वैशाली, कपिलवस्तु, मिथिला जैसे गणतंत्र अस्तित्व में थे

9:11 AM: अनोखी पहल

कोरोना काल में गरीब बच्चों का सहारा बना ये चलता-फिरता स्कूल

भारत के करोड़ों युवाओं के लिए शिक्षा एक सशक्त माध्यम है। शिक्षा अज्ञानता और गरीबी के चक्र को तोड़ने और रोजगार एवं समृद्धि के लिए एक सशक्त मार्ग है। कोरोना वायरस महामारी ने दुनियाभर के स्कूलों को ऑनलाइन पढ़ाई कराने के लिए प्रेरित किया है लेकिन जहां शिक्षा और इंटरनेट की पहुंच पहले से ही काफी कम है गरीब परिवार इस पाठ्यक्रम में बने रहने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सबसे ज्यादा गरीब और हाशिये पर रहने वाले बच्चों की कक्षा में वापस न आने का सबसे ज्यादा खतरा है। इन सभी बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले में एक जिला परिषद स्कूल ने शिक्षा रथ के रूप में एक अनोखी मुहिम की शुरुआत की।

शिक्षा रथ को चलता फिरता स्कूल कहा जाता है

कोरोना वायरस ने दुनियाभर की स्कूली शिक्षा को काफी प्रभावित किया और अब ऑनलाइन का दौर है। भारत के जिन इलाकों में इंटरनेट की पहुंच कम है गरीब परिवार इस पाठ्यक्रम में बने रहने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सबसे गरीब और सबसे ज्यादा हाशिये पर रहने वाले बच्चों की कक्षा में वापस न आने का खतरा सबसे ज्यादा है। इन सभी बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले में एक जिला परिषद स्कूल ने शिक्षा रथ के रूप में एक अनोखी पहल की शुरुआत की है।

एक बार फिर ऐसे आवश्यकता बनी आविष्कार की जननी

जब कोविड 19 के प्रकोप के कारण देश सभी स्कूल बंद थे महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले में जिला परिषद कन्या स्कूल के शिक्षक रविंद्र पाटिल, प्रिंसिपल और प्रियंका पाटिल ने एक अनूठी अवधारणा की शुरुआत की। यह अनूठी अवधारणा है शिक्षा रथ। यह शिक्षा रथ छात्रों के लिए एक चलती फिरती कक्षा है जिसे आप स्कूल ऑन व्हील्स भी कह सकते हैं। यहां घर बैठे वे लोग डिजिटल शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं जो इसका खर्च उठाने में सक्षम नहीं हैं। जिला परिषद गर्ल्स स्कूल नंदुरबार की शिक्षक प्रियंका पाटिल बताती हैं कि हमारे स्कूल में से बहुत कम छात्राएं ऐसी हैं जिनके घर में टीवी या मोबाइल की सुविधा उपलब्ध है। ऑनलाइन लर्निंग के जरिए पढ़ाई के लिए हम सभी बच्चों के पास पहुंच नहीं पा रहे थे। हमारा प्रकाशा गांव बहुत बड़ा होने के कारण सभी बच्चों के घर-घर जाकर पढ़ाई कराने में बहुत मुश्किलें आ रही थी। इसलिए हमने शिक्षा रथ नामक चलते-फिरते स्कूल का निर्माण किया।

एंड्रॉइड टीवी, इनवर्टर और माइक स्पीकर से लैस है शिक्षा रथ

इस जिला परिषद स्कूल के शिक्षकों ने अपनी कार को शिक्षा रथ में बदल दिया है। इस डिजिटल स्कूल में एक एलईडी एंड्रॉइड टीवी, इनवर्टर और माइक स्पीकर भी है। शिक्षा रथ गांव की हर गली में जाता है और छात्रों को एलईडी की मदद से डिजिटल माध्यम से ऑनलाइन पढ़ाने के साथ-साथ ऑफलाइन भी शिक्षित करता है।

ऑनलाइन शिक्षा के साथ छात्रों को व्यायाम और योगासन के गुर भी सिखाता है शिक्षा रथ

लॉकडाउन के दौरान भी शिक्षकों ने सामाजिक दूरी और मास्क का पालन करते हुए एक से चार कक्षाओं तक छात्रों को पढ़ाने का काम जारी रखा। वे शेड्यूल के अनुसार सुबह 10 बजे से दोपहर के 1 बजे तक खुली जगहों पर पढ़ाते हैं।  इसके अलावा ये शिक्षक अपनी लागत पर सभी छात्रों को व्यायाम और योगासन के गुर भी सिखाते हैं और इस बारे में पुस्तकें भी वितरित करते हैं। साथ ही साथ कोविड 19 के बारे में जागरूकता भी पैदा करते हैं जैसे कि मास्क का उपयोग कैसे करें और हाथों को बार-बार कैसे धोएं।

शिक्षकों द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा से वंचित बच्चों को डिजिटल रूप से गुणवत्ता परक शिक्षा प्रदान करने के लिए किए गए ये प्रयास वास्तव में प्रशंनीय और सहायक हैं। यदि भारत के ग्रामीण भाग के प्रत्येक स्कूल ऐसी पहल करते हैं तो निश्चित रूप से देश के विकास में यह मील का पत्थर साबित होगी।

8:56 AM: Chennai/Meenambakkam received 120 mm rainfall

8:55 AM: 24 States/UTs have better tests per million than national average

8:43 AM: New Zealand’s Greg Barclay

8:32 AM: वोकल फॉर लोकल

3G तकनीक से नींबू की पैदावार, विदेश में छाने को है तैयार

3G तकनीक से तैयार नींबू अब विदेशों में छाने को तैयार है। ग्रेन, गोबर और गोमूत्र की पारंपरिक पद्धत्ति से तैयार रसीले नींबू की मांग तेजी से बढ़ रही है। यानी कि ये नींबू जी हां वोकल फॉर लोकल की मुहिम का ह‍िस्सा बनने जा रहे हैं। इस 3G तकनीक को अपना रहे किसान और यूपी सरकार के एक्सपोर्ट कमेटी के सदस्य आनंद मिश्रा कहते हैं पारंपरिक गोबर, ग्रेन और गोमूत्र से जहां जमीन की उर्वरता बढ़ती है वहीं नई प्रजाति थाई सीडलेस से नींबू ज़्यादा रसीले होते हैं जिसकी मांग बहुत है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी इसकी मांग बढ़ रही है।

2021 में विदेशों में इसका निर्यात हो जाएगा शुरू

उन्होंने बताया कि 2021 में विदेशों में इसका निर्यात शुरू हो जाएगा। जिसका फ़ायदा आम किसानों को होगा। लेमन मैन के नाम से मशहूर किसान आनंद मिश्रा कहते हैं कि नींबू की देशी प्रजाति कागज़ी से थाई सीडलेस बहुत बेहतरीन है। इसका उत्पादन कर किसान मार्केट में इसे बेच सकते हैं और इसे आसानी से प्रॉसेस कर पिकल्स, जूस और स्कवैश बना सकते हैं।

3G तकनीक में ऐसे होती है बाग़वानी

उन्होंने बताया कि 3G तकनीक में बाग़वानी 10 फीट पर हाई डेंसिटी पर होती है जिससे पत्तियां गिरकर खेत में ही रिसाइकिल होकर कार्बनिक पदार्थ पौधों के लिए तैयार करती हैं। इसे हाइड्रेडिस्ट तकनीक कहते हैं जो कि नींबू की 3G तकनीक का मुख्य आधार है। आनंद का कहना है कि इस तकनीक से तैयार नींबू के लिए बाजार सीधे खुले हैं, विदेशों से जहां मांग बढ़ रही है वहीं किसान इसका प्रससंकरण कर ज्यादा मुनाफ़ा कमा सकते हैं। इससे रोज़गार के भी अवसर पैदा होंगे।

मल्टीनेशनल कंपनी की नौकरी छोड़कर बन गए ‘लेमन मैन’

रायबरेली शहर से 20 किमी दूर कचनावां के रहने वाले आनंद मिश्रा अब लेमन मैन के नाम से मशहूर हैं हालांकि 2016 से पहले तक वह एक मल्टीनेशनल कंपनी में अच्छी नौकरी कर रहे थे। मिश्रा बताते हैं कि 13 साल की नौकरी के बाद जब उन्होंने इस क्षेत्र में हाथ आज़माया तो शुरुआत में उन्हें निराशा मिली, लेकिन आधुनिक तकनीक और रिसर्च के सहारे अब वह इस क्षेत्र में अच्छा लाभ कमा रहे हैं। मिश्रा करीब 2 एकड़ से ज़्यादा की खेती कर छह लाख तक सालाना कमा रहे हैं। इसमें शुरुआती लागत के बाद केवल नाममात्र का ख़र्चा करना पड़ता है।

आनंद का कहना है कि एक एकड़ में करीब 40 हजार की शुरू में लागत आती है जो कि दूसरे वर्ष नगण्य हो जाती है और प्रति एकड़ करीब 80 से 100 कुंतल तक कि पैदावार होती है जो कि आगे बढ़ती जाती है। लेमन मैन का कहना है कि यह ऐसी फसल है जिसमें पैदावार तो बढ़ता है लेकिन लागत लगातार कम होती रहती है। किसानों को अब आसपास ही इस उत्पाद का बाजार प्रमुखता से मिल रहा है जिससे किसान की कमाई में इज़ाफ़ा होता रहता है। एक मल्टीनेशनल कंपनी के कर्मचारी से लेमन मैन बने आनंद की कहानी लोगों को अब भा रही हैं और अब लोग उनसे इस फसल की बारीकियां सीखने दूर-दूर से आते हैं। आनंद का यह प्रयास किसानों के लिए एक प्रेरणा बन रहा है।

(हिन्दुस्थान समाचार)

24 November 2020

5:31 PM: President Kovind offered prayers

4:54 PM: Finance Minister interacts with officials

4:44 PM: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना मामले

2:56 PM: ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल

ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के लैंड अटैक वर्जन का सफल परीक्षण

पाकिस्तान और चीन से तनाव के बीच भारत ने मंगलवार को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह क्षेत्र से दुनिया की सबसे तेज ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के भूमि हमले संस्करण का भारतीय सेना ने परीक्षण किया। भारत इस सप्ताह सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस के कई लाइव परीक्षण करेगा. जिसकी शुरुआत आज से की गई है। भारत ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के पास ब्रह्मोस मिसाइल के भूमि-हमले संस्करण का पहला परीक्षण किया। इसके लिए एक अन्य द्वीप पर लक्ष्य रखा गया था जिसका मिसाइल ने सफलतापूर्वक निशाना बनाया। 800 किमी रेंज ब्रह्मोस का परीक्षण 2021 के मध्य में किया जाएगा।

इस सप्ताह होने हैं कई ‘लाइव मिसाइल टेस्ट’

इस सप्ताह सेना, नौसेना और भारतीय वायुसेना हिन्द महासागर क्षेत्र में 290 किलोमीटर रेंज वाली ब्रह्मोस मिसाइल से कई ऑपरेशनल फायरिंग करेंगी, जो पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ चल रहे सैन्य टकराव के बीच अपनी सटीक-स्ट्राइक क्षमताओं का एक और प्रदर्शन होगा। ‘लाइव मिसाइल टेस्ट’ में इस्तेमाल की जाने वाली नॉन-न्‍यूक्लियर मिसाइल है। यह मैच 2.8 की रफ्तार यानी आवाज़ की रफ्तार का लगभग तीन गुना गति से उड़ती है। आज पहला टेस्ट करके एक तरह से अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में विमान और जहाज़ों के लिए अग्रिम चेतावनी जारी की गई है।

मिसाइल सटीकता से टारगेट कर सकती है हिट

चीन के साथ सीमा पर तनाव के बीच इन टेस्‍ट्स से यह दिखाने की कोशिश की जाएगी कि मिसाइल कितनी सटीकता से टारगेट हिट कर सकती है। यह परीक्षण तब किये जाने हैं जब पहले से ही ब्रह्मोस लैंड-अटैक मिसाइल को चीन के खिलाफ लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में तैनात किया गया है। इसके साथ टैंक, हॉवित्जर, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों और अन्य हथियारों को भी तैनात किया गया है। इसी तरह ब्रह्मोस मिसाइलों से लैस कुछ सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान भी वास्तविक नियंत्रण रेखा के करीब एयरबेस में तैनात हैं।

800 किमी. रेंज की ब्रह्मोस का परीक्षण 2021 के मध्य में

भारत और रूस ने मिलकर सुपरसोनिक क्रूज मीडियम रेंज मिसाइल ब्रह्मोस को विकसित किया है। 21वीं सदी की सबसे खतरनाक मिसाइलों में से एक ब्रह्मोस मैक 3.5 यानी 4,300 किलोमीटर प्रति घंटा की अधिकतम रफ्तार से उड़ सकती है। अग्नि के सिद्धांत पर काम करने वाली इस मिसाइल में 200 किलो तक के पारंपरिक वारहेड ले जाने की क्षमता है। पहले 300 किमी. तक मारक क्षमता वाली ब्रह्मोस मिसाइल में डीआरडीओ ने पीजे-10 परियोजना के तहत स्वदेशी बूस्टर बनाकर इसकी मारक क्षमता बढ़ा दी है। 400 किमी. से अधिक दूरी तक मार करने वाली ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का 30 सितम्बर को सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया था। यह ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल के विस्तारित रेंज संस्करण का दूसरा परीक्षण था। इसके अलावा एक और वर्जन टेस्‍ट हो रहा है, जो 800 किलोमीटर की रेंज में टारगेट को हिट कर सकता है। 800 किमी. रेंज की ब्रह्मोस का परीक्षण 2021 के मध्य में किया जाएगा।

हवा, पानी, जमीन… कहीं से भी कर सकते हैं फायर

ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को पनडुब्बी से, पानी के जहाज से, विमान से या जमीन से भी छोड़ा जा सकता है। यह मिसाइल पानी में 40 से 50 मीटर की गहराई से छोड़ी जा सकती है। रूस की एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया तथा भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने संयुक्त रूप से इसका विकास किया है। यह रूस की पी-800 ओंकिस क्रूज मिसाइल की प्रौद्योगिकी पर आधारित है। ब्रह्मोस के समुद्री तथा थल संस्करणों का पहले ही सफलतापूर्वक परीक्षण करके भारतीय सेना एवं नौसेना को सौंपा जा चुका है। भारत और रूस द्वारा विकसित की गई ब्रह्मोस अब तक की सबसे आधुनिक प्रक्षेपास्त्र प्रणाली है और इसने भारत को मिसाइल तकनीक में अग्रणी बना दिया है।

(हिन्दुस्थान समाचार)

1:12 PM: ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन

अन्य वैक्सीन के मुकाबले सस्ती होगी ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन

दुनिया भर में 100 से ज्यादा वैक्सीन ट्रायल मोड में हैं। उनमें 10-12 वैक्सीन आखिरी फेज में चल रही हैं। इस बीच स्वीडिश-ब्रटिश बायोटेक फर्म एस्ट्राजेनेका की ओर से सोमवार को घोषणा की गई कि ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के साथ उनके सहयोग से बनाई गई वैक्सीन कोवीशील्ड कोरोना मरीजों पर 70 प्रतिशत प्रभावी है। खास बात यह है कि अन्य वैक्सीन के मुकाबले यह वैक्सीन थोड़ी सस्ती है।

लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज, नई दिल्ली के डॉ. घनश्‍याम पांग्‍टेय का कहना है कि कई वैक्सीन हैं जिन पर रिसर्च चल रहा है, जैसे फाइजर, मार्डना, आदि, जिनकी गुणवत्ता 90 से 95 बताई गई है। इनमें भारत की को-वैक्सीन भी शामिल है। लेकिन ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह अन्य की अपेक्षा थोड़ी सस्ती है। भारत में इसके जल्दी आने की ज्यादा संभावना है।

2,741 वॉलंटियर्स पर 90 प्रतिशत प्रभावी

कंपनी की ओर से जानकारी दी गई कि अंतरिम विश्लेषण में कोरोना संक्रमण के कुल 131 मामले दर्ज हुए पर उनमें से किसी को गंभीर बीमारी और अस्पताल लेकर जाने की जरूरत नहीं पड़ी।

कंपनी के सीईओ पास्कल सोरिओट ने वैक्सीन की प्रभाविकता और सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए बताया कि यह वैक्सीन कोरोना के खिलाफ अधिक प्रभावी है और इस पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी पर इसका तत्काल प्रभाव है। एजीनोवायरस से बनाई गई इस वैक्सीन को 2-8 डिग्री सेल्सियस में रखा जा सकता है। इसके अलावी पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया इसके उत्पादन में सहयोगी हैं। यह संभवत: पहली वैक्सीन होगी जो भारत में उपलब्ध होगी।

कंपनी की ओर से जानकारी दी गई है कि 2,741 वॉलंटियर्स पर 90 प्रतिशत प्रभाविकता दिखी। इन्हें वैक्सीन की पहले हाफ डोज और फिर फुल डोज दी गई। दोनों डोज के विश्लेषण से यह पता लगा कि यह वैक्सीन कोरोना मरीजों पर 70 प्रतिशत प्रभावी है।

9:33 AM: Cyclonic storm Nivar

Tamil Nadu and Puducherry braces for the cyclonic storm Nivar

Tamil Nadu and Puducherry coasts between Karaikal and Mamallapuram around Puducherry are bracing for the cyclonic storm Nivar which would bring widespread rainfall/thunderstorm activity over Tamil Nadu, Puducherry and Karaikal during November 24-26 and over south coastal Andhra Pradesh, Rayalseema, and Telangana during 25-26.

The cyclonic storm Nivar is very likely to move northwestwards and cross Tamil Nadu and Puducherry coasts between Karaikal and Mamallapuram around Puducherry during 25th November 2020 evening as a severe cyclonic storm with a wind speed of 100-110 kmph gusting to 120 kmph.

It is very likely to intensify into a cyclonic storm during next 12 hours and into a Severe Cyclonic Storm during subsequent 12 hours.

As per the IMD, a Deep Depression over southwest Bay of Bengal moved northwestwards with speed of 04 kmph during past 06 hrs & lay centred at 2330 hrs IST of 23rd Nov, 2020 over southwest Bay of Bengal, about 440 km east-southeast of Puducherry & 470 km southeast of Chennai.

9:03 AM: President Kovind boards the Air India One- B777 aircraft

8:41 AM: ‘NIVAR’ likely to cross Tamil Nadu & Puducherry

Deep Depression over southwest Bay of Bengal moved northwestwards with speed of 04 kmph during past 06 hrs & lay centred at 2330 hrs IST of 23rd Nov, 2020 over southwest Bay of Bengal, about 440 km east-southeast of Puducherry & 470 km southeast of Chennai.

It is very likely to intensify into a cyclonic storm during next 12 hours and into a Severe Cyclonic Storm during subsequent 12 hours.

It is very likely to move northwestwards and cross Tamil Nadu and Puducherry coasts between Karaikal and Mamallapuram around Puducherry during 25th November 2020 evening as a severe cyclonic storm with a wind speed of 100-110 kmph gusting to 120 kmph.

8:15 AM: Heavy snowfal

8:09 AM: 345वां शहीदी दिवस

सिखों के 9वें गुरु – ह‍िन्द की चादर गुरु तेग बहादुर

‘हिन्द की चादर’ कहे जाने वाले और सिखों के नौवें गुरु, गुरु तेग बहादुर का इस साल 345वां शहीदी दिवस है। मुगल शासक औरंगज़ेब के आदेश पर गुरु तेग बहादुर को यातनाएं देने के बाद आज ही के दिन उनका सिर कलम कर दिया गया था। उसके बाद से हर साल 24 नवंबर को शहीदी दिवस के रूप में याद किया जाता है।

गुरु तेग बहादुर ने धर्म, मानवीय मूल्यों, आदर्शों और सिद्धांतों की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया था। सिख धर्म में, उनके बलिदान को बड़ी श्रद्धा के साथ याद किया जाता है। गुरु तेग बहादुर का जीवन मानवता की भलाई के लिए और समाज में एक, सेवा भाव और भाईचारे को बढ़ावा देने वाला रहा। उन्होंने लोगों के दुःख-दर्द दूर करने के कार्य किए और दमन के विरुद्ध संघर्ष किया।

गुरु तेग बहादुर का जन्म 1 अप्रैल 1621 को अमृतसर में हुआ था और जन्म के समय उनका नाम त्याग मल था। उनके पिता गुरु हरगोबिंद और माता नानकी थीं। गुरु हरगोबिंद छठे सिख गुरु थे। बचपन में, गुरु तेग बहादुर को मार्शल आर्ट, तलवारबाजी और घुड़सवारी का प्रशिक्षण दिया गया था। लेकिन अलग-अलग लड़ाइयों में अपने पिता के साथ सक्षम सेनानी होने के बावजूद, उन्होंने त्याग और ध्यान का रास्ता चुना। उनका विवाह 1633 में गुजरी से हुआ था। 1656 में, वे बकाला गांव चले गए जहां चिंतन और पूजा-पाठ में बहुत ज्यादा समय बिताते थे। पंजाब के बकाला में, गुरु तेग बहादुर ने लगभग 26 साल 9 महीने 13 दिन तक ध्यान किया।

कैसे बने सिख धर्म के नौवें गुरु

तेग बहादुर के पिता ने उन्हें अपने उत्तराधिकारी के रूप में नहीं चुना था क्योंकि उन्हें लगता था कि उस समय सिखों को एक सांसारिक नेता की जरूरत थी और उनके बेटे ने त्याग का रास्ता चुना था। गुरु हरगोबिंद ने अपने पोते गुरु हर राय को अपने उत्तराधिकारी के रूप में चुना। 31 साल की उम्र में हर राय की मृत्यु के बाद, उनका बेटा हर किशन पांच साल की उम्र में आठवें गुरु बन गए। हालांकि, हर किशन का 1664 में 7 साल की उम्र में एक बीमारी से निधन हो गया। उसके बाद, भ्रम था कि नौवें गुरु कौन बनेगा। अपनी मृत्यु से पहले, गुरु हर किशन ने कहा था कि अगला गुरु बाकला में मिलेगा। इसके बाद बकाला में कई ढोंगियों ने गुरु होने का दावा किया। लेकिन अगस्त 1664 में, गुरु तेग बहादुर को सिखों के नौवें गुरु का अभिषेक किया गया था।

गुरु तेग बहादुर ने उत्तर भारत और असम और ढाका के कई स्थानों का भ्रमण किया और गुरु नानक शब्द का प्रचार किया। गुरु तेग बहादुर ने कई ग्रंथों की रचना की जो गुरु ग्रंथ साहिब में जोड़े गए थे। उन्होंने सालोक, 116 शबद और 15 राग लिखे। उन्होंने 1665 में पंजाब के आनंदपुर साहिब शहर की स्थापना की।

सीस कटा सकते है केश नहीं

गुरु तेग बहादुर ने कश्मीरी पंडितों तथा अन्य हिन्दुओं को बलपूर्वक मुसलमान बनाने की मुहिम का विरोध किया। 1675 में मुगल शासक औरंगजेब ने उन्हें इस्लाम कबूल करने को कहा कि पर गुरु साहब ने कहा सीस कटा सकते है केश नहीं।

यह खबर जब औरंगजेब तक पहुंची तो उसने गुरु तेग बहादुर को दिल्ली बुलवाया और 24 नवंबर 1675 को, दिल्ली के चांदनी चौक पर मुगल सम्राट के अधिकार को स्वीकार करने से इनकार करने के लिए औरंगजेब के आदेश पर गुरु को सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया। उन्होंने औरंगजेब से कहा कि यदि तुम जबरदस्ती लोगों से इस्लाम धर्म ग्रहण करवाओगे तो तुम सच्चे मुसलमान नहीं हो क्योंकि इस्लाम धर्म यह शिक्षा नहीं देता कि किसी पर जुल्म करके मुस्लिम बनाया जाए। औरंगजेब यह सुनकर आग बबूला हो गया। फिर उसने गुरुजी का सबके सामने उनका सिर कलम करवा दिया।

गुरु तेग बहादुर जी की याद में उनके ‘शहीदी स्थल’ पर गुरुद्वारा बना है, जिसका नाम गुरुद्वारा ‘शीश गंज साहिब’ है। गुरुद्वारा शीश गंज साहिब तथा गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब उन स्थानों का स्मरण दिलाते हैं जहां उन्होंने अपनी शहादत दी थी तथा जहां उनका अंतिम संस्कार किया गया। विश्व इतिहास में धर्म एवं मानवीय मूल्यों, आदर्शों एवं सिद्धांत की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने वालों में गुरु तेग़ बहादुर साहब का स्थान अद्वितीय है।

गुरु तेग बहादुर ने हमेशा संदेश दिया कि किसी भी इंसान को न तो डराना चाहिए और न ही डरना चाहिए। जिसकी मिसाल गुरु तेग बहादुर ने बलिदान देकर दिया। जिसके कारण उन्हें हिन्द की चादर या भारत की ढाल भी कहा जाता है उन्होंने दूसरों को बचाने के लिए अपनी कुर्बानी दी।

8:09 AM: 93% of the total cases are recovere

23 November 2020

8:25 PM: विदेशी मुद्रा भंडार

कोविड काल में भी हमारे चेहरे की मुस्कान बना विदेशी मुद्रा भंडार, रिकॉर्ड बढ़ोत्तरी दर्ज

देश का विदेशी मुद्रा भंडार कोविड काल में भी हमारे चेहरे पर मुस्कान लाने की वजह बना है। जी हां, कोरोना के समय में दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाएं जहां बड़ी चिंता का कारण बनी रही हैं वहीं हमारे देश में व्यापार और बाजार में सरकार अपनी तमाम कोशिशों के जरिए तेजी भरने के प्रयास कर रही है। ऐसे समय में विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी के क्या मायने हैं और अर्थव्यवस्था पर इसका क्या असर पड़ सकता है और उसके दूरगामी परिणाम क्या होंगे आइए जानें विस्तार से…

कोरोना काल में भी नहीं रुकी रफ्तार, बढ़ता रहा फॉरेन रिजर्व

देश का विदेशी मुद्रा भंडार 13 नवम्बर को 572.77 बिलियन डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। विदेशी मुद्रा भंडार का यह अब तक का सबसे उच्चतम स्तर है। बता दें विदेशी मुद्रा भंडार फिर से नए सर्वकालिक उच्चतम स्तर पर है। 1991 में भारत के पास केवल 18 दिन का विदेशी मुद्रा भंडार रह गया था जबकि आज 15 महीनों का फॉरेन रिजर्व है।

आठ महीने में 100 बिलियन डॉलर बढ़ा विदेशी मुद्रा भंडार

गौरतलब हो देश का विदेशी मुद्रा भंडार पिछले आठ महीने में 100 बिलियन डॉलर बढ़ा है। मार्च 2020 में विदेशी मुद्रा भंडार 469.90 बिलियन डॉलर था। देखा जाए तो इस समय देश का विदेशी मुद्रा भंडार नए शिखर पर है और जीडीपी गिरावट के बावजूद विदेशी निवेश में वृद्धि हुई है। लगातार सातवें सप्ताह बढ़ोतरी दर्ज की गई है। एक सप्ताह में 4.28 अरब डॉलर विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ा है। फॉरेक्स भंडार की सबसे प्रमुख घटक विदेशी मुद्रा संपत्ति में भी वृद्धि हुई है। 13 नवम्बर को खत्म हफ्ते के दौरान विदेशी मुद्रा संपत्ति में 5.52 अरब डॉलर की वृद्धि हुई। विदेशी मुद्रा संपत्ति 530. 368 अरब डॉलर पर पहुंची। हालांकि इस दौरान देश के स्वर्ण भंडार में 1.233 अरब डॉलर की गिरावट हुई है। अभी देश का स्वर्ण भंडार 36.354 अरब डॉलर रह गया है।

विशेषज्ञों की राय में अर्थव्यवस्था पर इसका क्या असर

बिजनेस स्टैंडर्ड के एडिटोरियल डायरेक्टर अशोक कुमार भट्टाचार्य ने विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि के संबंध में कहते हैं- ऐसा किस लिए हुआ ? इसके तीन प्रधान कारण हैं। वे कहते हैं कि मार्च के बाद से देश की फोरन पोर्टफोलियो इंवेस्टमेंट में काफी तेजी आई। साथ ही विश्व बाजार में लिक्वडिटी में भी वृद्धि हुई जिसमें भारत का हिस्सा अधिक है, लेकिन मार्च के महीने में करीबन 16 बिलियन डॉलर देश की मार्केट से निकल गए। इसके बाद यदि अप्रैल से देखें तो आज तक भारतीय अर्थव्यवस्था में स्टॉक मार्केट इनवेंस्टमेंट का करीबन 17 बिलियन डॉलर का इजाफा हुआ है।

दूसरा कारण यह है कि अप्रैल और अगस्त में देखें तो 13 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। एफडीआई में करीबन 36 बिलियन डॉलर का इजाफा हुआ है। तीसरे कारण में उन्होंने पाया कि भारत के विदेश व्यापार में सर्विसेज ट्रेड और मर्चेंडाइज ट्रेड को जोड़ने पर अब तक करीबन 17 बिलियन डॉलर का इजाफा हुआ है। इसका निष्कर्ष निकलता है कि देश के पास पुराने सालों में एफडीआई का फॉरेन रिजर्व 9 से ग्यारह महीने का इम्पोर्ट कवर करने तक सीमित था जो इस समय एक साल से ज्यादा है।

एसोचैम कैपिटल मार्केट के चेयरमैन नरिंदर वाधवा कहते हैं कि यह एक चैलेंजे नहीं है। बल्कि हमें ऐसी घड़ी में केवल कॉन्सियस रहने की जरूरत है। भारत एक इंटरनेशनल मार्केट है। यह बेहद अच्छी बात है कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ रहा है और पूरी दुनिया की नजर इस पर है। साथ ही यह भी देखने में आया है कि पहले उत्पादन को लेकर चीन पर फोकस किया जाता था लेकिन इसका दरोमदार अब भारत के कंधो पर आ गया है। ऐसे में भारत मैन्यूफैक्चरिंग हब बनता जा रहा है। ये सभी सूचक हमे दर्शाते हैं कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार में जमा पैसा सीरियस मनी है जो जल्दी से वापस जाने वाला नहीं है।

8:19 PM: बनारस रेल इंजन कारखाना

8:12 PM: तरुण गोगोई का राजनीतिक जीवन

छात्र राजनीति से 3 बार CM की कुर्सी तक तय किया सफर, कुछ ऐसा था तरुण गोगोई का राजनीतिक जीवन

लगातार तीन बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तरुण गोगोई का सोमवार को लंबी बीमारी के पश्चात निधन हो गया। उनके निधन की खबर आते ही पूरे राज्य में शोक की लहर दौड़ गई है। पूर्व मुख्यमंत्री गोगोई का इलाज गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चल रहा था। उनका निधन 86 वर्ष की उम्र में जीएमसीएच में शाम 05.34 पर हुआ।

मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने गोगोई के निधन का समाचार मिलते ही अपने सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए और जीएमसीएच पहुंच कर चिकित्सकों से जानकारी हासिल की। राज्य के स्वास्थ्य, वित्त, शिक्षा आदि मामलों के मंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा ने बताया कि तरूण गोगोई के निधन की जानकारी जीएमसीएच के अधीक्षक ने औपचारिक रूप से दी।

तीन बार मुख्यमंत्री के पद पर आसीन रहे

तरुण गोगोई 2001 में पहली बार असम के मुख्यमंत्री के पद पर आसीन हुए थे। असम की राजनीति के इतिहास में तरुण गोगोई एकमात्र ऐसे राजनेता थे जो लगातार तीन बार मुख्यमंत्री के पद पर आसीन रहे। तरूण गोगोई अपने छात्र जीवन से ही राजनीतिक क्षेत्र में प्रवेश किया था। उनका जन्म 11 अक्टूबर, 1934 को तत्कालीन शिवसागर जिले के जोरहाट के रंगाजान चाय बागान में हुआ था। उनके पिता डॉ. कमलेश्वर गोगोई रंगाजान चाय बागान में चिकित्सक और माता उषा गोगोई असम के विख्यात पापरी कवि गणेश गोगोई की छोटी पुत्री थीं।

प्राथमिक शिक्षा और निजी जीवन

गोगोई ने प्राथमिक शिक्षा 26 नम्बर रंगाजान के बुनियादी विद्यालय से शुरू की थी। वर्ष 1949 में जोरहाट सरकारी हाई स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की। उसके पश्चात ऊपरी असम के प्रसिद्ध उच्च शिक्षा संस्थान जगन्नाथ बरुवा महाविद्यालय में दाखिला लिया और वहां से उन्होंने स्नातक की डिग्री हासिल की। इसके पश्चात उन्होंने गौहाटी विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री हासिल की। 1972 में तरुण गोगोई गुवाहाटी विश्वविद्यालय से प्राणी विज्ञान में स्नातक की डिग्री प्राप्त कर डॉली गोगोई के साथ विवाह बंधन में बंधे। तरुण गोगोई के दो संतान पुत्री चंद्रिमा गोगोई और पुत्र व कलियाबर के सांसद गौरव गोगोई हैं। गौरव गोगोई कलियांबर संसदीय क्षेत्र से लगातार दूसरी बार सांसद निर्वाचित हुए हैं। वर्तमान में कांग्रेस पार्टी की केंद्रीय समिति में गौरव गोगोई का काफी प्रभाव है।

कोरोना संक्रमित होने के बाद से आई स्वास्थ्य में गिरावट

कोरोना वायरस से संक्रमित होने के पश्चात 26 अगस्त को पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई को गुवाहाटी मेडिकल कालेज अस्पताल (जीएमसीएच) में भर्ती कराया गया था जहां पर उन्हें प्लाज्मा चढ़ाया गया। लंबे इलाज के बाद वे कोरोना जो पूरी तरह मुक्त हो गए। उसके बाद चिकित्सकों ने उन्हें घर जाने की इजाजत दे दी। घर पहुंचने के अल्प समय बाद ही उनके स्वास्थ्य में फिर से गिरावट देखी गई। फिर से उन्हें जीएमसीएच में भर्ती कराया गया। इलाज के बाद फिर से वे स्वस्थ हो गये और उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गयी। इस बीच पुनः उनके स्वास्थ्य में तेजी से गिरावट होने लगी जिसके बाद उन्हें जीएमसीएच में भर्ती कराया गया। बीच-बीच में उनके स्वास्थ्य में सुधार होता रहा और उनके स्वस्थ होने की उम्मीदें काफी बढ़ गई थीं।

शनिवार से उनके स्वास्थ्य में अचानक तेजी से गिरावट होने लगी। चिकित्सकों ने पूरी तन्मयता से उनके इलाज की व्यवस्था की। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा ने शनिवार को जीएमसीएच पहुंचकर चिकित्सकों से चर्चा की तथा दिल्ली स्थित एम्स के विशेषज्ञ चिकित्सकों से लगातार परामर्श लेते हुए उनकी चिकित्सा जारी रखने का निर्देश दिया। दुर्भाग्य से सोमवार की शाम जीएमसीएच में 05.34 बजने उनका निधन हो गया। उनके निधन से पूरे राज्य में शोक की लहर दौड़ गयी है।

(हिन्दुस्थान समाचार)

6:25 PM: Maharashtra issues SOP

5:12 PM: 30 Gharials released in the Ganga river

4:34 PM: जम्मू-कश्मीर ताजा बर्फबारी

जम्मू-कश्मीर ताजा बर्फबारी, पहाड़ों ने ओढ़ी बर्फ की चादर तो मैदानी इलाकों में छाए बादल

जम्मू-कश्मीर में मौसम ने एक बार फिर रविवार को करवट बदली। कश्मीर और जम्मू संभाग के ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फबारी हुई जबकि मैदानी इलाकों में बादल छाए रहे। इससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। श्रीनगर में न्यूनतम तापमान माइनस – 3.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बता दें यह वर्तमान सीजन का सबसे कम तापमान रहा है। रविवार को उत्तरी कश्मीर के गुलमर्ग और पहलगाम के पर्वतीय क्षेत्रों में कई बार बर्फबारी हुई। कठुआ-उधमपुर और सांबा दिनभर बादल छाए रहे।

आज से 25 नवंबर तक भारी बर्फबारी-बारिश

मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक सोमवार 23 नवंबर से प्रदेश के पर्वतीय इलाकों में सामान्य से भारी बर्फबारी और मैदानी इलाकों में सामान्य से बारी बारिश के आसार हैं। 23 से 25 नवंबर तक यह सिलसिला चलेगा। ऐसे में जम्मू श्रीनगर नेशनल हाइवे समेत मुगल रोड पर यातायात प्रभावित हो सकता है।

जम्मू कश्मीर के अन्य इलाकों में आज का तापमान

गिलगित में अधिकतम 12.0 और न्यूनतम तापमान 0 डिग्री दर्ज हुआ। वहीं मुजफ्फराबाद में अधिकतम 15.0 और न्यूनतम तापमान 6 डिग्री दर्ज हुआ। लेह में अधिकतम तापमान 2 डिग्री और न्यूनतम तापमान -10 डिग्री दर्ज किया गया है। मीरपुर में अधिकतम तापमान 22 डिग्री और न्यूनतम तापमान 8 डिग्री दर्ज किया गया है। श्रीनगर में अधिकतम तापमान 7 डिग्री और न्यूनतम तापमान 0 डिग्री दर्ज किया गया तो वहीं जम्मू में अधिकतम तापमान 20 डिग्री और न्यूनतम तापमान 11 डिग्री दर्ज किया गया।

देश के अन्य भागों में तापमान

वहीं अमृतसर में अधिकतम तापमान 23 डिग्री और न्यूनतम तापमान 7 डिग्री दर्ज हुआ। शिमला में अधिकतम तापमान 19 डिग्री और न्यूनतम तापमान 6 डिग्री, जालंधर में अधिकतम तापमान 22 डिग्री और न्यूनतम 7 डिग्री, चंडीगढ़ में अधिकतम तापमान 23 डिग्री और न्यूनतम तापमान 10 डिग्री, हिसार में अधिकतम 24 डिग्री व न्यूनतम 8 डिग्री तापमान, देहरादून में अधिकतम 23 डिग्री व न्यूनतम 9 डिग्री तापमान, दिल्ली में अधिकतम 25 डिग्री व न्यूनतम 8 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। सूरत में अधिकतम 32 व न्यूनतम 20 डिग्री तापमान दर्ज किया गया है।

वहीं लखनऊ में अधिकतम 26 डिग्री तो न्यूनतम 10 डिग्री तापमान रहा। प्रयागराज में अधिकतम 27 डिग्री व न्यूनतम 12 डिग्री, वाराणसी में अधिकतम 27 डिग्री व न्यूनतम 11 डिग्री, मुजफ्फरपुर में अधिकतम 23 डिग्री व न्यूनतम 13 डिग्री, पटना में अधिकतम 23 डिग्री व न्यूनतम 10 डिग्री, गंगटोक में अधिकतम 15 डिग्री व न्यूनतम 8 डिग्री, गुवाहाटी में अधिकतम 27 डिग्री और न्यूनतम 17 डिग्री, शिलॉन्ग में अधिकतम 20 डिग्री व न्यूनतम 8 डिग्री, इटानगर में अधिकतम 25 डिग्री व न्यूनतम 15 डिग्री सेल्सियस रहा।

वहीं कोहिमा में अधिकतम 19 डिग्री व न्यूनतम 8 डिग्री, कोलकाता में अधिकतम 28 डिग्री व न्यूनतम 17 डिग्री, जमशेदपुर में अधिकतम 28 व न्यूनतम 13 डिग्री, रायपुर में अधिकतम 27 व न्यूनतम 15 डिग्री, नागपुर में अधिकतम 29 व न्यूनतम 12 डिग्री, हैदराबाद में अधिकतम 32 डिग्री व न्यूनतम 19 डिग्री, चेन्नई में अधिकतम 32 व न्यूनतम 22 डिग्री, पणजी में अधिकतम 34 डिग्री व न्यूनतम 22 डिग्री, मुंबई में अधिकतम 34 डिग्री व न्यूनतम 21 डिग्री, पुद्दुचेरी में अधिकतम 31 डिग्री व न्यूनतम 22 डिग्री और पोर्ट ब्लेयर में अधिकतम 32 डिग्री व न्यूनतम 20 डिग्री तापमान दर्ज किया गया।

केरल में तेज हवाएं चलने की संभावना

इसके अलावा मौसम विभाग ने यह जानकारी भी दी है कि केरल और कराइकल के कुछ इलाकों में तेज हवाएं चलने की संभावना है। वहीं उड़िसा और असम के कुछ स्थानों पर ठंडी हवाएं चलने की संभावना है और कोहरा बढ़ने की संभावना है।

9:54 AM: 27th edition of SIMBEX-20

The 2020 edition of SIMBEX will witness participation by IN ships including destroyer Rana with integral Chetak helicopter & indigenously built corvettes Kamorta & Karmuk. In addition, IN submarine Sindhuraj &P8I maritime reconnaissance aircraft will also participate in exercise.

9:48 AM: COVID-19 Updates

9:44 AM: COVID-19 Updates

9:01 AM: आज से खुलेंगे विश्‍वविद्यालय

रोस्टर के आधार पर 50% उपस्थिति के साथ उत्तर प्रदेश में आज से खुलेंगे विश्‍वविद्यालय और डिग्री कॉलेज, संस्थान में एक बार में अधिकांश 200 छात्र कर सकते हैं कक्षा में प्रवेश

8:28 AM: Active cases

8:02 AM: सीमा पर मिली सुरंग

सांबा में पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर मिली सुरंग, नगरोटा एनकाउंटर के आतंकियों से जुड़ा है कनेक्शन!

बीएसएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस की एक संयुक्त टीम ने पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सुरंग का पता लगाया। बीएसएफ के आईजी ने कहा कि नगरोटा एनकाउंटर में मारे गए चारों आतंकी इसी सुरंग से भारतीय सीमा में आए थे। पाकिस्तान से शुरू होने वाली यह सुरंग अंतरराष्ट्रीय सीमा से 160 मीटर दूर साम्बा सेक्टर में भारत की ओर खुलती है। सीमा की बाड़ से महज 70 मीटर दूर भारतीय सीमा में मिली इस सुरंग की गहराई 25 मीटर है। सुरंग में रेत से भरी बोरियां मिली हैं जिन पर पाकिस्तान की सीमेंट कंपनी का नाम लिखा है।

नगरोटा एनकाउंटर में मारे गए चारों आतंकी इसी सुरंग से आये थे

जम्मू और कश्मीर के सांबा सेक्टर में अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास रविवार को यह भूमिगत सुरंग बीएसएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक गश्ती दल ने खोजी। बीएसएफ के आईजी एनएस जामवाल ने कहा कि नगरोटा एनकाउंटर में मारे गए चारों आतंकी इसी सुरंग से भारतीय सीमा में आए थे। इससे पहले भी पाकिस्तान सीमा के आसपास कई सुरंगें मिल चुकी हैं जो पकिस्तान की तरफ से शुरू होकर भारत की सीमा में खुलती थीं।

सुरंग के मुहाने पर मिलीं पाकिस्तानी सीमेंट कंपनी की बोरियां

इस साल अगस्त में सांबा के सीमावर्ती गांव बैन ग्लाड की सीमा पर एक सुरंग मिली थी। सीमा से 50 मीटर दूर मिली इस सुरंग में पाकिस्तान निर्मित बोरियां बरामद हुई थीं, जिनमें बालू (रेत) भरी हुई थी। यह सुरंग जीरो लाइन से लगभग 150 गज भारतीय सीमा के अंदर मिली थी। सुरंग के मुहाने को बालू की बोरियों से बंद किया गया था। इस सुरंग में कई बड़े हथियार भी मिले थे।

दो दिन पहले मुठभेड़ में चारों आतंकवादी

जम्मू-श्रीनगर हाइवे पर नगरोटा टोल प्लाजा के पास दो दिन पहले मुठभेड़ में चार आतंकवादियों ने भी सांबा सेक्टर में अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास से ही भारत में घुसपैठ की थी। सीमा पर सेना की सख्ती के चलते इन आतंकियों के भी किसी न किसी सुरंग के जरिये भारत की सीमा में घुसपैठ करने की आशंका जताई गई थी। इसीलिए शुक्रवार से बीएसएफ, आर्मी और जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ सीमा के सांबा सेक्टर में एंटी टनलिंग अभियान चलाया जा रहा था। इसी का नतीजा है कि आज पाकिस्तान से लगी अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवानों ने एक सुरंग का पता लगा लिया।

बालू की बोरियों से बंद किया गया था सुरंग का मुंह

बीएसएफ के आईजी एनएस जामवाल ने कहा कि ऐसा लग रहा है कि नगरोटा एनकाउंटर में मारे गए आतंकी इसी 30-40 मीटर लंबी सुरंग से भारतीय सीमा में घुसे थे। यह नई सुरंग है। हमारा मानना है कि उन्हें किसी गाइड ने भी मदद की है, जो उन्हें यहां से हाइवे तक लेकर गया होगा। जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीजीपी दिलबाग सिंह ने बीएसएफ के आईजी एनएस जामवाल और जम्मू रेंज के आईजी मुकेश सिंह ने सुरंग वाली जगह का निरीक्षण किया। डीजीपी ने कहा कि पुलिस ने नगरोटा एनकाउंटर स्थल के पास से मिले कुछ अहम सबूत बीएसएफ के हवाले किए थे, जिसके आधार पर बीएसएफ ने इस सुरंग को खोज निकाला। इस सुरंग के मुहाने को भी बालू की बोरियों से बंद किया गया था। सुरंग में रेत से भरी बोरियां मिली हैं जिन पर पाकिस्तान की सीमेंट कंपनी का नाम लिखा है।

(हिन्दुस्थान समाचार)

22 November 2020

6:00 PM: Volkswagen Beetle become electric vehicle

5:29 PM: GST collection

5:13 PM: गौ माता का हर उत्पाद अमृत

5:00 PM: Covid-19 tests

12:39 PM: हथकरघा उद्योग के जरिये आत्मनिर्भर बनते युवा

हथकरघा उद्योग के जरिये आत्मनिर्भर बनते युवा

(309 words)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने के लिये अनेक संस्थाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के रामपुर में भी दो संस्थाएं दिव्यांग लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के लिये उन्हें हथकरघा उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दे रही हैं। इस पहल से दिव्यांग लोगों को न सिर्फ रोजगार मिला बल्कि वो आत्मनिर्भर होने लगे हैं।

यहां की बुशहर बुनकर सोसाइटी और दिव्यांग स्वयं सहायता समूह द्वारा इन युवाओं को घर पर ही कच्चा माल उपलब्ध करवाया जा रहा है। जिससे वे ऊन आदि प्राप्त कर घर पर ही पट्टू,शॉल, मफलर आदि अन्य परिधान तैयार कर रहे हैं। पारंपिक हथकरघा उत्पादों की बिक्री के लिये देश व प्रदेश के अनेक स्थानों पर प्रदर्शनियां भी लगाई जाती हैं। जिससे बेरोजगार युवाओं को अच्छी आमदनी होती है।

प्रदर्शन‍ियों के माध्‍यम से हो रहा प्रचार

बुनकर सोसाइटी के सदस्य चंद्र मोहन कहते हैं कि सभी माल प्रदर्शनी में लगाये जाते हैं। दिल्ली हाट, प्रगति मैदान, सूरजकुंड,चंडीगढ़ में हिमाचल के माल जाते हैं। इनमें तरह-तरह की टोकरी, टोपियां, कोट, मोजे, लंहगा-चोली, शॉल, स्टॉल जैसे कई तरह के उत्पाद बनाए जाते हैं।

इसमें कई तरह के विभाग हैं, जैसे हैंडलूम, एमएसएमई के साथ मिलकर काम किया जाता है। इनके तहत उत्पाद बनाते हैं और जहां-जहां ऐसे हाट लगते हैं वहां सरकार की ओर बुलाया जाता है। आने-जाने का खर्च भी दिया जाता है और अपने माल की वहां प्रदर्शनी लगाते हैं। स्वयं सहायता समूह के सदस्य आरडी कश्यप बताते हैं कि इस संस्था से जुड़ कर ऊनी वस्त्र और हिमाचल की पुरानी कला वाले डिजाइन के कपड़े बना रहे हैं। वहीं युवाओं की मांग को देखते हुए आधुनिक डिजाइन के वस्त्र भी तैयार किए जा रहे हैं, जो सभी के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। निश्चित रूप से इन प्रयासों से बेरोजगार युवा जहां आत्मनिर्भर बन रहे हैं वहीं पारंपरिक कला को भी पहचान मिल रही है।

12:01 PM: India's COVID19 recovery rate improves

11:32 AM: Foundation stone of rural drinking water supply projects

10:55 AM: टारपीडो 'वरुणास्त्र'

भारतीय नौसेना को मिला पहला भारी वजन वाला पनडुब्बी रोधी टारपीडो ‘वरुणास्त्र’

(297 words)

भारतीय नौसेना लगातार अपनी ताकत में इजाफा कर रही है, इसी के तहत नौसेना को पहला भारी वजन वाला पनडुब्बी रोधी टारपीडो ‘वरुणास्त्र’ शनिवार को मिल गया, जिससे भारत की समुद्री ताकत बढ़ेगी। रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग (डीआरडीओ) के सचिव जी. सतीश रेड्डी ने आज पहले वरुणास्त्र को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। भारत डायनामिक्स लिमिटेड (बीडीएल) की विशाखापत्तनम इकाई में आयोजित एक समारोह में उन्होंने अत्याधुनिक केंद्रीय भंडार स्थापित करने की आधारशिला भी रखी।

भारतीय नौसेना के लिए 73 टारपीडो होगा निर्माण

वरुणास्त्र एक भारतीय उन्नत दिग्गज पनडुब्बी रोधी टारपीडो है। इसका विकास रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के नौसेना विज्ञान और तकनीकी प्रयोगशाला (एनएसटीएल) ने किया है। भारत डायनामिक्स लिमिटेड (बीडीएल) अपने विभिन्न मिसाइल कार्यक्रमों के लिए डीआरडीओ से जुड़ा हुआ है। यह क्विक रिएक्शन सरफेस टू एयर मिसाइल (क्यूआरएसएएम) के लिए उत्पादन एजेंसी है, जिसके हाल ही में सफलतापूर्वक परीक्षण किए गए थे। वरुणास्त्र टारपीडो का जहाज औपचारिक रूप से 26 जून, 2016 को तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने भारतीय नौसेना में शामिल किया था। भारतीय नौसेना के लिए 73 टारपीडो का निर्माण किया जाना है।

भारत डायनामिक्स लिमिटेड कर रहा है वरुणास्त्र का निर्माण

रक्षा मंत्रालय की उत्पादन एजेंसी होने के नाते भारत डायनामिक्स लिमिटेड अपनी विशाखापत्तनम इकाई में भारतीय नौसेना के लिए पनडुब्बी रोधी टारपीडो वरुणास्त्र का निर्माण कर रही है। बीडीएल एस्ट्रा एयर-टू-एयर मिसाइल सिस्टम के लिए उत्पादन एजेंसी भी है और इन मिसाइलों के निर्माण की शुरुआत की है। इन मिसाइल प्रणालियों को भारतीय वायु सेना के लिए डीआरडीओ ने स्वदेशी रूप से विकसित किया है। पहले वरुणास्त्र के निर्माण के लिए सतीश रेड्डी ने सभी हितधारकों, विशेष रूप से डिजाइन एजेंसी (एनएसटीएल) और उत्पादन एजेंसी (बीडीएल) के बीच तालमेल की सराहना की।
(हिन्दुस्थान समाचार)

10:50 AM: Indian Navy

10:30 AM: Recovery rate

10:30 AM: Recovery rate

10:00 AM: COVID-19 Testing Update

9:58 AM: पुष्कर पशु मेला

ऊंटों के कारण मिली पुष्कर पशु मेले को अंतरराष्ट्रीय पहचान, इस बार क्षेत्र पड़ा सुनसान

(605 words)

ऊंटों की भारी तादात के कारण पुष्कर पशु मेले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी खास पहचान कायम की है। प्रदेश के अलग-अलग जिलों व शहर-गांव से पुष्कर के रेत के धोरों में आने वाले ऊंटों के झुंड देशी-विदेशी मेहमानों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गए। इन्हें देखने के लिये प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में देशी-विदेशी मेहमान आते हैं। देश-विदेश के बड़े-बड़े प्रोफेशनल फोटोग्राफर भी ऊंटों व ऊंट पालकों की अटखेलियों को कवर करने के लिये आते हैं। मगर इस बार मेला रद्द होने के कारण 15 दिन तक आबाद रहने वाले रेतीलें धोरों में सन्नाटा पसरा हुआ है।

विश्व व्यापी कोरोना महामारी की वजह से पुष्कर का सालाना पशु मेला निरस्त कर दिया गया है। इसके चलते प्रशासन ने मेले में हर साल आने वाले पशुओं व पशुपालकों के पुष्कर में प्रवेश पर रोक लगा दी है। इतना ही नहीं जानकारी के अभाव में दूर-दराज से पहुंच रहे पशुपालकों को प्रशासन समझाइश कर वापस रवाना कर रहे हैं। वापस घरों को लौटते ऊंट पालकों की मायूसी देखी नहीं जाती।

करीब 10 हजार से अधिक जानवर बिक्री के लिए आते हैं…

पुष्कर में सालों से पशु मेला भरता आ रहा है और मेले के दौरान पुष्कर की मरूभूमि में प्रदेश की सबसे बड़ी पशुओं की मंडी लगती है। इस मंड़ी में ऊंट, घोड़े-घोड़ी, गाय-बैल, भैंस, बकरे-बकरी, गधे समेत विभिन्न प्रजाति के करीब 10 हजार से अधिक जानवर बिक्री के लिए आते हैं। इनमें से सबसे अधिक ऊंट पहुंचते हैं। बीते कुछ सालों से अश्व वंश की आवक में भी उछाल आया है। घोड़े-घोड़ी राजस्थान के अलावा पड़ोसी राज्य पंजाब व हरियाणा से भी आते हैं। वहीं पशुओं को खरीदने के लिए राजस्थान समेत पंजाब, हरियाणा, यूपी, बिहार, गुजरात से बड़ी संख्या में व्यापारी आते हैं।

15 दिनों तक करोड़ों रुपए की होती है लेनदेन

तकरीबन 15 दिनों तक सजने वाली इस मंड़ी में हजारों जानवरों की खरीद-फरोख्त होती है तथा पशुपालकों व व्यापारियों के बीच खुले आसमान के नीचे करोड़ों रुपए का लेनदेन होता है। पशु मेले में पशुओं की खरीद-फरोख्त के साथ-साथ बड़ी संख्या में पशुओं के साज-सज्जा की अस्थायी दुकानें की भी लगती है व काफी लोगों को रोजगार मिलता है। पशुपालकों व व्यापारियों को पुष्कर मेले का साल भर से इंतजार रहता है। लेकिन इस बार कोरोना काल के कारण न तो पशुओं की मंडी सज रही है और न ही कोई पशु श्रृंगार सामग्री की दुकानें लग रही हैं जिससे पशुपालक व व्यापारी काफी मायूस है।

पिछले साल पशु मेले 7176 पशु आए, 1848 बिके और 4.81 करोड़ का हुआ कारोबार…

पुष्कर मेले में बीते साल कुल 7 हजार 176 जानवरों की आवक हुई। इनमें सर्वाधिक 3 हजार 734 अश्व वंश शामिल है। जबकि 3 हजार 298 ऊंट वंश आए। इनमें से 1 हजार 72 अश्व व 775 समेत कुल 1 हजार 848 पशुओं की खरीद-फरोख्त हुई। जिससे पशुपालकों व व्यापारियों के बीच 4 करोड़ 81 लाख 10 हजार 380 का लेनदेन हुआ। सर्वाधिक 3 लाख 30 रूपए में एक घोड़ी बिकी। ऊंट अधिकतम 40 हजार रुपए कीमत में बिका। पंजाब व अन्य राज्यों से पिछले साल कुल 535 जानवर आये। इनमें सर्वाधिक 512 घोड़े-घोड़ी आये। इसके अलावा 22 ऊंट व एक भैंस भी राज्य के बाहर से आई।

बूंदी जिले से आए पशुपालक जगनाथ रायका बताते हैं- हम पुष्कर मेले में प्रतिवर्ष सौ से अधिक ऊंट लेकर आते हैं। इनमें से करीब 50 ऊंट बिक जाते हैं। जिससे हमें अच्छी-खासी आमदनी होती है तथा साल भर का खर्चा निकल जाता है। हमें मेले का पूरे साल इंतजार रहता है। लेकिन इस बार मेला रद्द होने के कारण हमें लाखों रूपए का नुकसान होगा।

(हिन्दुस्थान समाचार)

21 November 2020

12:45 PM: वैक्सीन से जुड़ी अच्छी खबर,

वरिष्ठ वैज्ञानिक ने फाइजर, मॉडर्ना और कोवैक्सीन के बारे में दी अहम जानकारी

साल 2020 जैसे-जैसे गुजरने को नजदीक है वैसे-वैसे वैक्सीन की उम्मीदें बढ़ने लगी हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने पहले ही कहा कि है कि साल की शुरूआत में वैक्सीन आ जाएगी, जबकि आम लोगों तक मई-जून तक पहुंचेगी। हालांकि सरकारी दुनिया में बन रही सभी सफल वैक्सीन पर नजर बनाएं हुए है, जिसके सफल होने पर लोगों तक पहुंचाई जा सके। वैक्सीन से जुड़ी कई अन्य जानकारी के लिये वरिष्‍ठ वैज्ञानिक डॉ. रमन आर गंगाखेड़कर से प्रसार भारती ने विशेष बातचीत की, जहां उन्होंने कई सावलों के जवाब दिए।

उम्मीद पर खरी उतरी हैं वैक्सीन

जर्मन कंपनी बायोनटेक और अमेरिकी कंपनी फाइजर कोरोना वायरस की वैक्सीन पर संयुक्त रूप से काम कर रही है और कंपनी के मुताबिक उसकी वैक्सीन 90 फीसदी से ज्यादा असरदार है। जबकि अमेरिकन कंपनी मॉडर्ना ने दावा किया है कि उनकी वैक्सीन के परिणाम 94.5 प्रतिशत तक सकारात्मक रहे हैं। ऐसे में वैक्सीन के अलग-अलग दावों के कैसे देखते हैं इस पर गंगाखेड़कर ने कहा कि दोनों वैक्सीन से जितनी अपेक्षा थी वो उससे ज्यादा कामयाब निकली हैं। डब्ल्यूएचओ ने कहा था कि अगर 50 प्रतिशत में सफल हुई तो उसे ले लेंगे। ये वैक्सीन अगर 100 लोगों को दी जा रही है तो 90 को वायरस से बचा रही है। ध्यान देने वाली बात सिर्फ ये है कि इन वैक्सीन को बनाने में एचआरए का प्रयोग किया जा रहा है, जो पहले कभी नहीं किया गया है। ऐसे में अगर नई चीज से बना रहे हैं, तो ये देखना जरूरी है कि इससे किसी को नुकसान न हो। फिलहाल इसके कोई साइड इफेक्ट नहीं पाए गए हैं। आगे साइड इफेक्ट होंगे या नहीं, अभी कुछ नहीं कह सकते।

वैक्सीन को रखने के लिये अलग-अलग तापमान

अलग-अलग देशों की वैक्सीन के स्टोरेज भी अलग होगा। ऐसे में वैक्सीन को रखने के लिये कितने तापमान की जरूरत होगी इस बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि फाइजर की वैक्सीन को माइनस 70 डिग्री तापमान के फ्रिज में रखा जाता है, जिसकी व्यवस्था हमारे यहां नहीं है। मॉडर्ना वैक्सीन के साथ ऐसी कंडीशन नहीं है। इसके अलावा हमारे देश में जो वैक्सीन बन रही है, उसमें सीरम की वैक्सीन को सामान्य तापमान पर रख सकते हैं। भारत बायोटेक की वैक्सीन भी ऐसी ही है। फिलहाल वैक्सीन को लेकर परेशान मत हों, सरकार सबको वैक्सीन पहुंचाएगी और एक बार देने के बाद लोग लंबे समय तक के लिये सुरक्षित रह सकते हैं।

आम लोगों तक कब तक पहुंचेगी वैक्सीन

भारत की आम जनता तक वैक्सीन कब तक पहुंचने की उम्मीद इस पर उन्होंने कहा कि हमारे देश की जनसंख्या बहुत ज्यादा है और वैक्सीन के उत्पादन की एक सीमा है। इसलिए जब वैक्सीन आयेगी तो पहली प्राथमिकता डॉक्टरों व स्वास्थ्‍यकर्मियों को दी जाएगी। उसके बाद बुजुर्गों को, जिनको ज्यादा खतरा है। सरकार ने पहले ही मई-जून तक 30 करोड़ लोगों को वैक्सीन मुहैया कराने की बात कही है। ये कुल जनसंख्या के 20 प्रतिशत लोगों को देने को कोशिश है। इसके अलावा करीब आठ महीने से संक्रमण है तो कम से कम 20-25 प्रतिशत लोगों को ये बीमारी हो चुकी है या हो सकती है। ऐसे में हम हर्ड इम्यूनिटी की ओर भी बढ़ रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अगर एक वैक्सीन के प्रोडक्शन में समय लगा तो हम कई दूसरी वैक्सीन को भी लाकर प्रयोग कर सकते हैं।

100 प्रतिशत रिकवरी रेट के लिये वैक्सीन जरूरी

देश में रिकवरी रेट 95 प्रतिशत के करीब पहुंचने वाली है, ऐसे में अगर रिकवरी रेट 100 प्रतिशत हो गया तो क्या कोरोना खत्म हो जाएगा, इस पर डॉ गंगाखेड़कर ने कहा कि अगर 100 मरीज हैं और सभी ठीक हो गए, तो जाहिर है, कोरोना नहीं होगा, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि देश में कोरोना के नए केस नहीं आयें। अगर केस आते रहे तो रिकवरी रेट 100 कभी नहीं हो पाएगा। अब जब पूरे देश में कोरोना फैल चुका है, तो हर कोने के लोगों को इम्यून बनाने के लिए या तो वो संक्रमित होकर एंटीबॉडी बनाएं या उन्हें वैक्सीन देकर सुरक्षित किया जाएगा तभी वायरस का संक्रमण खत्म होगा।

12:40 PM: Landmark milestone of 13 cr tests

12:40 PM: Landmark milestone of 13 cr tests

12:21 PM: Recovery rate improves

10:38 AM: COVID-19 Update

10:01 AM: विश्व टेलीविजन दिवस:

विश्व टेलीविजन दिवस: बुद्धू बक्सा बन गया हर घर की अहम जरूरत

 

अखबार और रेडियो के बाद अगर सूचना क्रांति हुई तो टेलीविजन के बाद हुई। टेलीविज़न के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र द्वारा 1996 में इस दिवस को मनाये जाने की घोषणा की थी। ‘ब्लैक एंड व्हाइट’ बुद्धू बक्सा अपने सहज प्रस्तुतिकरण के दौर से गुजरते हुए कब आधुनिकता के साथ कदमताल करते हुए सूचना क्रांति का सबसे बड़ा हथियार और हर घर की अहम जरूरत बन गया।

यह दुनिया जहान की खबरें देने और राजनीतिक गतिविधियों की सूचनाएं उपलब्ध कराने के अलावा मनोरंजन, शिक्षा तथा समाज से जुड़ी महत्वपूर्ण सूचनाओं को उपलब्ध कराने, प्रमुख आर्थिक और सामाजिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करते हुए समूचे विश्व के ज्ञान में वृद्धि करने में मदद करने वाला सशक्त जनसंचार माध्यम है।

यह संस्कृतियों और रीति-रिवाजों के आदान-प्रदान के रूप में मनोरंजन का सबसे सस्ता साधन है, जो तमाम महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करते हुए पूरी दुनिया के ज्ञान में असीम वृद्धि करने में मददगार साबित हो रहा है। मानव जीवन में टीवी की बढ़ती भूमिका तथा इसके सकारात्मक और नकारात्मक पहलुओं पर चर्चा करने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 21 नवंबर को ‘विश्व टेलीविजन दिवस’ मनाया जाता है।

टेलीविजन दिवस मनाए जाने का कारण

टीवी के आविष्कार को सूचना के क्षेत्र में ऐसा क्रांतिकारी आविष्कार माना गया है, जिसके जरिये समस्त दुनिया हमारे करीब रह सकती है। हम घर बैठे दुनिया के किसी भी कोने में होने वाली घटनाओं को लाइव देख सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र द्वारा पहली बार 21 तथा 22 नवंबर 1996 को विश्व टेलीविजन मंच का आयोजन करते हुए टीवी के महत्व पर चर्चा करने के लिए मीडिया को प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराया गया था।

उस दौरान विश्व को परिवर्तित करने में टीवी के योगदान और टीवी के विश्व पर पड़ने वाले प्रभावों के संदर्भ में व्यापक चर्चा की गई थी। उसी के बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा में 17 दिसंबर 1996 को एक प्रस्ताव पारित करते हुए प्रतिवर्ष 21 नवंबर को विश्व टेलीविजन दिवस मनाने का निर्णय लिया गया और तभी से प्रतिवर्ष 21 नवंबर को ही यह दिवस मनाया जाता रहा है।

टेलीविज़न का इतिहास

टेलीविजन का इतिहास टेलीविजन का आविष्कार 1925 में अमेरिका के वैज्ञानिक जॉन लॉगी बेयर्ड ने किया था। उन्होंने 26 जनवरी 1926 को लंदन शहर स्थित रॉयल इंस्टीट्यूशन से लंदन के पश्चिम स्थित ‘सोहो’ नामक स्थान पर टेलीविजन संदेशों का सफल प्रसारण करके दिखाया। उनके द्वारा बनाए गए मैकेनिकल टेलीविजन के बाद 1927 में फिलो फॉर्न्सवर्थ द्वारा इलेक्ट्रॉनिक टेलीविजन का आविष्कार किया गया, जिसका 3 सितम्बर 1928 को उनके द्वारा सार्वजनिक प्रदर्शन किया गया।

कुछ असफलताओं के बाद सदी के महान् आविष्कार टेलीविजन को 1934 में पूरी तरह इलेक्ट्रॉनिक रूप देने में सफलता मिली। बिजली से चलने वाले उस अद्भुत इलेक्ट्रॉनिक उपकरण की बदौलत आगामी वर्षों में कई आधुनिक टीवी स्टेशन खोले गए। जिसके बाद लोग बड़ी संख्या में टीवी खरीदने लगे और टेलीविजन धीरे-धीरे मनोरंजन एवं समाचार का महत्वपूर्ण माध्यम बनता गया।

भारत में टेलीविजन का आगमन

भारत में इलेक्ट्रॉनिक टेलीविजन ने अपने आविष्कार के करीब 32 साल बाद पहला कदम रखा। भारत में टीवी का पहला प्रसारण प्रायोगिक तौर पर दिल्ली में दूरदर्शन केन्द्र की स्थापना के साथ 15 सितम्बर 1959 को शुरू किया गया। उस समय टीवी पर सप्ताह में केवल तीन दिन ही मात्र तीस-तीस मिनट के कार्यक्रम आते थे लेकिन इतने कम समय के बेहद सीमित कार्यक्रमों के बावजूद टीवी के प्रति लोगों का लगाव बढ़ता गया और यह बहुत जल्द लोगों की आदत का अहम हिस्सा बन गया।

दूरदर्शन का व्यापक प्रसार हुआ वर्ष 1982 में दिल्ली में हुए एशियाई खेलों के आयोजन के प्रसारण के बाद, दूरदर्शन द्वारा अपना दूसरा चैनल 26 जनवरी 1993 को शुरू किया गया और उसी के बाद दूरदर्शन का पहला चैनल डीडी-1 और दूसरा नया चैनल डीडी-2 के नाम से लोकप्रिय हो गया, जिसे बाद में ‘डीडी मैट्रो’ नाम दिया गया। भले ही टीवी के आविष्कार के इन दशकों में इसका स्वरूप और तकनीक पूरी तरह बदल चुकी है लेकिन इसके कार्य करने का मूलभूत सिद्धांत अभी भी पहले जैसा ही है।

1990 के दशक में निजी चैनल की शुरुआत

देश में जहां दूरदर्शन की शुरुआत के बाद दशकों तक दूरदर्शन के ही चैनल प्रसारित होते रहे, वहीं 1990 के दशक में निजी चैनल शुरू होने की इजाजत मिलने के साथ एक नई सूचना क्रांति का आगाज हुआ। इन तीन दशकों में निजी चैनलों को लगातार मिले लाइसेंस के चलते अब देशभर में टीवी पर करीब एक हजार चैनल प्रसारित होते हैं।

ढेर सारे टीवी चैनलों की बदौलत जहां ज्ञान, विज्ञान, शिक्षा, सूचना आदि के स्रोत बढ़े हैं, वहीं चिंताजनक स्थिति यह है कि टीआरपी की बढ़ती होड़ में बहुत से निजी टीवी चैनल जिस प्रकार गलाकाट प्रतिद्वंद्विता के चलते समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों की अनदेखी करते हुए दर्शकों के समक्ष कुछ भी परोसने को तैयार रहते हैं, उससे युवा पीढ़ी दिशाहीन हो रही है और जनमानस में गलत संदेशों का बीजारोपण होता है।

हालांकि किसी भी वस्तु के अच्छे और बुरे दो अलग-अलग पहलू हो सकते हैं। कुछ ऐसा ही सूचना एवं संचार क्रांति के अहम माध्यम टीवी के मामले में भी है। एक ओर जहां यह मनोरंजन और ज्ञान का सबसे बड़ा स्रोत बन चुका है और नवीनतम सूचनाएं प्रदान करते हुए समाज पर सकारात्मक प्रभाव डालता है, वहीं टेलीविजन की वजह से ज्ञान-विज्ञान, मनोरंजन, शिक्षा, चिकित्सा इत्यादि तमाम क्षेत्रों में बच्चों से लेकर बड़ों तक की सभी जिज्ञासाएं शांत होती हैं।
(हिन्दुस्थान समाचार)

20 November 2020

9:15 AM: ICC postpones Women's T20WorldCup

9:11 AM: हिमाचल प्रदेश

हाल में हुए हिमपात और बारिश के बाद शीत लहर की चपेट में है। लाहौल-स्‍पीति में केलोंग राज्‍य का सबसे ठंडा स्‍थान रहा, जहां तापमान शून्‍य से दो डिग्री नीचे दर्ज किया गया।

9:01 AM: भारत-लक्जमबर्ग

दो दशक बाद फिर से मजबूत हुए भारत-लक्जमबर्ग के संबंध, अंतरिक्ष में उड़ान भरेंगे दोनों देश

यूरोप के छोटे से देश लक्जमबर्ग ने आर्थिक प्रगति की दिशा में भारत के साथ नए कदम उठाने का फैसला किया है। करीब दो दशक बाद दोनों देशों के बीच पहली औपचारिक द्वीपक्षीय वार्ता गुरुवार को हुई, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आने वाले समय में भारत और लक्जमबर्ग के बीच फिनटेक, डिजिटल डोनमेन, आदि कई क्षेत्रों में टेक्नोलॉजी का आदान-प्रदान दोनों देशों के लिए नए अवसर खोल सकता है। खास बात यह है कि दोनों देश जल्द ही अंतरिक्ष के क्षेत्र में बड़ा समझौता करने की तैयारी में हैं।

कोविड के दौरान लक्‍जमबर्ग में हुईं मौतों पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “सबसे पहले मैं कोविड-19 महामारी से लक्समबर्ग में हुई जानहानि के लिए मेरी तरफ से 130 करोड़ भारत वासियों की तरफ से संवेदना प्रकट करता हूँ। और इस कठिन समय में आपके कुशल नेतृत्व का अभिनन्दन भी करता हूँ।”

उन्‍होंने कहा, “आज का हमारा वर्चुअल सम्मेलन मेरी दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है। आप और मैं विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मिलते रहे हैं, लेकिन पिछले दो दशकों में भारत और लक्समबर्ग के बीच यह पहली औपचारिक सम्मेलन है। लोकतंत्र, संविधान और स्वतंत्रता जैसे साझा आदर्श हमारे संबंधों को मजबूती देते हैं। आज जब विश्व महामारी की आर्थिक और स्वास्थ्य चुनौतियों से जूझ रहा है, भारत-लक्समबर्ग की पार्टनरशिप दोनों देशों के साथ-साथ दोनों क्षेत्रों की रिकवरी के लिए उपयोगी हो सकती है।

टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अपार संभावनाएं

प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले समय में स्टील, फिनटेक यानी फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी, डिजिटल डोमेन जैसे क्षेत्रों में हमारे बीच अभी भी अच्छा सहयोग है – किंतु इसे और आगे ले जाने की अपार संभावनाएं हैं। मुझे प्रसन्नता है कि कुछ दिन पहले हमारी स्पेस एजेंसी ने लक्समबर्ग की चार सेटेलाइट लॉन्च कीं। अंतरिक्ष के क्षेत्र में भी हम पारस्परिक आदान प्रदान बढ़ा सकते हैं।

प्रधानमंत्री ने लक्‍जमबर्ग को Coalition for Disaster Resilient Infrastructure में शामिल होने का आमंत्रण दिया। उन्‍होंने कहा कि इंटरनेशनल सोलर अलायंस में लक्समबर्ग के शामिल होने की घोषणा का हम स्वागत करते हैं।

इसरो-लक्‍जमबर्ग स्‍पेस ऑर्गनाइजेशन के बीच समझौते पर विचार

संयुक्त सचिव (पूर्व-पश्चिम) ने बताया कि पिछले सप्‍ताह जो पीएसएलवी-3 के जरिए सेटेलाइट लॉन्‍च की गई थीं, उनमें चार लक्‍जमबर्ग की थीं। लक्‍जमबर्ग एक सेटेलाइट निर्माण का एक बहुत बड़ा हब है। वहां की सोसाइटी सीएस, भारतीय कंपनियों और इसरो के साथ मिलकर काम कर रही है। लो-अर्थ सेटेलाइट, विमानों में सेटेलाइट कम्‍युनिकेशन प्रणालियों में इसरो और सीएस का बड़ा योगदान है। दोनों देश इसरो और लक्‍जमबर्ग स्‍पेस ऑर्गनाइजेशन के बीच एक समझौते पर विचार कर रहे हैं।

19 November 2020

6:18 PM: Nayar Valley Adventure Festival in Bilkhet

6:12 PM: बोनसाई पौधे

छोटे स्थानों पर बोनसाई पौधे उगाने के बारे में जागरूकता फैला रहे रिटायर्ड वन अधिकारी

घर में पेड़ पौधे होने से सकारात्मक ऊर्जा मिलती है, साथ ही अगर किसी के घर में वास्तु दोष है, तो पेड़ पौधे उसे दूर करने की भी ताकत रखते हैं। लेकिन इन दिनों घरों में बोनसाई पौधों को रखने का भी चलन बढ़ गया है। उत्तर कन्नड़ जिले के कोमतातालुका के कल्बे गांव के एलआर हेगड़े जनता के बीच शहरी इलाकों में हरियाली के लिये बौने पेड़ों के बारे में जागरूकता बढ़ाने का बीड़ा उठाया है।

बोनसाई यानी बौने पौधे, यह काष्ठीय पौधों का छोटा रूप लेकिन पौधों को आकर्षक रूप प्रदान करने की एक कला या तकनीक है। इन छोटे पौधों को गमलों में उगाया जा सकता है। इसकला के जरिये पौधों को सुंदर आकार दिया जा सकता है। सिंचाई के लिए एक गमले से निकालकर दूसरे गमले में रोपित भी किया जा सकता है और अपने घर को छोटे पौधों की हरी-भरी बगिया बनाया जा सकता है।

घर में लगाये औषधियों के पौधे

एल आर हेगड़े एक सेवानिवृत्त वन अधिकारी हैं और पर्यावरण प्रेमी भी। वो शहरी क्षेत्रों में छोटे पौधों को उगाकर हरियाली फैलाने के प्रति लोगों को जागरूक कर रहे हैं। दरअसल बोनसाई को गमले में रख कर छोटे पौधों को इस तरह वृक्षारोपण किया जाता है कि उनका प्राकृतिक रूप तो बना रहता है लेकिन आकार में बौने रह जाते हैं। इसलिये उसे कोई आसानी से घर में उगा सकता है।

एलआर हेगड़े बताते हैं कि पारंपरिक और दुर्लभ औषधीय पौधों के विलुप्त होने को रोककर अगली पीढ़ी को पेड़ की विविधता के बारे में सूचित करने के उद्देश्य से बोनसाई वन विकसित किया है। एल आर हेगड़े ने नवग्रह, काशीवाना, सप्तर्षी जैसे पारंपरिक औषधीय पौधों का पोषण किया जो अनायास ही लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।

एलआर हेगड़े पिछले कई सालों से बोनसाई प्रौद्योगिकी के बारे में बता रहे हैं बल्कि खुद का बोनसाई संयंत्र भी बनाया है। अश्वथ वृक्ष, लाल चंदन, आम और जैक फ्रूट को विकसित भी किया है। जाहिर है बोनसाई जंगल का निर्माण कर हेगड़े ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में शानदार काम किया है। लुप्तप्राय पौधों का संरक्षण वाकई में सराहनीय है। शहरों में बोनसाई पौधे लगा कर अपने घर का वातावरण भी शुद्ध कर सकते हैं।

5:51 PM: Central teams to states

10:24 AM: Encounter at Ban toll plaza near Jammu

10:21AM: COVID-19 Updates

10:12 AM: Twitter apologises to Indian parliament's Joint Committee

Twitter has apologised to Indian parliament’s Joint Committee on the Personal Data Protection Bill for geo-tagging India’s northern territory of Ladakh as part of China, promising to make corrections by month-end: Committee Chairperson Meenakshi Lekhi.

10:08 AM: हरियाणा में Covaxin का तीसरा ट्रायल

9:55 AM: COVID-19 testing

9:33 AM: इंदिरा गांधी की 103वीं जयंती आज

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का राजनीतिक सफर

भारत की पहली और एक मात्र महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का जन्म आज ही के दिन वर्ष 1917 में हुआ था। इंदिरा गांधी पढ़ाई पूरी करते ही राजनीति में सक्रिय हुईं, बेहद लोकप्रिय प्रधानमंत्री बनीं और अपने पूरे राजनीतिक सफर में एक लोकप्रिय नेता के तौर पर जानी गईं और आज भी उनके फैसलों को याद किया जाता है। इंदिरा गांधी ने अपने शासन काल में कई ऐसे फैसले लिये जो उस दौर में एक महिला के लिए काफी चुनौती भरे रहे और लोगों की कल्पना से परे भी। इंदिरा गांधी की जयंती पर आइये एक नज़र डालते हैं उनके जीवन पर।

इंदिरा गांधी भारत के सबसे बड़े नेता, स्वतंत्रता सेनानी और स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की बेटी थीं। उनकी मॉं कमला नेहरू एक स्वतंत्रता सेनानी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की नेता थीं। उनका जन्म 19 नवंबर, 1917 को इलाहाबाद में हुआ था।

इंदिरा गांधी ने दिल्ली के मॉडर्न स्कूल, सेंट सेसिलिया और इलाहाबाद में सेंट मैरी कॉन्वेंट से पढ़ाई की। उन्होंने इंटरनेशनल स्कूल ऑफ जिनेवा, बेक्स में इकोले नौवेल्ले और पूना और बॉम्बे में पीपुल्स ओन स्कूल में भी अध्ययन किया। बाद में वह अपनी मॉं के साथ बेलूर मठ चली गईं, जो रामकृष्ण मिशन का मुख्यालय है। उन्होंने शांतिनिकेतन में भी अध्ययन किया, जहां रवींद्रनाथ टैगोर ने उनका नाम प्रियदर्शिनी रखा। उसके बाद से कई लोग उन्हें इंदिरा प्रियदर्शिनी टैगोर के नाम से भी पुकारने लगे।

इंदिरा गांधी ने इंग्लैंड में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए दाखिला लिया, लेकिन अपना कोर्स पूरा नहीं कर सकीं और भारत लौट आईं। बाद में 1942 में फिरोज गांधी से शादी उनकी शादी हुई। उनके दो बेटे राजीव और संजय थे।

राजनीतिक सफर

1960 में इंदिरा गांधी को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में चुना गया। 1964 में अपने पिता की मृत्यु के बाद, उन्हें राज्य सभा के सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया और वे सूचना और प्रसारण मंत्री बनीं। साथ ही लाल बहादुर शास्त्री के मंत्रिमंडल में शामिल हुईं। 1966 में लाल बहादुर शास्त्री की अकस्म‍िक मृत्यु के बाद, उन्‍हें प्रधानमंत्री चुना गया। पीएम के रूप में अपने पहले कार्यकाल के दौरान, उन्होंने 14 बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया। उन्होंने अपने पिता के बाद बतौर पीएम सबसे लंबी सेवा दी। 1971 में बांग्लादेश मुक्ति युद्ध में पाकिस्तान के खिलाफ भारत को जीत दिलाने के लिए इंदिरा गांधी को भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

अपने राजनीतिक सफर में वह सूचना और प्रसारण मंत्री (1964- 1966) रहीं। फिर वह जनवरी 1966 से मार्च 1977 तक भारत के प्रधानमंत्री के रूप में सर्वोच्च पद पर रहीं। सितंबर 1967 से मार्च 1977 तक परमाणु ऊर्जा मंत्री भी रहीं। उन्होंने 5 सितंबर 1967 से 14 फरवरी, 1969 तक विदेश मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला। गांधी ने जून 1970 से नवंबर 1973 तक गृह मंत्रालय का नेतृत्व किया और जून 1972 से मार्च 1977 तक अंतरिक्ष मंत्री रहीं। जनवरी 1980 से वह योजना आयोग की अध्यक्ष थीं। उन्होंने 14 जनवरी 1980 से फिर से प्रधानमंत्री कार्यालय की अध्यक्षता की।

देश में लगाया आपातकाल

1971 में लोकसभा चुनाव के बाद, इंदिरा गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले राज नारायण द्वारा उन पर कदाचार का आरोप लगाया गया। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने चुनावी कदाचार के आधार पर उस चुनाव को शून्य घोषित कर दिया, जिसका अर्थ था कि इंदिरा गांधी अब प्रधानमंत्री के रूप में अपना पद नहीं रख सकतीं थीं, लेकिन उन्होंने पद छोड़ने से इनकार कर दिया। इसके विरोध में देश भर में अशांति फैल गई। उस दौरान गांधी ने अधिकांश विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार करवा दिया। इस वजह से उनके खिलाफ जगह-जगह विरोध प्रदर्शन हुए। विरोध बढ़ता ही जा रहा था कि उनके मंत्रिमंडल ने भारत के राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद को आपातकाल घोषित करने की सिफारिश की, जिसे राष्ट्रपति ने 1975 में लागू कर दिया।

आपातकाल की घोषणा के बाद, पूरा देश इंदिरा गांधी और कांग्रेस पार्टी के प्रत्यक्ष शासन के अधीन था। पुलिस को विशेष अधिकार दिए गए थे, जो उन्हें अनिश्चित काल तक स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने में सक्षम बनाता था। प्रेस को भी सेंसर कर दिया गया था। अधिकांश विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया गया था और विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्यों को खारिज कर दिया गया था। अंत में, 1977 में, गांधी ने चुनाव दोबारा लड़ने का फैसला किया लेकिन वह चुनाव हार गईं। हालांकि 1980 में उन्होंने वापस चुनाव जीत लिया।

हत्या

1984 में, अमृतसर में स्वर्ण मंदिर पर जरनैल सिंह भिंडरावाले के नेतृत्व वाले चरमपंथियों ने कब्जा कर लिया, जिन्होंने सिखों के लिए एक स्वतंत्र राज्य की मांग की थी। अलग राज्य की मांग और स्वर्ण मंदिर पर कब्जे की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए, इंदिरा गांधी ने सेना भेजी। लेकिन इसके परिणामस्वरूप रक्तपात हुआ, और सिख समुदाय में भारी रोष उत्पन्न हो गया। इसी के चलते 31 अक्टूबर, 1984 को इंदिरा गांधी के उन्‍हीं के दो अंगरक्षकों ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी। उनके अंगरक्षकों ने उन पर 31 गोलियां चलाई थीं।

9:03 AM: आतंकवादियों और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़

18 November 2020

5:47 PM: राज्यसभा निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई

5:31 PM: Param Siddhi

5:31 PM: Metal idols to Tamil Nadu

4:33 PM: Snow clearance operations

1:48 PM: Air Quality Index

1:44 PM: वैक्सीन परीक्षण के परिणाम जनवरी 2021 तक

12:03 PM: World COPD Day

12:01 PM: Recovered & Active cases of India

11:45 AM: Action plan for Online Dispute Resolution

11:32 AM: Jammu And Kashmir

11:21 AM: COVID-19 India Tracker

11:03 AM: COVID-19 Updates

11:01 AM: COVID-19

10:39 AM: COVID-19

10:02 AM: UK reported 598 deaths

17 November 2020

1:29 PM: COVID-19 Update

  • Active Caseload which has now stands at 4,53,401
  • Total recovered cases stand at 82,90,370
  • Recovery Rate has improved to 93.42% today –
  • 72.87% of the recovered cases reported in the last 24 hours are from ten States/UTs.

1:23 PM: COVID-19 Update

1:23 PM: COVID-19 Update

12:31 PM: India Fights Corona

12:22 PM: Badrinath Shrine

12:01 PM: COVID- 19 India Tracker

9:52 AM: COVID-19 Update

9:43 AM: 1st meeting

1st meeting of newly constituted Bihar cabinet to take place today. CM Nitish Kumar will chair the meeting.

9:22 AM: COVID-19 Testing Update

9:01 AM: Tribute to freedom fighter Lala Lajpat Rai

8:54 AM: 12th BRICS Summit

Prime Minister Narendra Modi to virtually attend 12th BRICS Summit hosted by Russia today, under the theme “Global Stability, Shared Security and Innovative Growth”

8:42 AM: Decline in daily new cases continues

8:37 AM: मालाबार अभ्यास का दूसरा चरण

मालाबार अभ्यास का दूसरा चरण 17 से 20 नवम्बर के बीच, अरब सागर में उतरेंगीं 4 देशों की नौसेनाएं

क्वाड समूह के चारों देशों भारत, जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया की नौसेनाओं ने मालाबार नौसैन्य अभ्यास के 24वें संस्करण के आखिरी चरण की तैयारी पूरी कर ली है। बंगाल की खाड़ी में तीन से छह नवम्बर के बीच पहले चरण में भारत, जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया की नौसेनाओं ने मालाबार नौसैन्य अभ्यास के 24वें संस्करण में हिस्सा लिया। अब मालाबार नौसैन्य अभ्यास का दूसरा चरण 17 नवम्बर से 20 नवम्बर तक अरब सागर में होना है।

आईएनएस विक्रमादित्य अपने मिग-29 के फाइटर जेट्स के साथ तैनात

नौसेना प्रवक्ता के अनुसार भारत ने 44,500 टन के आईएनएस विक्रमादित्य को अपने मिग-29 के फाइटर जेट्स के साथ तैनात किया है, जबकि अमेरिका ने 100,000 टन से अधिक परमाणु चालित यूएसएस निमित्ज वाहक को एफ-18 फाइटर्स और ई-2 सी हॉके के साथ चार दिवसीय सैन्य अभ्यास के लिए भेजा है।

यूएस नेवी के स्ट्राइक कैरियर निमित्ज में पी-8ए समुद्री टोही विमान के अलावा क्रूजर प्रिंसटन और विध्वंसक स्टेरेट होंगे। यह नौसन्य अभ्यास मुख्य रूप से भारतीय नौसेना के विक्रमादित्य कैरियर बैटल ग्रुप और यूएस नेवी के निमित्ज कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के आसपास केंद्रित होगा। इसके अलावा रॉयल ऑस्ट्रेलियन नेवी और जापानी नौसैनिकों के दो विध्वंसक अभ्यास करेंगे।

युद्धाभ्यास के लिए एक दर्जन युद्धपोत एक साथ उतरेंगे अरब सागर में

प्रवक्ता के अनुसार इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में ‘अंतरराष्ट्रीय नियमों’ की रक्षा करने के इच्छुक ‘क्वाड’ देशों की नौसेनाएं युद्धाभ्यास के लिए एक दर्जन युद्धपोत के साथ अरब सागर में उतरेंगीं। इस दौरान उन्नत सतह और पनडुब्बी-रोधी युद्ध अभ्यास, सीमन्सशिप इवोल्यूशन और हथियार फ़ेरिंग भी चारों नौसेनाओं के बीच अंतर-संचालन और तालमेल को आगे बढ़ाने के लिए किए जाएंगे।

भारतीय नौसेना के विक्रमादित्य और उसके लड़ाकू और हेलीकॉप्टर एयर-विंग्स के अलावा, स्वदेशी विध्वंसक कोलकाता और चेन्नई, स्टील्थ फ्रिगेट तलवार, फ्लीट सपोर्ट शिप दीपक और इंटीग्रल हेलीकॉप्टर भी अभ्यास में भाग लेंगे, जिसका नेतृत्व वेस्टर्न फ्लीट के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग रियर एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन करेंगे। भारतीय नौसेना के स्वदेशी निर्मित पनडुब्बी खंदेरी और पी-8आई समुद्री टोही विमान भी अभ्यास के दौरान अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन करेंगे।

चीन को सामरिक संदेश देने की कोशिश कर रही है भारतीय नौसेना

मालाबार अभ्यास के जरिये भारतीय नौसेना चीन को सामरिक संदेश देने की कोशिश कर रही है कि वह केवल हिन्द महासागर तक ही खुद को सीमित नहीं रखना चाहती है बल्कि दक्षिण चीन सागर के पार प्रशांत महासागर तक पहुंचने की भी उसकी क्षमता है और समंदर में चीन की दादागीरी नहीं चलेगी।

चार देशों के बीच होने वाला यह अभ्यास पूरे डोमेन बहु-संचालन को मजबूत करेगा। यह अभ्यास सभी चार देशों को एक-दूसरे की नौसेनाओं, कमांडरों और कर्मियों के प्रशिक्षण के स्तर को समझने का बेहतर मौका है। यह अभ्यास अरब सागर क्षेत्र में गश्त करने वाले कम से कम 70 विदेशी युद्धपोतों की भीड़भाड़ वाले वातावरण में होगा।

(हिन्दुस्थान समाचार)

16 November 2020

6:47 PM: TRIFED

6:16 PM: जानिए कौन हैं तारकिशोर प्रसाद सिंह

जानिए कौन हैं तारकिशोर प्रसाद सिंह, जो बन सकते हैं बिहार के उप मुख्‍यमंत्री

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के निष्ठावान कार्यकर्ता और भाजपा के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) से वर्ष 1974 में जिला प्रमुख के रूप में सियासी सफर शुरू करने वाले तारकिशोर प्रसाद सिंह कटिहार सदर विधानसभा सीट से लगातार चौथी बार जीते है। आज उन्होंने नीतीश कुमार के साथ मंत्री पद की शपथ ली और उनके उपमुख्यमंत्री बनने की प्रबल संभावना है।

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय से 12वीं पास तारकिशोर प्रसाद बिहार विधानसभा में सत्तारूढ़ दल के सचेतक भी रहे हैं। राजनीति में अपनी पूर्ण सक्रियता रखने वाले प्रसाद सदा से पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के करीबी रहे हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ पार्टी के कद्दावर नेताओं से भी उनके बेहतर संबंध रहे हैं।

पिछले कार्यकाल में उनके मंत्री बनने की प्रबल संभावना थी लेकिन ऐन मौके पर यह मौका जिले के प्राणपुर विधानसभा के पूर्व विधायक दिवंगत बिनोद कुमार सिंह को मिल गया था।

बाढ़ व कटाव की समस्या से अभिशप्त सीमांचल की उम्मीदें भी इसी के साथ बढ़ऩे लगी हैं। आज नीतीश कुमार के साथ उनके मंत्री पद की शपथ लेते ही कटिहार समेत पूरे सीमांचल में उम्मीद की नई किरण बिखर गई है। खुद कटिहार जिले में अब तक बाढ़, कटाव के साथ विस्थापितों के पुनर्वास की समस्याएं मुंह बांए खड़ी हैं। कृषि आधारित उद्योग की मांग यहां दशकों से होती रही है। इन दोनों समस्याओं को लेकर खुद तारकिशोर प्रसाद भी सदन में आवाज उठाते रहे हैं।

जीवन परिचय

इनका जन्म सहरसा जिले के सलखुआ बाजार में कलवार वैश्य परिवार में पांच जनवरी 1956 को हुआ। अपने व्यवसाय के क्रम में उनके पिता गंगा प्रसाद कटिहार नगर निगम क्षेत्र अवस्थित मिरचाईबाड़ी मोहल्ले में आकर बस गये। 1980 में रेणु प्रसाद के साथ वैवाहिक बंधन में बंधे तारकिशोर प्रसाद सिंह तीन पुत्र तथा एक पुत्री के पिता हैं।

(हिन्दुस्थान समाचार)

4:54 PM: Oath ceremony

4:23 PM: 147th session of WHO Executive Board

2020 has been the year of collaborative action. Mankind was already fighting overwhelming challenges – poverty, hunger, inequality, climate change, pollution, violence, war, disease – and now the Pandemic which has shaken us to the core.

But we came together as the nations of the world because we chose not to be overwhelmed. We choose optimism and struggle to achieve. We choose a better future.

In India, we bless each other as Ayushman Bhava, which means may you have a long and healthy life, that itself is the essence of life and existence that itself is the essence of our organization – WHO– which binds us all together and which is why we are all here today, together

4:00 PM: Air Quality Index

9:46 AM: गंभीर बीमारियों को न्योता देती हैं सर्दियां

बिन बुलाए कई गंभीर बीमारियों को न्योता देती हैं सर्दियां, कहीं आप भी इसकी चपेट में तो नहीं

बदलते मौसम में ठंड जनित बीमारी की संभावना को देखते हुए सावधान और सजग रहने की जरूरत है। ठंड की शुरुआत होते ही लोग ठंड जनित बीमारी वायरल फीवर, सर्दी, खांसी, निमोनिया समेत अन्य ठंड जनित बीमारी से पीड़ित होने लगे हैं। इससे बचाव का एकमात्र सबसे आसान उपाय सतर्कता और सावधानी है। सर्दी के आगमन के साथ वायरल फीवर, सर्दी, खांसी, निमोनिया आदि की समस्या काफी बढ़ जाती है। इसके साथ ही डायबिटीज, बीपी, हर्ट और अस्थमा के मरीजों को भी अधिक सतर्क रहना चाहिए।

धूप और ठंड के कारण दिख रही है लापरवाही

सदर अस्पताल के अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. विरेश्वर प्रसाद ने बताया कि बदलते मौसम में लोगों को स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने की जरूरत है। दरअसल, सुबह-शाम ठंड और दिन में धूप के कारण गर्मी का एहसास होता है। इसी दौरान लापरवाही बरती जाती है और लोगों को ठंड का एक्सपोजर लग जा रहा है, जिससे लोग ठंड जनित बीमारियों से पीड़ित हो जाते हैं। इससे सावधान रहने की जरूरत है।

बच्चे भी हो रहे हैं प्रभावित

बच्चे भी बदलते मौसम से प्रभावित हो रहे हैं, जिस कारण वे वायरल, फीवर, सर्दी, खांसी और निमोनिया से पीड़ित हो रहे हैं। हालांकि, इस बार बच्चों में टाइफाइड और जौंडिस की शिकायतें नहीं के बराबर मिल रही हैं। चिकित्सकों के अनुसार इसका कारण लॉकडाउन के चलते बाहरी खाना नहीं खाना माना जा रहा है। इसलिए, बच्चे के स्वास्थ्य के प्रति भी सजग रहना जरूरी है।

गंभीर बीमारी से ग्रसित मरीज रहें सावधान

इस बदलते मौसम में शुगर, बीपी, हार्ट, अस्थमा के मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। दरअसल, ठंड के मौसम में बीपी और शुगर बढ़ जाता है। इसलिए, ऐसे लोगों को सेहत का खास ध्यान रखना चाहिए। ताकि अनावश्यक परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े।

ख्याल रखें तो रहेंगे संक्रमण से दूर

मुंह, नाक, आंख को अनावश्यक छूने से बचें। दो गज की शारीरिक दूरी का हमेशा पालन करें। मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करें और दूसरों को भी प्रेरित करें। घर से बाहर निकलने पर सैनिटाइजर साथ रखें। भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज तथा बाहरी खाना खाने से बचें।

(हिन्दुस्थान समाचार)

9:33 AM: COVID-19 Testing Update

9:31 AM: COVID-19 Update

9:21 AM: Statue of Peace

9:02 AM: राष्ट्रीय प्रेस दिवस

9:00 AM: फूल गोभी की खेती

फूल गोभी की खेती करने वाले इन बातों का रखें खास खयाल, होगी बंपर कमाई

विटामिन बी की पर्याप्त मात्रा के साथ ही प्रोटीन की मात्रा से भरपूर फूलगोभी की खेती किसानों के लिए भी काफी फायदेमंद है। वैसे तो इसकी खेती साल भर की जा सकती है लेकिन, सितम्बर-अक्टूबर में फूलगोभी की खेती पर्याप्त मात्रा में की जाती है। जिन किसानों की फूलगोभी तैयार होने वाली है। उन्हें इस मौसम में कीड़ों से बचाने के लिए समय-समय पर दवा का छिड़काव करना जरूरी है।

प्रति हेक्टेयर भूमि में गोबर की खाद की मात्रा

इस संबंध में सीमैप के कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजेश वर्मा ने बताया कि फूल गोभी की उपज लेने के लिए पर्याप्त मात्रा में खाद का डालना जरूरी है। इसके लिए एक हेक्टेयर भूमि में 35 से 40 कुन्तल गोबर की सड़ी हुई खाद डालनी चाहिए। एक कुन्तल नीम की सड़ी खाद डालने से जमीन के दुष्प्रभावी कीड़े नष्ट हो जाते हैं। रोपाई के 15 दिनों के बाद वर्मी वाश का प्रयोग करना उपयुक्त होता है।

10 से 15 दिनों के अंतर पर करें सिंचाई

डॉ. राजेश वर्मा ने बताया कि देर वाली फसल में 10 से 15 दिनों के अंतर पर सिंचाई करना चाहिए। खरपतवार के नियंत्रण के लिए निराई गुड़ाई ज्यादा गहराई से नहीं करना चाहिए। उन्होंने से बताया कि कीट नियंत्रण में कटुवा इल्ली के लिए फोरेट 10 जी की 10 किग्रा प्रति हेक्टेयर के हिसाब से प्रयोग करना उपयुक्त होता है। वहीं माहू के लिए मैलाथियान पांच प्रतिशत या कार्बरिल 10 प्रतिशत चुर्ण का 19 से 26 किलो ग्राम प्रति हेक्टयेर का छिड़काव करना उपयुक्त होता है।

हीरक पृष्ठ पतंगा से कैसे बचाएं गोभीवर्गीय सब्जियां

कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि हीरक पृष्ठ पतंगा दुनिया भर की गोभीवर्गीय सब्जियों के लिए अत्यधिक नुकसान पहुंचा रहा है। इसके नियंत्रण के लिए किसानों को डीपेल आठ एल या पादान 50 इ.सी का 1000 मिली की दर से प्रति हेक्टेयर छिड़काव करना चाहिए। थायोडा या स्पाइनोशेड भी इसके लिए उपयुक्त दवा है। तबांकू की इल्ली के लिए किसानों को न्यूक्लियर पालीहाईडोसिस वायरस 250 का छिड़काव करना ठीक होता है। मैलाथियान या स्पाइनेशेड भी उपयुक्त दवा है।

(हिन्दुस्थान समाचार)

15 November 2020

7:40 PM: मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की समीक्षा

केंद्रीय सशक्त पुलिस बलों ने कोरोना लड़ाई में देश और दिल्ली की जनता का बहुत सहयोग किया। मोदी सरकार ने दिल्ली में स्वास्थ्यकर्मियों की कमी को देखते हुए CAPF से अतिरिक्‍त डॉक्टर & पैरा मेडिकल स्टाफ देने का निर्णय किया है, उन्हें शीघ्र ही एयरलिफ्ट करके दिल्ली लाया जायेगा।

गंभीर कोरोना मामलों में प्‍लाज्‍मा डोनेशन और प्रभावित व्यक्तियों को प्‍लाज्‍मा प्रदान किए जाने के लिए प्रोटोकॉल तैयार करने के निर्देश दिए। डॉ. वी के पॉल, निदेशक एम्‍स और महानिदेशक ICMRDELHI के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय समिति इसपर जल्द ही रिपोर्ट देगी।

5:14 PM: पीएम मोदी के संबोधन की पांच बड़ी बातें

जैसलमेर एयरबेस पर पीएम मोदी के संबोधन की पांच बड़ी बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को पाकिस्तान से लगे जैसलमेर (राजस्थान) बॉर्डर की लोंगेवाला चौकी पर देश के जवानों के साथ दिवाली मनाई। इस दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि आप भले ही बर्फीली पहाड़ी पर रहें या फिर रेगिस्तान में लेकिन मेरी दिवाली आपके बीच आकर पूरी होती है। आपके चेहरे की रौनक देखकर मेरी खुशी बढ़ जाती है। मैं देश के उल्लास को आप तक पहुंचाने के लिए आपके बीच मिठाई लेकर आया हूं। यह मिठाई प्रधानमंत्री की तरफ से नहीं बल्कि इस मिठाई में आप देश की हर मां के हाथ की मिठास महसूस कर सकते हैं। जैसलमेर एयरबेस पर पीएम मोदी ने अपने संबोधन के दौरान ऐसी ही पांच बड़ी बातें और कहीं। आइए जानते हैं उनके बारे में…

1. बुरी नज़र डालने वालों को मुंहतोड़ जवाब

पीएम मोदी ने कहा, “आप (भारतीय सेना) सभी अलग-अलग राज्यों की परम्पराएं और वहां की विविधता को समेटे हुए दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य शक्ति में से एक का निर्माण करते हैं। हमारी सेना की ताकत ऐसी है कि जब भी कोई टेढ़ी नज़र हमारी तरफ उठाता है तो उसको उसी भाषा में जवाब देने का ज़ज़्बा आप सब में होता है।”

2. कोरोना संकट के समय सेना की भूमिका अहम

पीएम मोदी ने कहा, “कोरोना संक्रमण के दौरान जब वुहान जाने की चुनौती थी और उसकी भयानकता की अभी तो शुरुआत है, और वुहान में जहां हमारे फंसे भारतीयों को निकालना था तो एयरफोर्स के लोग सबसे पहले आगे आए। कुछ ऐसे देश भी थे जिन्होंने अपने लोगों को वुहान में उनके नसीब पर ही छोड़ दिया था लेकिन भारत ने न सिर्फ अपने हर नागरिक को वहां से निकाला बल्कि कई अन्य देशों की भी हमारे एयर फोर्स के जवानों ने मदद की।”

3. कोरोना काल में कई मिसाइलों का परीक्षण

प्रधानमंत्री ने कहा, “कोरोना काल में वैक्सीन बनाने का प्रयास कर रहे वैज्ञानिकों के साथ ही मिसाइलें बनाने वाले हमारे वैज्ञानिकों ने देश का ध्यान खींचा। इस दौरान निरंतर ख़बरें आती रहीं कि आज इस मिसाइल का परीक्षण किया गया है, आज उस मिसाइल की आधुनिक टैकनॉलॉजी डवलप की गई है। आप कल्पना कर सकते हैं कि बीते कुछ महीनों में ही देश की सामरिक ताकत कितनी ज्यादा बढ़ गई है।”

4. रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो रहा है देश

पीएम मोदी ने कहा, “आज देश में एक तरफ जहां आधुनिक तकनीक, आधुनिक साजो-सामान पर फोकस किया जा रहा है वहीं डिफेंस रिफ़ॉर्म पर भी उतनी ही गंभीरता से काम हो रहा है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के पीछे लक्ष्य यही है कि आधुनिक हथियारों और तकनीक के लिए विदेशों पर निर्भरता कम हो।”

5. इंडिया फ़र्स्ट, इंडियन फ़र्स्ट

प्रधानमंत्री ने कहा, “आत्मनिर्भर भारत अभियान को देश के जन-जन ने अपना अभियान बना लिया है। वोकल फोर लोकल आज हर भारतीय का मिशन बन चुका है। आज इंडिया फ़र्स्ट, इंडियन फ़र्स्ट का आत्मविश्वास चारों तरफ फैल रहा है। ये सब कुछ संभव हो पा रहा है तो उसके पीछे आप (भारतीय सेना) की ताकत है। आप (भारतीय सेना) पर भरोसा है।”

9:29 AM: Birth anniversary of Birsa Munda

9:25 AM: COVID-19

9:21 AM: बिरसा की मुंडा जयंती

9:00 AM: झारखंड दिवस

झारखंड दिवस : देश की अर्थव्यवस्था में जान फूंकने वाला राज्य

15 नवंबर यानी आज झारखंड का स्थापना दिवस मनाया जा रहा है। पूर्वी भारत का यह राज्य बिहार के दक्षिणी हिस्से से निकल कर साल 2000 में आज ही के दिन भारत का 28वां राज्य बना। आज झारखंड 20 साल का हो गया। झारखंड यानी “वन की भूमि”, जो पश्चिम बंगाल, पश्चिम में उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़, उत्तर में बिहार और दक्षिण में ओडिशा के साथ अपनी सीमाओं को साझा करता है। वैसे 15 नवंबर को आदिवासी नेता बिरसा मुंडा की जयंती भी मनायी जाती है। बिरसा मुंडा को यहां भगवान बिरसा के नाम से भी जाना जाता है।

झारखंड के संक्षिप्त इतिहास, कृषि, अर्थव्यवस्था पर एक नजर

भौगोलिक इतिहास

> झारखंड का क्षेत्रफल 79,710 वर्ग किमी (30,778 वर्ग मील) है।

> क्षेत्रफल के हिसाब से 15 वां सबसे बड़ा राज्य है, और जनसंख्या के हिसाब से यह 14 वां।

> भाषा: हिंदी, संथाली, उर्दू, बंगाली और अंग्रेजी

> राजधानी- रांची और उप राजधानी दुमका

> प्रमुख उद्योग: खनन और खनिज उत्खनन, इंजीनियरिंग, लोहा और इस्पात, रसायन, हथकरघा, खाद्य और पेय, मोटर वाहन और सीमेंट

खनिज का भंडार है झारखंड

झारखंड दुनिया के सबसे अमीर खनिज क्षेत्रों में से एक है। झारखंड कोयला (भारत के भंडार का 27.3 प्रतिशत), लौह अयस्क (भारत के भंडार का 26 प्रतिशत), तांबा अयस्क (भारत के भंडार का 18.5 प्रतिशत), यूरेनियम, माइका, बॉक्साइट, ग्रेनाइट, चूना पत्थर चांदी, ग्रेफाइट, मैग्नेटाइट और डोलोमाइट जैसे खनिज संसाधनों से समृद्ध है। झारखंड कोकिंग कोल, यूरेनियम और पाइराइट का उत्पादन करने वाला भारत का एकमात्र राज्य है। कुल लौह अयस्क (हेमेटाइट) के 25.7 प्रतिशत भंडार के साथ, झारखंड राज्यों में दूसरे स्थान पर है।

देश के आर्थिक विकास में अहम योगदान

भारत में, झारखंड आर्थिक विकास के मामले में अग्रणी राज्यों में से एक है। भारत के खनिज और कोयला भंडार का क्रमशः 40 प्रतिशत और 29 प्रतिशत पाया जाता है। इसके बड़े खनिज भंडार के कारण, खनन और खनिज निष्कर्षण राज्य में प्रमुख उद्योग हैं। 2018-19 के दौरान खनिज उत्पादन (ईंधन खनिजों को छोड़कर) का मूल्य 2,510.99 करोड़ रुपये (356.22 मिलियन अमेरिकी डॉलर) रहा। जीएसडीपी 2015-16 और 2018-19 के बीच 7.41 प्रतिशत की वार्षिक वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) पर बढ़ी।

बिहार और झारखंड के लिए अप्रैल 2000 और मार्च 2020 के बीच कुल विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) 119 मिलियन अमेरिकी डॉलर था। राज्य से कुल निर्यात 2018-19 के दौरान 1,640.33 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा। 2019-20 (दिसंबर 2019 तक) के दौरान, राज्य से निर्यात 881.32 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा।

विशिष्ट स्थान पर होने से निवेश के लिए बड़ा आकर्षण

राज्य के उद्योगों को एक विशिष्ट स्थान पर होने का भरपूर लाभ मिलता है, क्योंकि यह पूर्वी भारत के विशाल बाजार के करीब है। यह कोलकाता, हल्दिया और पारादीप के बंदरगाहों के करीब है जो खनिजों के परिवहन में मदद करते हैं। चूंकि झारखंड में देश की खनिज संपदा का लगभग 40 प्रतिशत है, इसलिए इसके व्यापक खनिज संसाधन खनन, धातु और संबंधित क्षेत्रों को विशेष रूप से निवेश के लिए आकर्षक बनाते हैं।

हाल ही हुए परिवर्तन और विकास:

> केंद्र में बीजेपी सरकार आने के बाद राज्य के आदिवासी समुदाय हो या विकास के लिये नई योजनाओं को से जोड़ेने पर विशेष तौर पर ध्यान दिया गया।

> राज्य के बजट 2019-20 के तहत, सरकार ने दो नए छात्रवृत्ति कार्यक्रम मुख्यमंत्री मेधा चतुर्वेदी योजना (MMCY) और मुख्यमंत्री विद्यालक्ष्मी उच्च शिक्षा प्रोत्साहन (MVUSP) की शुरुआत की, जिसमें छात्र राज्य स्तर, जिला स्तर पर और प्रतिस्पर्धी स्तर पर ब्लॉक स्तर पर चुने जाएंगे। परीक्षा 12000 रुपये, 6000 रुपये और 300 रुपये की छात्रवृत्ति दी जाएगी।

> फरवरी 2019 में, झारखंड में तीन मेडिकल कॉलेजों का उद्घाटन किया गया और रामगढ़ जिले में महिला इंजीनियरिंग कॉलेज के लिए आधारशिला रखी गई।

> दिसंबर 2019 तक, IEM की संख्या 25 दर्ज की गई और प्रस्तावित निवेश की राशि 1,159 करोड़ रुपये (165.83 मिलियन अमेरिकी डॉलर) थी।

8:04 AM: बढ़ेगी अर्थव्यवस्था की रफ्तार और रोजगार

विशेषज्ञों को विश्‍वास- बढ़ेगी अर्थव्यवस्था की रफ्तार और रोजगार

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से हाल ही में एक नए राहत पैकेज की घोषणा की गई। पैकेज के तहत 12 नए राहत उपायों की घोषणा की गई है, साथ ही वित्त मंत्री ने बताया कि भारतीय अर्थव्यवस्था काफी तेजी से रिकवर कर रही है। अर्थव्यवस्था की रफ़्तार देने में इन क़दमों की कितनी जरुरत थी और आम आदमी को कहां और किस तरीके से फ़ायदा होगा इन्हीं अहम मुद्दों पर विशेषज्ञों से चर्चा की।

एमएसएमई और रोजगार बढ़ाने पर फोकस

आईसीसी के डायरेक्टर जनरल राजीव सिंह कहते हैं कि कोरोना काल में 6 बड़ी समस्या सामने आई, जिनमें सुरक्षा और स्वास्थ्य, दोबारा नॉर्मल होने की, इंड्रस्ट्री के लिये ट्रांसपोर्टेशन, डिमांड, तरलता और फिर रोजगार। अब सरकार ने इन सब पर अलग-अलग फोकस किया। उसके बाद एक-एक करते सबको सुलझाने की कोशिश और राहत पर फोकस कर रही है। जिसमें सबसे ज्यादा ध्यान एमएसएमई और रोजगार पर है। ऐसे में सरकार ने पहले डिमांड पर ध्यान दिया ताकि उत्पादन बढ़े और लोगों को रोजगार मिलें। इसके अलावा ईपीएफओ के लिये न्यू रजिस्ट्रेशन इसका सबूत हैं कि काम शुरू हो चुका है। इसलिये कह सकते हैं ये एक लंबा रास्ता है, जिससे हर तबके, हर सेक्टर के लोगों को डायरेक्ट या इनडायरेक्ट फायदा होगा, जिससे अर्थव्यवस्था बूस्ट होगी। जहां तक इस तीसरे पैकेज की बाद है उस दिशा में उठाया गया अहम कदम है।

रियल एस्टेट आने वाला है बूम

वहीं रियल एस्टेट के क्षेत्र में जो घोषणाएं की गई है। जिनमें डेवलपर्स और घर खरीदारों को इनकम टैक्स में राहत देने का ऐलान किया। इस फैसले से रियल एस्टेट को बूस्ट-अप और मध्य वर्ग को राहत मिलेगी। इस ऐलान में सर्कल रेट और एग्रीमेंट वैल्यू में मौजूदा अंतर को 10 फीसदी से बढ़ाकर 20 फीसदी करने की घोषणा भी की गई है। साथ ही कंस्ट्रशन और इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर सेक्टर में लगी कंपनियों को कैपिटल और बैंक गारंटी में राहत दी गई है। वित्त मंत्री ने बताया कि परफॉर्मेंस सिक्योरिटी को घटाकर करके तीन फीसदी किया गया है। इससे ठेकेदारों को राहत मिलेगी।

ऐसे में इन ऐलान के बाद रियल एस्टेट में कितना बूम आयेगा क्योंकि जो निर्माणाधीन घर खड़े हैं लेकिन मार्केट में अभी ख़रीदार नहीं आ रहे हैं। इस बारे में राजीव सिंह बताते हैं कि कमर्शियल सेक्टर में एक बार फिर मांग बढ़नी शुरू हो गई है। आने वाले दिनों कई कंपनी आ रही हैं, डेटा सेंटर में इंवेस्टमेंट आ रहा है यानी कई बिलियन स्क्वॉयर फीट जमीन की मांग आने वाली है। सबसे ध्यान देना वाली बात ये है कि जैसे अर्थव्यवस्था सुधरती है, बायर में हौसला बढता है, अभी तक 50-60 प्रतिशत बाजार में मांग शुरू हो चुकी है। जैसे-जैसे मांग बढ़ती है रियल एस्टेट सेक्टर में भी एक पॉजिटिव खबर मिलेगी। ऐसे भी कह सकते हैं रियल एस्टेट सेक्टर एक मल्टीप्लायर सेक्टर है क्योंकि इसमें टाइल्स, ईंट, प्लाईवुड, गिट्टी, बालू, सीमेंट, लोहा, स्टील और कई इंडस्ट्री जुड़ी हैं। जब इन सब क्षेत्र में मांग बढ़ेगी तो रोजगार के साथ ही अर्थव्यवस्था का ग्राफ बढ़ने लगेगा। रियल एस्टेट सेक्टर में ही प्रधानमंत्री आवास योजना, रूरल, अर्बन हाउसिंग की बात है ये सभी रियल एस्टेट सेक्टर के लिये पॉजिटिव संकेत हैं।

मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में ज्यादा उम्मीद

मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र फोकस करने के फायदे के बारे में बताते हुए राजीव सिंह ने कहा कि पिछले कुछ साल पहले इस क्षेत्र पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया। तह सस्ते दामों में आयात करते थे और भारतीय बाजारों में अच्छे फायदे में बेचने का सिलसिला चलता था। लेकिन चार-पांच साल में जो भी स्कीम आई या प्रोडक्शन लिंक इंसेंटिव दिया जाने लगा। पीएलआई स्कीम मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र को काफी फायदा देती है। इसमें नेटवर्किंग, केमिकल बैटरी, टेलीकॉम, टेक्सटाइल ऑटो हैं। इन सभी प्रोडक्ट सेगमेंट में भारत में बहुत अवसर है। सबसे महत्वपूर्ण है रोजगार के अवसर की। इससे फायदा ये भी होगा कि बाह कंपनियां भी निवेश करने के लिये आगे आएंगे, क्योंकि उन्हें पता चलेगा कि कॉर्पोरेट टैक्स कम है, इज ऑफ डूइंग बिज़नेस अच्छा मिलता है। भारत में उत्पाद के लिये खुद एक बड़ा बाजार है। इससे कंपनियां आएंगी और रोजगार बढ़ेगा।

14 November 2020

प्रधानमंत्री मोदी ने लौंगेवाला में जवानों के साथ दीपावली मनाई

प्रधानमंत्री मोदी ने लौंगेवाला में जवानों के साथ दीपावली मनाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को जैसलमेर के लौंगेवाला फारवर्ड पोस्ट पर जवानों के कैंप में जाकर उनके साथ बॉर्डर पर दीपावली मनाई।

इस मौके पर जवानों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मैं आज आपके बीच प्रत्येक भारतवासी की शुभकामनाएं लेकरआया हूं, आपके लिए प्यार लेकर आया हूं, आशीष लेकर आया हूं। मैं आज उन वीर माताओं- बहनों और बच्चों को भी दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं, उनके त्याग को नमन करता हूं जिनके अपने सरहद पर हैं। उन्होंने कहा कि आप भले बर्फीली पहाड़ियों पर रहें या फिर रेगिस्तान में, मेरी दीवाली तो आपके बीच आकर ही पूरी होती है। आपके चेहरों की रौनक देखता हूं, आपके चेहरे की खुशियां देखता हूं, तो मुझे भी दोगुनी खुशी होती है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि लौंगेवाला का ऐतिहासिक युद्ध् भारतीय सैन्यबल के शौर्य का प्रतीक तो है ही, इसके साथ ही तीनों सेना के कोऑर्डिनेशन का भी प्रतीक है। भारत की सैन्य शक्ति के सामने कोई भी आ जाए किसी भी सूरत में टिक नहीं पाएगा। उन्होंने कहा कि लौंगेवाला युद्ध के 50 वर्ष होने जा रहे हैं। इसलिए मेरा मन यहां आने को कर गया। पूरा देश अपने वीरों की वीरगाथा को सुनकर गौरवान्वित हो रहा होगा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हिमालय की बुलंदियां हों, रेगिस्तान का विस्तार हो, घने जंगल हों या फिर समंदर की गहराई हो, हर चुनौती पर हमेशा आपकी वीरता भारी पड़ी है। दुनिया की कोई भी ताकत हमारे वीर जवानों को देश की सीमा की सुरक्षा करने से रोक नहीं सकती है। आपके इसी शौर्य को नमन करते हुए आज भारत के 130 करोड़ देशवासी आपके साथ मजबूती से खड़े हैं।

आज हर भारतवासी को अपने सैनिकों की ताकत और शौर्य पर गर्व है। उन्हें आपकी अजेयता पर, आपकी अपराजेयता पर गर्व है। दुनिया का इतिहास हमें ये बताता है कि केवल वही राष्ट्र सुरक्षित रहे हैं, वही राष्ट्र आगे बढ़े हैं, जिनके भीतर आक्रांताओं का मुकाबला करने की क्षमता थी। आज पूरा विश्व विस्तारवादी ताकतों से परेशान हैं। विस्तारवाद एक तरह से मानसिक विकृति है और 18वीं शताब्दी की सोच को दर्शाती है। इस सोच के खिलाफ भी भारत प्रखर आवाज बन रहा है। हाल ही में हमारी सेनाओं ने निर्णय लिया है कि वो 100 से ज्यादा हथियारों और साजो-सामान को विदेश से नहीं मंगवाएगी। आज दुनिया ये जान रही है, समझ रही है कि ये देश अपने हितों से किसी भी कीमत पर रत्ती भर भी समझौता करने वाला नहीं है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत का ये रुतबा, ये कद आपकी शक्ति और आपके पराक्रम के ही कारण है। आपने देश को सुरक्षित किया हुआ है, इसीलिए आज भारत वैश्विक मंचों पर प्रखरता से अपनी बात रखता है। फैसला सेना ने लिया, लेकिन इस फैसले से 130 करोड़ देशवासियों में ऐसा संदेश गया कि सभी लोकल के लिए वोकल हों। हाल ही के दिनों में स्टार्ट अप आत्मनिर्भरता के मामले में देश को आगे ले जा रहे हैं। आपसे मिली इसी प्रेरणा से देश महामारी के इस कठिन समय में अपने हर नागरिक के जीवन की रक्षा में जुटा हुआ है। इतने महीनों से देश अपने 80 करोड़ नागरिकों के भोजन की व्यवस्था कर रहा है। इसके साथ ही, देश, अर्थव्यवस्था को वापस गति देने का भी पूरे हौसले से प्रयास कर रहा है।

हिन्दुस्थान समाचार

प्रधानमंत्री मोदी ने लौंगेवाला में जवानों के साथ दीपावली मनाई

जानिए दिवाली पर पीएम मोदी ने क्यों चुनी लोंगेवाला पोस्ट

केन्द्रीय सत्ता में आने के बाद शनिवार को सातवां मौका रहा, जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दीपोत्सव का पर्व सरहद पर तैनात जवानों के साथ मनाया है। सातों दफा प्रधानमंत्री मोदी ने सरहद पर सीमाओं के साथ देशवासियों के जान-माल की हिफाजत करने के लिए वहां तैनात जवानों की हौंसला अफजाई की है। साथ ही, जवानों का मुंह मीठा करवाकर उनकी पीठ थपथपाई है। इस साल पीएम मोदी ने जैसलमेर सरहद से लगती पाकिस्तानी सीमा पर बनी लोंगेवाला पोस्ट पर दिवाली मनाकर भारतीय जवानों के हौंसलों की तारीफ की है।

प्रचंड बहुमत के साथ भारतीय जनता पार्टी को केन्द्र की सत्ता में आसीन कराने के बाद प्रधानमंत्री पद पर आसीन हुए नरेन्द्र मोदी वर्ष 2014 में पहली बार दिवाली मनाने सियाचिन पहुंचे थे। यहां उन्होंने सीमाओं की रक्षा कर रहे जवानों के बीच दीपोत्सव का जश्न मनाया था। इसके अगले साल 2015 में वे अमृतसर (पंजाब) बॉर्डर पर दिवाली मनाने पहुंचे थे। वर्ष 2016 में पीएम मोदी ने हिमाचल प्रदेश से लगते चीन बॉर्डर के पास इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस के जवानों के साथ दीपोत्सव पर दीए जलाए थे। साल 2017 में मोदी ने दिवाली का जश्न जम्मू-कश्मीर के गुरेज सेक्टर में सैनिकों के साथ मनाया था।

2018 में प्रधानमंत्री मोदी दिवाली के मौके पर उत्तराखंड में केदारनाथ मंदिर के दर्शन के लिए गए थे। यहां उन्होंने चीन बॉर्डर के पास हरसिल गांव के केंट इलाके में भारतीय सशस्त्र बल और आईटीबीपी के जवानों से मुलाकात की थी। यहां उन्होंने यह कहकर देशवासियों का जीत लिया था कि बर्फीले इलाके में आपका ड्यूटी के लिए समर्पण देश को मजबूती प्रदान करता है। आपके चलते ही सवा सौ करोड़ लोगों के सपने सुरक्षित हैं।

वर्ष 2019 में मोदी जम्मू-कश्मीर के राजौरी में नियंत्रण रेखा पर तैनात जवानों के साथ दिवाली मनाने के लिए पहुंचे थे। यहां भी उन्होंने जवानों की हौंसला अफजाई की। उन्होंने कहा था कि युद्ध हो या घुसपैठ, इस क्षेत्र को सबसे ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन यह जगह हमेशा उन परेशानियों से निकल आती है। यह ऐसा क्षेत्र है, जिसने कभी हार नहीं देखी। इस साल प्रधानमंत्री ने पश्चिमी सीमा पर जैसलमेर के नजदीक लोंगेवाला पोस्ट पर दीपोत्सव के मौके पर भारतीय जवानों की पीठ थपथपाई है।

पश्चिमी सीमा की लोंगेवाला पोस्ट

भारतीय सीमा में जैसलमेर के समीप लोंगेवाला पोस्ट पर 04 से 07 दिसंबर,1971 के बीच 120 भारतीय जवानों ने पाकिस्तान के 2 से 3 हजार सैनिकों को पराजित किया था। पाकिस्तान की आर्टिलरी में 30 से 40 टैंक भी थे।

भारत की जीत के हीरो मेजर कुलदीप सिंह चांदपुरी थे। चार तारीख की रात को सैकेंड लेफ्टिनेंट धरमवीर भान को पेट्रोलिंग के दौरान पाकिस्तान के टैंकों के भारतीय सीमा पर दाखिल होने की आवाज सुनाई दी थी। इस दौरान हुई जंग में भारत ने पाक के 34 टैंक धराशायी किए।

पाक के 200 सैनिक मारे गए और 500 अन्य वाहन नेस्तनाबूत कर दिए गए। इस लड़ाई पर कुछ समय बाद निर्माता-निर्देशक जेपी दत्ता ने बॉर्डर शीर्षक से फिल्म बनाई थी। इसमें सनी देओल ने मेजर कुलदीप का रोल निभाया था। यह फिल्म बॉक्सऑफिस पर सफल फिल्मों में शुमार की गई थी।

(हिन्दुस्थान समाचार)

13 November 2020

9:50 AM- कोरोनाकाल में धनतेरसः

कोरोनाकाल में धनतेरसः सरकार की कोशिशों का परिणाम है बाज़ारों की रौनक

जब कोरोना की वजह से लॉकडाउन हुआ तब जिस तरह से बाज़ारों में सन्नाटा पसरा, उससे लग रहा था कि आने वाले कई महीनों में व्‍यापार जगत ठप रहेगा। लेकिन सरकार के प्रयासों और समय पर लिए गए निर्णयों का परिणाम है कि आज धनतेरस के दिन बाज़ारों में रौनक दिख रही है।

कहते हैं धन की लक्ष्मी मेहरबान हों इसलिए हर कोई पांच दिवसीय दीपावली पर्व पर कुछ खास करना चाहता है। अपने-अपने तरीके से घरों में लक्ष्मी और गणेश की प्रतिष्ठा चाहते हैं। यूं तो हर दीपावली में लोग दिल खोलकर खर्च करते रहे हैं लेकिन इस साल कोरोना के चलते लोगों के हाथ तंग हैं। बैंकिंग सेक्टर और सरकारें भी इसे समझती हैं। इसलिए उन्होंने न केवल बिहार, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में वाहनों की खरीद पर ब्याज दरें घटाई हैं बल्कि केंद्र सरकार की ओर से क्रेडिट कार्ड की अवधि भी बढ़ाई गई है ताकि हाथ तंग होने की वजह से लोग अपनी इच्छाओं का गला न घोंटें।

पटरी पर लौटता कारोबार

इसमें संदेह नहीं कि भारत कोरोना को अपनी जिंदगी का हिस्सा बना चुका है। लॉकडाउन के दौरान वह काम-धंधे से कट जरूर गया था लेकिन हाल के दिनों में देश में कारोबार पटरी पर आने लगा है। धनतेरस पर खरीदारी उसकी बानगी है। धनतेरस के साथ ही पांच दिवसीय दीपावली के पर्व की शुरुआत हो चुकी है। कारोबारियों को इस धनतेरस और दीपावली से काफी अपेक्षाएं हैं। न केवल बाजारों में चहल-पहल बढ़ी है बल्कि कई महीनों से कारोबारी सुस्ती झेल रहे दुकानदारों के चेहरे भी खिले हैं।

सर्राफा बाजार में रौनक

धन-वैभव और सुख समृद्धि के पर्व धनतेरस को इसलिए मनाया जाता है कि इसी दिन धन्वंतरि का प्राकट्य हुआ था। वे स्वर्णिम अमृत कलश लेकर समुद्र से निकले थे। इसीलिए देशभर में आज के दिन सोना-चांदी और बर्तन खरीदने की परंपरा है। देश और प्रदेशों की राजधानियों समेत सभी प्रमुख और छोटे-बड़े शहरों में बर्तन ओर सोने-चांदी की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ इस दावे को झुठला रही है कि कोरोना काल और लॉकडाउन में भारतीय अर्थव्यवस्था पूरी तरह चौपट हो गई है।

देवी-देवताओं की मूर्तियां एवं चित्रों के साथ-साथ घर-आंगन को सजाने के लिए रंग-बिरंगे बल्बों की लड़ियां, लाइटिग स्टैंड, झालर, लटकन तथा मिट्टी के डेकोरेटिव दीपों की जमकर खरीदारी हो रही है। दीपावली और धनतेरस को लेकर पटाखों, मिठाई, बर्तन और सर्राफा बाजार में रौनक दिख रही है।

आसान बनायी वाहनों की खरीदारी

गणेश-लक्ष्मी और कुबेर की मूर्तियां खरीदने लोग बाजारों में पहुंचने लगे हैं। घरेलू उपयोग की वस्तुओं ख़ासकर टेलीविजन, फ्रिज, वाशिंग मशीन समेत अन्य सामानों की खरीद का सिलसिला बना हुआ है। ऑटो कंपनियों की ओर से गाड़ियों की खरीद पर चांदी के सिक्के एवं एलईडी का उपहार देकर ग्राहकों को लुभाने की बेहतरीन योजनाएं हैं। सबसे ज्यादा लोग सोने की गिन्नी और चांदी के सिक्के खरीद रहे हैं। धनतेरस के मौके पर वाहनों की खरीदारी को आसान बनाने के लिए कई पब्लिक सेक्टर बैंकों ने अपने दरवाजे खोल दिए हैं।

केंद्र और राज्य सरकारों ने दिए तोहफे

केंद्र और राज्य सरकारें लोगों और उद्योगों को धनतेरस का तोहफा देने में पीछे नहीं है। कोरोना काल में अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए अगर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने आत्मनिर्भर भारत-3 पैकेज की घोषणा की है, कोरोना काल में जिन लोगों की नौकरियां चली गई हैं, उनके लिए धनतेरस के दिन आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना का एलान सरकार की संवेदनशीलता और आम जन की जरूरतों को समझने का प्रयास है।

मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार ने भी आत्मनिर्भर भारत पैकेज लागू करने का रोडमैप जारी किया है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भी केंद्र की आत्मनिर्भर भारत योजना को मूर्त रूप दे रही है। भाजपा शासित राज्यों में इस अभियान पर गंभीरता से काम चल रहा है। जाहिर है कि यह आम जनमानस, व्यापारियों और कर्मचारियों के लिए किसी दीपावली उपहार से कम नहीं है।

नए पैकेज में 12 नई योजनाएं

बकौल केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतरमन, इस नए पैकेज में 12 योजनाओं की घोषणाएं की गई हैं। इससे अर्थव्यवस्था में व्यापक सुधार होगा, इसकी अपेक्षा की जा सकती है। आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना से नए रोजगारों के सृजन की बात की जा रही है। आत्मनिर्भर भारत के तहत ईसीएलजी स्कीम के तहत 61 लाख लोगों ने लाभ उठाया है और अब इस स्कीम की अवधि 31 मार्च 2021 तक बढ़ायी जा रही है। इसमें 1.52 लाख करोड़ रुपये वितरित किये जा चुके हैं और 2.05 लाख करोड़ रुपये के कर्ज की मंजूरी दी गई है।

उत्‍पादन लिंक्ड प्रोत्साहन की घोषणा

मोबाइल विनिर्माण और इससे जुड़े क्षेत्रों के लिए पहले की उत्पादन लिंक्ड प्रोत्साहन की घोषणा की जा चुकी है और कल 10 प्रमुख क्षेत्रों के लिए 1.45 लाख करोड़ रुपये की पीएलआई की घोषणा की गयी है। धनतेरस से एक दिन पहले ही केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में एडवांस केमिस्ट्री सेल को 18100 करोड़ों रुपए, इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद 5हजार करोड़ रुपए, वाहन उद्योग को 57 हजार 42 करोड़ रुपये, फार्मा औषधि को 15 हजार करोड़ रुपए, दूरसंचार और नेटवर्किंग को 12195 करोड़ रुपये, कपड़ा उद्योग को 10 हजार 683 करोड़ रुपए, खाद्य उत्पाद को 10400 करोड़ रुपए, उच्च क्षमता सौर उत्पाद को 4500 करोड़ रुपए, एसी और एलईडी उत्पाद को 6238 करोड़ रुपए और विशिष्ट इस्पात उत्पादन को 6322 करोड़ रुपए मिलेंगे। इसके अलावा मोबाइल और अन्य उपकरण उत्पाद को 4251 करोड़ रुपए, औषधि तत्व को 6940 करोड़ रुपए और चिकित्सा उपकरण उत्पाद को 3720 करोड़ रुपए दिए जाने की घोषणा की गयी है।

रिक्त पदों पर नियुक्ति

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने धनतेरस के अवसर पर लखनऊ में भगवान धन्वंतरि की प्रतिमा का अनावरण किया और आर्युवेद पर आधारित प्राचीन ग्रंथों की प्रदर्शनी की अवलोकन किया। आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि के जन्मदिन धनतेरस पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 1,438 जूनियर इंजीनियरों को नियुक्ति पत्र देकर उन्हें दीपावली और धनतेरस का शानदार तोहफा दिया है।

मतलब केंद्र और राज्य सरकारों ने भी अपने तईं लोगों को धनतेरस और दीपावली का बेहतर उपहार देने की कोशिश की है। मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और देवताओं के कोषाधिपति कुबेर की कृपा के सभी आकांक्षी हैं लेकिन प्रगति और समृद्धि में प्रतीकात्मकता और शर्टकट के लिए कोई जगह नहीं है। जो सुनियोजित तरीके से नियमित काम करेगा, मां लक्ष्मी का आशीर्वाद पाने का अधिकारी भी वही होगा।

(हिन्दुस्थान समाचार)

9:18 AM- COVID-19 Testing Update:

8:55 AM- Festival of Dhanteras

8:39 AM- Testing Update

8:19 AM- Ayurveda Day

8:01 AM- रिसर्च को बढ़ावा देगी भारतीय रेल

रिसर्च को बढ़ावा देगी भारतीय रेल, लॉन्‍च किए 7 नए कोर्स

रेलवे सेक्टर में भविष्य की जरूरतों को देखते हुए भारतीय रेलवे ने रिसर्च को बढ़ावा देने का फैसला किया है साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट, सिस्टम एवं कम्‍यूनिकेशन इंजीनियरिंग और ट्रांसपोर्ट चेन मैनेजमेंट को बेहतर बनाने और इन क्षेत्रों से जुड़े नए कौशल का विकास करने के उद्देश्‍य से रेलवे ने 7 नए कोर्स शुरू किए हैं। ।

रेलवे बोर्ड के चेयरमैन और सीईओ वीके यादव ने कहा “ट्रांसपोर्ट सिस्टम में रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए हमने अंतरविषय दृष्टिकोण को अपनाया है। इसके जरिए अकादमीशियन, वैज्ञानिक, इंजीनियर और दूसरे विशेषज्ञ एक प्लेटफॉर्म पर आकर आपसी साझेदारी को बढ़ाएंगे।”

सीईओ वीके यादव ने कहा कि इस तरह के पाठ्यक्रम का मकसद राष्ट्र निर्माण, इन्नोवेशन के प्रति प्रतिबद्धता, अकादमिक दक्षता और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी जैसे मूल्यों को स्थापित करना है। इसके जरिए रेलवे में प्रोजेक्ट आधारित शिक्षा को भी बढ़ावा मिलेगा। भारतीय रेलवे इन पाठ्यक्रमों को लागू करने का मुख्य केंद्र होगा। यह पाठ्यक्रम छात्रों के साथ-साथ उसके शिक्षकों को व्यवहारिक अनुभव दिलाने में भी अहम भूमिका निभाएगा।

व्यवहारिक और एप्लीकेशन आधारित पाठ्यक्रम

उन्‍होंने कहा कि इस खासियत के जरिए विश्वविद्यालय को अलग पहचान मिलेगी। जिसमें व्यवहारिक और एप्लीकेशन आधारित दृष्टिकोण को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही जो छात्र यहां से पढ़कर निकलेंगे वह अपने अनुभवों से राष्ट्रनिर्माण में एक अहम योगदान करेंगे।

रेल मंत्रालय के अनुसार, वड़ोदरा स्थित नेशनल रेल एंड ट्रांसपोर्टेशन इंस्टीट्यूट (एनआरटीआई) ने 7 नए पाठ्यक्रम लांच किए हैं। जिसमें स्नातक स्तर के 2 बी.टेक, 2 एमबीए और 3 एमएससी पाठ्यक्रम शामिल हैं, जो रेलवे के प्रमुख क्षेत्रों की मांग पूरा करेंगे। इसी तरह रेल इंफ्रास्ट्रक्टचर, सिस्टम और संचार इंजीनियरिंग के लिए 2 बी.टेक कार्यक्रम लांच किए गए हैं।

एमबीए पाठ्यक्रम

जबकि एमबीए पाठ्यक्रम ट्रांसपोर्टेशन और सप्लाई चेन प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए लांच किए गए हैं। जिनकी आने वाले समय में सबसे ज्यादा मांग होने वाली है। एमएससी, सिस्टम इंजीनियरिंग और इंटीग्रेशन पाठ्यक्रम के लिए प्रतिष्ठित यूनाइटेड किंगडम के बर्मिंघम विश्वविद्यालय से साझेदारी की गई है। इसके जरिए पाठ्यक्रम के छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनुभव मिलेंगे।

भारत में इस तरह के पाठ्यक्रम पहली बार किसी संस्थान में चलाए जाएंगे जो कंटेट के हिसाब से एकदम अलग होंगे। यह पाठ्यक्रम अंतरविषय और एप्लीकेशन आधारित होंगे। इसमें पांच पाठ्यक्रम दो वर्ष की अवधि के हैं। इसमें ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट में एमबीए, सप्लाई चेन प्रबंधन में एमबीए, एमएससी, सिस्टम इंजीनियरिंग और इंटीग्रेशन, ट्रांसपोर्ट तकनीकी और नीति में एमएससी, ट्रांसपोर्ट इंफॉर्मेशन एंड एनॉलिटिक्स में एमएससी शामिल है।

ट्रांसपोर्ट प्रबंधन में एमबीए और ट्रांसपोर्टेशन तकनीकी में बीएससी की अवधि तीन वर्ष की है। रेल इंफ्रास्ट्रक्चर इंजीनियरिंग में बी.टेक और रेल सिस्टम एवं संचार इंजीनियरिंग में बी.टेक चार साल की अवधि के पाठ्यक्रम हैं।

(हिन्दुस्थान समाचार)

10 November 2020

बिहार विधानसभा चुनाव परिणाम, डीडी न्यूज पर देखें महा कवरेज

10:18 AM: Current trends

8:42 AM: Vande Bharat Mission

8:21 AM: India's Active Cases

9 November 2020

2:03 PM : COVID-19 UPDATES: