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22 September 2020

4:04 PM : कोविड की स्थिति पर स्वास्थ्‍य मंत्रालय की प्रेसवार्ता

3:23 PM : Income Support to Farmers

3:23 PM : एक शिक्षक, जिसे इस्पात मंत्रालय ने बनाया ब्रांड एम्बेसडर

एक शिक्षक, जिसे इस्पात मंत्रालय ने बनाया ब्रांड एम्बेसडर

इरादे अगर पक्के हों और मन में कुछ कर गुजरने का जुनून हो तो सबकुछ आसान हो जाता है। मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के एक जुझारू और नेक इरादे वाले शिक्षक नीरज ने इस कहावत को सार्थक कर दिखाया है। नीरज सक्सेना रायसेन जिले के दुर्गम इलाके में बसे बच्चों को जीवन जीने का पाठ सिखा रहे हैं। उनके प्रयासों को पहचान देने के लिए इस्पात मंत्रालय ने उन्हें ब्रांड एम्बेसडर बनाया है।

नीरज बच्चों को केवल किताबी ज्ञान ही नहीं दे रहे हैं, बल्कि लोगों को प्रकृति के साथ जीने का संदेश भी दे रहे हैं। नीरज ने स्कूल के आसपास करीब दो एकड़ भूमि पर स्कूल के बच्चों को वृक्षारोपण की प्रेरणा देकर पर्यावरण बचाने का संदेश भी दिया है। आज उनके पढ़ाए बच्चे हिन्दी भाषा के साथ-साथ अंग्रेजी भाषा भी बखूबी समझ व बोल लेते हैं। एक स्थानीय निवासी ने बताया कि, जब से नीरज यहां के शिक्षक बने हैं, तब से बच्चे भी बड़े ही अच्छे तरीके से पढ़ रहे हैं और हर महीने में करीब 150 तख्ती मैदान में लगा देते हैं, जिनको देखकर बच्चे पढ़ते हैं।

नवोदय में भी मिला बच्चों को प्रवेश

वहीं उनके पढ़ाए कई बच्चों को नवोदय विद्यालय में भी प्रवेश मिला है। कभी इस स्कूल में महज 20 विद्यार्थी बमुश्किल आते थे, लेकिन नीरज की मेहनत से आज स्कूल में 80 से अधिक विद्यार्थी नियमित तौर पर स्कूल आते हैं। नीरज के मजबूत इरादे देश का भविष्य सुंदर करने में यकीनन कामयाब होंगे।

शिक्षक नीरज के प्रयासों से स्कूल को आज पूरे जिले में एक नई पहचान मिली है। उन्हें केन्द्रीय इस्पात मंत्रालय ने अपना ब्रांड एम्बेसडर बनाकर सम्मानित किया है। केन्द्रीय मंत्री फग्गन सिंह पुलस्ते ने भी नीरज के मजबूत हौंसलों की तारीफ की है।

12:13 PM : Covid update

12:09 PM : आईआईटी गुवाहाटी के दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे हैं प्रधानमंत्री

12:05 PM : भारतीय रेल ने तेज गति की 40 क्लोन ट्रेन शुरू किया

10:52 AM : पत्र के एक-एक शब्द ने लोकतंत्र के प्रति हमारी आस्था

9:11 AM : नौ साल की बच्ची ने खेती में रचा इतिहास

नौ साल की बच्ची ने खेती में रचा इतिहास

देश के सुदूर दक्षिण प्रांत में एक नौ साल की बच्ची, जिसकी सोच है दूसरों की मदद करने की। जिसका जज़्बा बहुत बड़ा है। इस बच्ची की सोच है भूखों को भोजन देने की। यह बच्ची बागबानी में मिसाल कायम कर रही है। इतनी कम उम्र में सर्वश्रेष्ठ बाल किसान पुरस्कार से सम्मानित हो चुकी है।

रोज सेबस्टियन, केरल के अल्लापुज़्ज़ा जिले के सीएमएस स्कूल के तीसरी कक्षा की छात्रा हैं। कोविड-19 की महामारी के कारण जब लाॅकडाउन हुआ और स्कूलों को अचानक बंद कर दिया गया तो वह खाली नहीं बैठीं और कुछ रचनात्मक करने की सोंची। 9 साल की रोज ने अपने माता-पिता की मदद से अपने किचन गार्डेन और सब्जियों की खेती करने का फैसला किया। कई हफ्तों की कोशिश के बाद उनकी किचन गार्डेन में बड़ी मात्रा में पत्तियों वाली सब्जियां उगने लगीं। भिंडी पालक, सेम, बैंगन, मिर्च, ककड़ी और लगभग सभी आवश्यक सब्जियां उनके आंगन की शोभा बढ़ाने लगीं।

ग़रीबों को मुफ्त सप्लाई करती है सब्जियां

रोज ने अपनी सब्जियों के लिए बाजार खोजने के बारे में कभी नहीं सोचा क्योंकि उन्होनें खेती शुरू करने से पहले ही तय कर लिया था कि इन सब्जियों का क्या करना है। सब्जियों को पकाने के बाद उन्होनें उसे जरूरतमंद ग़रीब पड़ोसियों तक पहुंचाया जो इस दौरान परेशान थे और फिर यह सिलसिला चल पड़ा। अब, हर दिन वह चार से पांच ग़रीब लोगों में सब्जियों की मुफ्त सप्लाई करती है।

मदद से मिलती है खुशी

प्रसार भारती से बातचीत में रोज़ सेबस्टियन ने कहा, “मुझे पता है कि हमारे करीब सभी साथी कोरोना महामारी से परेशान हैं। उनकी मदद करके मुझे खुशी मिलती है। मेरे माता-पिता और मेरा छोटा भाई एक समृद्ध वनस्पति उद्यान के मेरे सपने को साकार करने में बहुत मदद करते हैं। लाॅकडाउन की अवधि ने मुझे खेती की गतिविधियों में शामिल होने के लिए खूब समय दिया।”

सर्वश्रेष्ठ बाल किसान पुरस्कार से सम्मानित हैं रोज

इतना ही नहीं, रोज सेबस्टियन, अल्लापुज़्ज़ा जिले में सर्वश्रेष्ठ बाल किसान पुरस्कार से सम्मानित भी हैं। रोज पिछले तीन या चार साल से लगातार अपने दोस्तों के साथ सीएमएस स्कूल कम्पाउण्ड में खेती की बारीकियां सीख रही थीं। मुश्किल समय में कोई भूखा न रहे, इस सोच के साथ वो लम्बे समय से इस पंचायत वार्ड से जुड़े कुछ गरीब परिवारों तक मुफ्त में सब्जियां पहुंचा रही हैं।

खाद या कीटनाशक में नहीं करते रसायन का इस्तेमाल

रोज सेबस्टियन के अभिभावक ने बताया कि जब भी उसे बड़े होने में मदद की जरूरत होती है, तो मैने उसकी खेती की गतिविधियों में मदद की। आमतौर पर, पौधों में पानी देने के लिए एक प्लास्टिक कंटेनर में पानी डालता हूं। बच्चे सुबह-शाम पौधों को पानी देते हैं। मेरे बच्चे मग में पानी लेते हैं और पौधों पर डालते हैं। मेरे बच्चे किसी भी रसायन का इस्तेमाल खाद या कीटनाशक के रूप में नहीं करते हैं। वे बगीचे का प्रबंधन करते हैं। हम अपने बच्चों को खाली समय का सदुपयोग करने और जरूरतमंदों की मदद करने से बहुत खुश हैं।

नन्हीं रोज और उनका भाई उन लोगों के लिए एक उदाहरण बने हैं, जो आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। ताकि, सभी लोग सब्जियों और खाद्य फसलों के उत्पादन में आत्मनिर्भर बन सकें।

9:01 AM : World Rhino Day

8:44 AM : India Fights Corona

8:32 AM : Direct cargo ferry service between India and Maldives

During its maiden voyage, a vessel with a capacity of 200 TEU and 3000 MT of break bulk cargo will sail from Tuticorin to Kochi today, from where it will proceed to Kulhudhuffushi port in North Maldives and then to Male port.

“This service is another milestone in the comprehensive bilateral relations between India and Maldives,” says Shipping Minister

7:01 AM : ऐतिहासिक

नौसेना के जंगी जहाज पर दो महिला अधिकारियों की तैनाती

भारतीय नौसेना के इतिहास में पहली बार दो महिला अधिकारियों को जंगी जहाज पर महत्‍वपूर्ण तैनाती दी गई है। हेलिकॉप्‍टर स्‍ट्रीम में सब लेफ्टिनेंट कुमुदिनी त्‍यागी और सब लेफ्टिनेंट रीति सिंह को ‘ऑब्‍जर्वर्स’ (एयरबोर्न टैक्‍टीशियंस) के रूप में शामिल किया गया है। युद्धपोतों से संचालित होने वाले हवाई लड़ाकू विमानों के एयरबोर्न टैक्‍टीशियंस का यह पहला महिला बैच है, जो जंगी जहाजों के डेक से काम करेगा। नौसेना ने इन दोनों महिला अधिकारियों का चयन 17 ऑफिसर्स के बीच से किया है।

‘विंग्स’ से सम्मानित की गईं महिला ‘आब्जर्वर’

सब लेफ्टिनेंट कुमुदिनी त्यागी और रीति सिंह भारतीय नौसेना के उस 17 अधिकारियों के एक समूह का हिस्सा हैं, जिन्हें आईएनएस गरुड़, कोच्चि में आयोजित एक समारोह में ‘ऑब्जर्वर’ के रूप में स्नातक होने पर ‘विंग्स’ से सम्मानित किया गया। दोनों ‘ऑब्‍जर्वर्स’ को एयर नेविगेशन, फ्लाइंग प्रोसीजर्स, हवाई युद्ध के दौरान की आजमाई जाने वाली तरकीबों, एंटी-सबमरीन वारफेयर के अलावा एवियॉनिक सिस्‍टम्‍स की भी ट्रेनिंग दी गई है। अब तक महिलाओं की तैनाती विंग एयरक्राफ्ट तक ही सीमित थी, जो समुद्रतटों के पास ही टेकऑफ और लैंड करते थे।

पुरस्कृत किये गए अधिकारी

समारोह में रियर एडमिरल एंटनी जॉर्ज ने इस ग्रुप में शामिल चार महिला अधिकारियों और भारतीय तटरक्षक बल के 13 स्नातक अधिकारियों को पुरस्कार और प्रतिष्ठित ‘विंग्स’ भेंट किए। इसके अलावा मुख्य अतिथि ने छह अन्य अधिकारियों को ‘इंस्ट्रक्टर बैज’ से सम्मानित किया। इसमें एक महिला समेत नौसेना के पांच और भारतीय तटरक्षक बल से एक अधिकारी हैं, जिन्होंने नेविगेशन प्रशिक्षक (क्यूएनआई) के रूप में सफलतापूर्वक स्नातक किया है।

अग्रिम पंक्ति में महिलाओं का मार्ग होगा प्रशस्त

इस मौके पर मुख्य कर्मचारी अधिकारी (प्रशिक्षण) रियर एडमिरल एंटनी जॉर्ज ने कहा कि, ‘यह बड़ा खास मौका है, जब पहली बार महिलाएं हेलिकॉप्‍टर ऑपरेशंस में प्रशिक्षित होकर जंगी जहाजों पर तैनात होने जा रही हैं। इससे आगे भी अग्रिम पंक्ति में महिलाओं की तैनाती का मार्ग प्रशस्त होगा।’ उन्होने कहा कि ये अधिकारी भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल के समुद्री टोही और पनडुब्बी रोधी युद्धक विमानों की सेवा करेंगे।

यह भी हुए सम्मानित

इसके अलावा लेफ्टिनेंट हितेश सिंह को उत्तर प्रदेश ट्रॉफी से सम्मानित किया गया। उन्हें सब लेफ्टिनेंट आरवी कुंटे मेमोरियल बुक प्राइज से भी सम्मानित किया गया, जिन्हें ‘बेस्ट इन ग्राउंड सब्जेक्ट’ चुना गया। लेफ्टिनेंट अनुज कुमार को फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, पूर्वी नौसेना कमान ट्रॉफी से सम्मानित किया गया, जिन्हें ‘बेस्ट इन फ्लाइंग’ घोषित किया गया। 22वें एसएससी ऑब्जर्वर कोर्स से करिश्मा आर को ‘ओवरऑल मेरिट’ में उच्च प्रदर्शन के लिए पुस्तक पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

(हिन्दुस्थान समाचार)

21 September 2020

4:01 PM : रेलवे ऑटोमोबाइल के परिवहन का एक पसंदीदा साधन

3:45 PM : अध्यादेश से किसानों को मिला एक देश-एक बाजार

अध्यादेश से किसानों को मिला एक देश-एक बाजार

केन्द्र सरकार ने हाल ही में किसानों के हित में कई बड़े फैसले लिए हैं। कृषि विधेयकों के राज्यसभा में पारित होने के बाद देश के किसानों को नई मजबूती मिली है। कृषि क्षेत्र में बड़े सुधार अध्यादेश के माध्यम से लाए गये हैं। नये कानूनों के अनुसार किसान अब अपनी उपज को कभी भी, कहीं भी बेंच सकेगा। साथ ही काॅन्ट्रैक्ट फाॅर्मिंग को भी कानूनी दर्जा मिल गया है। इससे किसान की तकदीर और तस्वीर दोनों बदलेगी। इससे जुड़े दो विधेयक लोकसभा में पारित हो चुके हैं।

कोरोना काल में किसानों द्वारा की गई मेहनत और केन्द्र सरकार के किसान हितैषी विजन पर नज़र डालना जरूरी है। केन्द्र सरकार के सशक्त प्रयासों से देश में गांव, गरीब और किसानों के लिए कई योजनाएं और नीतियां बनाकर अन्नदाता को मजबूत बनाकर कोरोना काल को अवसर काल में तब्दील करने का काम हुआ। सरकार की सकारात्मक पहल और किसानों की मेहनत के चलते कोरोना महामारी के इस काल में पूरी दुनिया में जहां परेशानी हुई, वहीं देश में कृषि क्षेत्र की उन्नति और किसानों की समृद्धि के लिए यह ऊषा काल साबित हुआ है।

एक देश-एक बाजार का सपना पूरा

केन्द्र सरकार ने अपने किसान हितैषी विजन को रेखांकित कर कई अध्यादेशों के माध्यम से महत्वपूर्ण नीतिगत सुधारों को अमली जामा पहनाया है। किसान अब बिना किसी रोक-टोक देश भर में कहीं भी अपनी उपज बेंच सकते हैं। अब किसानों को अपनी मर्जी से फसल बेंचने की आजादी मिली और कृषि उत्पादों के लिए एक देश-एक बाजार का सपना पूरा हुआ है।

सरकार के फैसले पर किसानों ने लगाई मुहर

एक किसान ने कहा, “केन्द्र सरकार ने किसानों के हित में एक कानून बनाया है। जहां भी हमें उचित दाम मिले, हम अपनी फसल का उत्पाद देश में कहीं भी जाकर बेच सकते हैं। उसका हम बहुत स्वागत करते हैं। इस चीज की मांग हम काफी समय से करते चले आ रहे थे। यदि हम दिल्ली या अन्य किसी प्रांत में जाते थे तो हमें परेशान किया जाता था। रास्ते में रोक लिया जाता था। यह हमारे हित में है। हम इसका पूर्णतया स्वागत करते हैं।”

फसलों का मिलेगा बेहतर दाम

इन फैसलों से किसान और कोराबारी दोनों को फायदा मिला है क्योंकि नये कानून के लागू होने के बाद ए.पी.एम.सी का एकाधिकार समाप्त हो गया है। ए.पी.एम.सी मार्केट यार्ड के बाहर कृषि जींस की खरीद-बिक्री पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। इससे बाजार में स्पर्धा बढ़ेगी। कृषि बाजार में स्पर्धा बढ़ने से किसानों को उनकी फसलों को बेहतर और लाभकारी दाम मिलेगा।

ई-लाइसेन्स से कहीं भी हो सकती खरीद

किसानों का कहना है कि इससे उनको बहुत ज्यादा लाभ हो रहा है क्योंकि दूसरे राज्यों में जो मण्डी शुल्क लगता था, वह समाप्त कर दिया गया था। हमारी आने वाली पीढ़ी का ध्यान रखा गया है। सरकार ने एकल प्रणाली की है।’ ई-लाइसेन्स के आधार पर हम लोग कहीं भी मण्डी में खरीद कर सकते हैं। पहले, हर मण्डी पर पृथक-पृथक लाइसेन्स लेना पडता था। ई-अनुज्ञप्ति के अनुसार, हम लोग कहीं भी खरीद सकते हैं। किसानों को फायदा हो सकता है कि नीलामी में भाग ले सकते हैं। एक अन्य किसान ने जोर देकर कहा कि, ‘अब रास्ते की परेशानियां भी समाप्त हो गई हैं। हम लोग कहीं भी फसल बेंच सकते हैं। अब यह खुला व्यापार है। अब देश में कहीं भी ले जाकर, किसी भी मण्डी में बेंच सकते हैं।

लाॅकडाउन में भी सरकार ने किसानों को दी छूट

महामारी के संकट के दौर में देश के करीब 1.30 अरब आबादी को खाने-पीने की चीजों समेत रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में कृषि एवं सम्बन्ध क्षेत्र की अहमियत शिद्दत से महसूस की गई। यही वजह थी कि कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम को लेकर जब देशव्यापी लाॅकडाउन किया गया, तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में केन्द्र सरकार ने कृषि व सम्बन्ध क्षेत्रों को इस दौरान भी छूट देने में देर नहीं की। फसलों की कटाई, बुआई समेत किसानों के तमाम कार्य निर्बाध चलते रहे। जिससे, किसानों ने न केवल अपनी फसल की कटाई की, बल्कि अन्य कार्य भी बिना किसी अवरोध के पूरे किए।

3:13 PM : “Observers” (Airborne Tacticians)

2:59 PM : RCS-UDAN flight took off

2:33 PM : आज बिहार की विकास यात्रा का एक और अहम दिन

2:01 PM : 5,000 visitors allowed in a day to Taj

Uttar Pradesh: Many historical monuments including world famous Taj Mahal in Agra reopens for general public after gap of more than 6 months. Adhering to COVID guidelines, not more than 5,000 visitors are allowed in a day to the Taj.

1:55 PM : Shikara Race

1:44 PM : ऊंचे मूल्यों पर बेचने का मौका

1:23 PM : पीएम के संबोधन की झलकियां

बीते 5 साल में जितनी सरकारी खरीद हुई है और 2014 से पहले के 5 साल में जितनी सरकारी खरीद हुई है, उसके आंकड़े इसकी गवाही देते हैं। मैं अगर दलहन और तिलहन की ही बात करूं तो पहले की तुलना में, दलहन और तिलहन की सरकारी खरीद करीब 24 गुणा अधिक की गई है: PM

इस साल कोरोना संक्रमण के दौरान भी रबी सीज़न में किसानों से गेहूं की रिकॉर्ड खरीद की गई है। इस साल रबी में गेहूं, धान, दलहन और तिलहन को मिलाकर, किसानों को 1 लाख 13 हजार करोड़ रुपए MSP पर दिया गया है। ये राशि भी पिछले साल के मुकाबले 30 प्रतिशत से ज्यादा है: PM

हमारे देश में अब तक उपज बिक्री की जो व्यवस्था चली आ रही थी, जो कानून थे, उसने किसानों के हाथ-पांव बांधे हुए थे। इन कानूनों की आड़ में देश में ऐसे ताकतवर गिरोह पैदा हो गए थे जो किसानों की मजबूरी का फायदा उठा रहे थे। आखिर ये कब तक चलता रहता?: PM

नए कृषि सुधारों ने देश के हर किसान को आजादी दे दी है कि वो किसी को भी, कहीं पर भी अपनी फसल, अपने फल-सब्जियां बेच सकता है। अब उसे अगर मंडी में ज्यादा लाभ मिलेगा, तो वहां अपनी फसल बेचेगा। मंडी के अलावा कहीं और से ज्यादा लाभ मिल रहा होगा, तो वहां बेचने पर भी मनाही नहीं होगी: PM

मैं यहां स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि ये कानून, ये बदलाव कृषि मंडियों के खिलाफ नहीं हैं। कृषि मंडियों में जैसे काम पहले होता था, वैसे ही अब भी होगा। बल्कि ये हमारी ही एनडीए सरकार है जिसने देश की कृषि मंडियों को आधुनिक बनाने के लिए निरंतर काम किया है: PM

12:11 PM : PM Modi lays foundation stone of nine highway projects in Bihar

11:34 AM : COVID-19 Update:

10:41 AM : Corona Virus Updates:

20 September 2020

4:22 PM : सौभाग्य योजना

सौभाग्य: देश में बिजली से दो वर्ष में जगमगाए 2.63 करोड़ घर

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा देश के प्रत्येक घर में ऊर्जा पहुंचाने के उद्देश्य से चलाई गई सौभाग्य योजना के तहत 2.63 घरों को विद्युतीकृत किया जा चुका है। विद्युत और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री आर. के. सिंह ने लोकसभा में सांसद उत्तम रेड्डी द्वारा पूछे गए प्रश्न के उत्तर में इस बात की जानकारी दी।

अक्टूबर 2017 में शुरू हुई थी ‘सौभाग्य’ योजना

विद्युत और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री सिंह ने बताया कि भारत सरकार ने सार्वभौमिक घरेलू विद्युतीकरण प्राप्त करने के लिए पूरे देश के ग्रामीण क्षेत्रों के सभी परिवारों तथा शहरी क्षेत्रों में सभी गरीब परिवारों के लिए अंतिम छोर कनेक्टिविटी तथा विद्युत कनेक्शन प्रदान करने के उद्देश्य से अक्तूबर, 2017 में प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना-‘सौभाग्य’ शुरू की। सभी राज्यों ने सौभाग्य पोर्टल पर घोषणा की कि विगत 31 मार्च 2019 तक की स्थिति के अनुसार, छत्तीसगढ़ के वामपंथ उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में 18,734 घरों को छोड़कर सभी इच्छुक गैर-विद्युतीकृत घरों को विद्युतीकृत कर दिया गया है। देश भर में सौभाग्य स्कीम की शुरूआत यानी 2017 से लेकर 31 मार्च 2019 तक 2.63 करोड़ घर विद्युतीकृत किए गए। ऐसे विद्युतीकृत घरों की राज्य-वार सूची अनुबंध-1 में दी गई है।

अगस्त 2020 तक 15.65 घर हुए विद्युतीकृत

उन्होनें आगे बताया कि, इसके बाद, सात राज्यों ने 31 मार्च 2019 से पहले चिह्नित 19.09 लाख गैर-विद्युतीकृत घरों की सूचना दी है, जोकि पहले इच्छुक नहीं थे, परंतु बाद में कनेक्शन प्राप्त करने के लिए तैयार हो गए थे। राज्यों से इन घरों को सौभाग्य स्कीम के अंतर्गत विद्युतीकृत करने के लिए कहा गया है। इनमें से 31 अगस्त 2020 तक 15.65 लाख घरों को विद्युतीकृत कर दिया गया है। ऐसे विद्युतीकृत घरों की राज्य-वार सूची अनुबंध-2 में दी गई है।

गांवों में भी 24 घंटे, सातों दिन बिजली आपूर्ति के लिए प्रतिबद्ध

मंत्री श्री सिंह ने लोकसभा में जानकारी देते हुए कहा कि, सभी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों ने अप्रैल, 2019 से सभी घरों, औद्योगिक एवं वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को 24 घंटे और सातों दिन और राज्य नीति के अनुसार कृषि उपभोक्ताओं को पर्याप्त विद्युत आपूर्ति करने के लिए भारत सरकार के साथ ‘सभी को 24 घंटे सातों दिन’ विद्युत दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए हैं। भारत सरकार दीन दयाल ग्राम ज्योति योजना (डीडीयूजीजेवाई), एकीकृत विद्युत विकास स्कीम (आईपीडीएस), प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना – सौभाग्य और उज्ज्वल डिस्कॉम एश्योरेंश योजना (उदय) सहित अपनी विभिन्न स्कीमों के माध्यम से विद्युत तक पहुंच प्रदान करने के लिए राज्यों के प्रयासों को सहयोग प्रदान करती है। राज्य सरकारों द्वारा दी गई सूचना के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति के राज्य-वार औसत घंटे अनुबंध-3 में दिए गए हैं।

4:10 PM : Swachhta Pakhwara

3:58 PM : COVID-19 से स्वस्थ होने के मामले में भारत, अमरीका से आगे

3:34 PM : कोरोना जागरूकता

शोध में आया सामने O+ पर कोरोना का कम होता है संक्रमण

कोरोना वायरस को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह के दावे किये जा रहे हैं। इनमें से अलग-अलग ब्लड ग्रुप में कोरोना के संक्रमण और सीवियरटी पर अलग-अलग दावे किये जा रहे हैं। लेकिन इन तमाम दावे के बीच ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों का एक शोध सामने आया है। तो वहीं अमेरिकी के सीडीसी के निदेशक ने कोरोना से बचने के लिये मास्क को वैक्सीन से भी प्रभावी बताया है। ऐसे ही तमाम महत्वपूर्ण पहलूओं पर लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज की डॉ. अपर्णा अग्रवाल से खास चर्चा की।

O+ लोगों में वायरस का कम होता है संक्रमण

सबसे पहले ऑस्ट्रेलिया में हुए शोध पर उन्होंने कहा कि करीब 10 लाख लोगों के डीएनए पर शोध हुआ है। उन्होंने पाया कि O+ ब्लड ग्रुप वालों पर वायरस का असर कम होता है। इससे पहले हार्वर्ड से भी रिपोर्ट आयी थी, लेकिन उसमें कहा गया था कि O+ वाले लोग कोरोना पॉजिटिव कम हैं, लेकिन सीवियरिटी और डेथ रेट में बाकियों की तुलना में कोई फर्क नहीं है। अभी और देशों में हुए रिसर्च की रिपोर्ट आने पर ही कुछ कह सकते हैं। फिलहाल लोगों को इससे यह नहीं मानना है कि उन्हें संक्रमण नहीं होगा।

यंग लोगों में हार्ट पर भी कोरोना का असर

इस दौरान एक शोध में समाने आया है कि कुछ लोगों में कोरोना से संक्रमित हो रहे हैं तो उनके हार्ट ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। इस पर उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस सबसे ज्यादा फेफड़े को प्रभावित करता है, लेकिन अब ये भी पाया गया है कि वह हार्ट को भी प्रभावित करता है। यंग लोगों की मृत्यु तभी होती है जब उनके हार्ट पर वायरस का असर ज्यादा होता है। उन्हें सांस लेने में ज्यादा परेशानी होती है। कोविड मरीज जब ठीक हो जाते हैं तो उसके बाद भी उनके हार्ट में कुछ समस्या आ सकती है। हृदय पर असर कोरोना के दौरान या फिर बाद में भी हो सकता है।

वैक्सीन से 70% और मास्क से 80-85% तक सुरक्षा

जब तक करोना की दवा नहीं आयी है तब तक लोगों को मास्क का प्रयोग करने की सालाह दी जा रही है। मास्क को ही लेकर सीडीसी, अमेरिका के निदेशक ने कहा कि मास्क वैक्सीन से भी ज्यादा प्रभावी। इस बारे में डॉ अपर्णा कहती हैं कि अमेरिका के सीडीसी के निदेशक रॉबर्ट रेडफील्ड ने यह बात पूरी दुनिया में मास्क पर हुए बहुत सारे अध्‍ययनों के आधार पर कही है। अगर कोई आमने-सामने बैठे हुए हैं और मास्क लगाये हैं, सुरक्षित दूरी बनाये हैं, तो सुरक्षा कई गुना बढ़ जाती है। लेकिन जरूरी है कि मास्क सही से लगाया हो, मुंह और नाक अच्छी तरह से ढका हुआ है। वैक्सीन की बात करें तो उन पर कई ट्रायल चल रहे हैं। वायरस से प्रोटेक्शन के लिये एंटीबॉडी होते हैं, जो वैक्सीन देने के बाद लोगों के शरीर में करीब 70 प्रतिशत ही बन पाते हैं, जबकि मास्क से 80-85 प्रतिशत तक सुरक्षा मिलती है।

2:42 PM : Rajya Sabha passes The Farmers bills

1:59 PM : President Kovind addressed a Conference

Our nation has an unprecedented demographic dividend but it can be realized only if the young people constituting a substantial segment of the population become skilled, professionally competent, and above all educated in the real sense: President Ram Nath Kovind

I firmly believe that education is the biggest catalyst for change and the youth is the most potent agent of social transformation. And whenever these two forces have come together, it has changed the course of history: President Ram Nath Kovind

1:17 PM : किसानों की आमदनी को दोगुनी करने का लक्ष्‍य

देश में कृषि का क्षेत्र बहुत व्यापक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों की आमदनी को दोगुनी करने की बात कही है: कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर

12:45 PM : Conference organised by Jammu University

11:15 AM : कोविड से जुड़े सवाल

10:15 AM : COVID-19 Testing Update.

19 September 2020

7:08 PM : देश में रिकवरी रेट 80%

देश में रिकवरी रेट 80%, कोरोना से ठीक होने वाले लोगों की संख्या अमेरिका से अधिक

भारत में कोरोना से ठीक होने वाले लोगों की संख्या अमेरिका से भी ज्यादा हो गई है। पिछले 24 घंटों में देश में में 95,880 लोग स्वस्थ हुए। इसके साथ ही देश में स्वस्थ होने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 42 लाख 8 हजार से भी अधिक हो गई है जबकि अमेरिका में कोरोना से ठीक होने वाले मरीजों की संख्या 42 लाख से कम है। अमेरिका में कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या 6,925,941 हो गई है, जबकि वहां 203,171 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक देश में संक्रमण से स्वस्थ होने की दर करीब 80% हो गई है। संक्रमण से मृत्यु दर घटकर 1.61 प्रतिशत रह गई है। अब भारत में दुनिया भर में संक्रमण से स्वस्थ हुए लोगों की करीब 19% संख्य़ा है। मंत्रालय के अनुसार केंद्र सरकार के नेतृत्व में आक्रामक तरीके से जांच करके रोगियों की जल्दी पहचान करने के केंद्रित, क्रमबद्ध और प्रभावी उपायों, त्वरित निगरानी और मानकीकृत उच्च गुणवत्ता पूर्ण क्लीनिकल देखभाल के कारण इस वैश्विक उपलब्धि को हासिल किया जा सका है।

5:59 PM : अमरीका में चीन के टिक-टॉक और वी-चैट ऐप पर प्रतिबंध

5:01 PM : सौभाग्य योजना :

सौभाग्य: देश में बिजली से दो वर्ष में जगमगाए 2.63 करोड़ घर

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा देश के प्रत्येक घर में ऊर्जा पहुंचाने के उद्देश्य से चलाई गई सौभाग्य योजना के तहत 2.63 घरों को विद्युतीकृत किया जा चुका है। विद्युत और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री आर. के. सिंह ने लोकसभा में सांसद उत्तम रेड्डी द्वारा पूछे गए प्रश्न के उत्तर में इस बात की जानकारी दी।

अक्टूबर 2017 में शुरू हुई थी ‘सौभाग्य’ योजना

विद्युत और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री सिंह ने बताया कि भारत सरकार ने सार्वभौमिक घरेलू विद्युतीकरण प्राप्त करने के लिए पूरे देश के ग्रामीण क्षेत्रों के सभी परिवारों तथा शहरी क्षेत्रों में सभी गरीब परिवारों के लिए अंतिम छोर कनेक्टिविटी तथा विद्युत कनेक्शन प्रदान करने के उद्देश्य से अक्तूबर, 2017 में प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना-‘सौभाग्य’ शुरू की। सभी राज्यों ने सौभाग्य पोर्टल पर घोषणा की कि विगत 31 मार्च 2019 तक की स्थिति के अनुसार, छत्तीसगढ़ के वामपंथ उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में 18,734 घरों को छोड़कर सभी इच्छुक गैर-विद्युतीकृत घरों को विद्युतीकृत कर दिया गया है। देश भर में सौभाग्य स्कीम की शुरूआत यानी 2017 से लेकर 31 मार्च 2019 तक 2.63 करोड़ घर विद्युतीकृत किए गए। ऐसे विद्युतीकृत घरों की राज्य-वार सूची अनुबंध-1 में दी गई है।

अगस्त 2020 तक 15.65 घर हुए विद्युतीकृत

उन्होनें आगे बताया कि, इसके बाद, सात राज्यों ने 31 मार्च 2019 से पहले चिह्नित 19.09 लाख गैर-विद्युतीकृत घरों की सूचना दी है, जोकि पहले इच्छुक नहीं थे, परंतु बाद में कनेक्शन प्राप्त करने के लिए तैयार हो गए थे। राज्यों से इन घरों को सौभाग्य स्कीम के अंतर्गत विद्युतीकृत करने के लिए कहा गया है। इनमें से 31 अगस्त 2020 तक 15.65 लाख घरों को विद्युतीकृत कर दिया गया है। ऐसे विद्युतीकृत घरों की राज्य-वार सूची अनुबंध-2 में दी गई है।

गांवों में भी 24 घंटे, सातों दिन बिजली आपूर्ति के लिए प्रतिबद्ध

मंत्री श्री सिंह ने लोकसभा में जानकारी देते हुए कहा कि, सभी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों ने अप्रैल, 2019 से सभी घरों, औद्योगिक एवं वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को 24 घंटे और सातों दिन और राज्य नीति के अनुसार कृषि उपभोक्ताओं को पर्याप्त विद्युत आपूर्ति करने के लिए भारत सरकार के साथ ‘सभी को 24 घंटे सातों दिन’ विद्युत दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए हैं। भारत सरकार दीन दयाल ग्राम ज्योति योजना (डीडीयूजीजेवाई), एकीकृत विद्युत विकास स्कीम (आईपीडीएस), प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना – सौभाग्य और उज्ज्वल डिस्कॉम एश्योरेंश योजना (उदय) सहित अपनी विभिन्न स्कीमों के माध्यम से विद्युत तक पहुंच प्रदान करने के लिए राज्यों के प्रयासों को सहयोग प्रदान करती है। राज्य सरकारों द्वारा दी गई सूचना के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति के राज्य-वार औसत घंटे अनुबंध-3 में दिए गए हैं।

4:23 PM : Minister introduces three bills

2:34 PM : अध्यापकों की भर्ती

वर्तमान सरकार ने पारदर्शी एवं निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया को अपनाते हुए अब तक 3 लाख से अधिक अभ्यर्थियों को नौकरियां दी हैं।इस कार्य को पूरी तेजी से आगे बढ़ाते हुए आगामी समय में भी पारदर्शितापूर्ण और निष्पक्ष ढंग से भर्ती प्रक्रिया को संचालित किया जाए : मुख्यमंत्री

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिए निर्देश, 31,661 सहायक अध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया एक सप्ताह में करें पूरी : मुख्यमंत्री

2:09 PM : Atal Tunnel

11:08 AM : NEP to overhaul sports in the country

NEP to overhaul sports in the country

The National Education Policy 2020 aims to integrate the sports with the education which will not only promote the overall sports scenario in the country but also help in making Indians more fitter and healthier tells G Rajaraman, Sports Expert.

He tells “It is the right step in the right direction. Sports need to be integrated with education. Remember a time when sports ministry did not existed and was part of the education ministry. As now the reintegration has happened which makes sports an integral part of the education. We used to see sports as very different to education. Sports teaches us the lessons of win and loose similarly as life teaches us success and failures.”

He notes that “it has been a long time demand from the people who wanted to play sports to have education at the same time but professional sports what it is we moved away from hardcore education and sports were separated. A time has come when people should realize that sports and education cannot be separated.”

He points out that “even a cursory reading of the National Education Policy 2020 will give you an idea that it envisages a multidisciplinary and holistic education which has come here to stay. It is important that sports should not be seen any different from any other stream of education. From my understanding it is going to be interesting that if a student is interested in sports then he can pursue education in it and therefore a career in it.”

According to him, “the NEP has empowered the students to choose their careers; if somebody wants to play the sports and excel in that then the National Education Policy allows that to happen it do not see them differently from others who are following other form of education which is typically science or social science.”

He highlights that “it is important that society should embrace the new development and should accept the sports as very essential part of the life. The Prime Minister had also launched the fit India movement. There is a greater realization that India’s health need to be taken care of. Sports is the best way to remain fit. The schemes such as fit India and khelo India finds resonance in the National Education Policy.”

The NEP ensures that all the children benefit from the focus on balanced and all-round development from an early age. By eliminating the rigid separation between curricular and extra-curricular activities, the NEP acknowledges sports to be equally important as any other subject.

7:00 AM : Capacity Development of Anganwadi Workers

A training programme for Capacity Development of Anganwadi Workers and Farm Women to achieve the national nutrition goals was organized by the Indian Council of Agricultural Research (ICAR).

6:44 AM : Clean beaches are the testimony to environment

The eight beaches are Shivrajpur in Gujarat, Ghoghla in Daman&Diu, Kasarkod and Padubidri beach in Karnataka, Kappad in Kerala, Rushikonda in Andhra Pradesh, Golden beach of Odisha and Radhanagar beach in Andaman and Nicobar.

In a first, eight beaches of India recommended for the coveted “Blue Flag” International eco-label. Blue Flag beaches are considered the cleanest beaches of the world.

6:31 AM : Himachal Pradesh

6:04 AM : हवाई मार्ग से जुड़ेगी दुर्गम पहाड़‍ियां

लद्दाख में चीन सीमा के पास बनेंगे 22 आधुनिक हेलीपैड, हवाई मार्ग से जुड़ेगी दुर्गम पहाड़‍ियां

विकास की मुख्‍यधारा से जुड़ चुके लद्दाख की घाटियां भी अब हवाई मार्ग से जुड़ेंगी। यहां की हवाई संपर्क योजना को केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत चीन सीमा के पास बनेंगे 22 आधुनिक हेलीपैड, लद्दाख में बनेंगी 6 हवाई पट्टियां बनायी जाएंगी।

दरअसल केंद्र सरकार ने लद्दाख के लिए महत्वाकांक्षी हवाई संपर्क योजना को मंजूरी दे दी है। अब लद्दाख के सभी क्षेत्र जल्द ही हवाई मार्ग से जुड़ जाएंगे। लद्दाख क्षेत्र की 6 घाटियों में 6 हवाई पट्टी का निर्माण किया जाना है। मौजूदा समय में लेह और कारगिल में ही एयरस्ट्रिप है। इसके अलावा भारत-चीन सीमा के पास 22 उन्नत हेलीपैड भी बनाए जाने हैं। इस योजना पर इसी साल के अंत तक काम शुरू कर दिया जाएगा।

भारत-चीन के बीच चल रहे गतिरोध के बीच केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख का विकास करने के लिए बनाई गई योजना को केंद्र सरकार ने जमीन पर उतारने की तैयारी शुरू कर दी है। इसीलिए सबसे पहले लद्दाख के सभी इलाकों को जल्द ही हवाई रूट से जोड़ा जाना है। वैसे तो लद्दाख पहले से ही हवाई मार्ग से जुड़ा है लेकिन अब केंद्र सरकार ने जिस महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी दी है, उसके मुताबिक लेह और कारगिल में उन्नत तकनीक के 22 हेलीपैड बनाने का लक्ष्य है। इनमें से 7 हेलीपैड लेह में होंगे, जबकि 15 हेलीपैड कारगिल में होंगे। लद्दाख के डेमचोक, लिंगशेक, चुशूल इलाकों में हेलीपैड बनाए जाने हैं।

वर्तमान में इस क्षेत्र में हैं 8 हेलीपैड

मौजूदा समय में लद्दाख रीजन में 8 हेलीपैड हैं, जिनमें 5 लेह में और 3 कारगिल में हैं, जिनका आधुनिकीकरण किया जाना है। इसके अलावा 14 नए आधुनिक हेलीपैड बनाए जाएंगे, जिसमें से 2 लेह में और 12 कारगिल में होंगे। इस तरह लद्दाख रीजन में 22 अत्याधुनिक हेलीपैड हो जायेंगे।

केंद्र सरकार की योजना के मुताबिक इसी योजना के तहत लद्दाख क्षेत्र की 6 घाटियों में 6 हवाई पट्टियां बनाई जानी हैं। मौजूदा समय में सिर्फ लेह और कारगिल में ही एयरस्ट्रिप है। लेह की 3 हवाई पट्टियों पर काम शुरू कर दिया गया है जबकि लद्दाख की तीन और घाटियों में भी जल्द ही हवाईपट्टी बनाने का काम शुरू कर दिया जाएगा। ज्यादातर बनने वाले नए हेलीपैड भारत-चीन सीमा के पास हैं। इसलिए किसी भी आपातकालीन जरूरत जैसे प्राकृतिक आपदा या स्थानीय नागरिकों की मेडिकल इमरजेंसी को पूरा करने के लिए ये हेलीपैड बेहद अहम कड़ी साबित होंगे।

सड़कों का बजट भी 1,200 करोड़ रुपये बढ़ाया गया

इसके अलावा सरकार ने एलएसी के साथ सीमावर्ती क्षेत्रों में रणनीतिक सड़कों के लिए बजट में 1,200 करोड़ रुपये की वृद्धि की है। लद्दाख के सीमा क्षेत्रों में कई और सड़कों का निर्माण कराया जाना है। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने लेह के पास तीन पुलों का निर्माण किया है जो एलएसी के साथ गतिरोध के दौरान भारतीय सेना के टैंकों की आवाजाही के काम में आते हैं। यह लद्दाख की अग्रिम चौकी निम्मू और बासगो इलाकों को भी जोड़ते हैं। अब सड़कों और पुलों के लिए अतिरिक्त 1,200 करोड़ का बजट मिलने से इस कार्य में और तेजी आएगी।

(हिन्दुस्थान समाचार)

18 September 2020

8:34 PM : Total Kharif crops sown

7:21 PM : विधेयक पारित

4:34 PM : Chinese manufacturing performance impacts Indian market

Chinese manufacturing performance impacts Indian market

The Indian market is showing a bullish trend thanks to the global cues which include manufacturing picking up in China apart from the increase in retail sales.

“The bullish trend in the market is due to the global cues which include the news that retail sales in China have increased in August which is also the second-largest economy of the world. Also, their index of industrial production has increased. This actually means that the engine of manufacturing has started which is a big indicator. Once the manufacturing has started in China then they will require the raw material and the components from other countries,” says Sushma Ramchandran, Senior Economic Journalist.

She points out that “so the impact of the increase in production will not only be limited to China but it will also benefit other nations because the factories in China will now take oil from the middle east, components from South East, and other materials from different countries. So the manufacturing which was stalled due to the corona pandemic is now picking up. This had not only an effect on our market but has influenced the Dow Jones, Wall Street, and other Asian markets.”

According to her “as the market moved up the investors showed lots of interest especially in the banking and the financial stocks. The performance of the banks especially the HDFC and ICICI bank has been very good where profitability is visible to the investors. Moreover, restructuring of the banks is also playing its role. Apart from which the scenario regarding the NPAs has also improved significantly.”

She notes that “the government has also been showing interest to expand the banking sector which has impacted the investors’ sentiments. The policy pronouncements by the government have played a key role.”

“Also, the crisis that happened with the NBFCs six months ago has eased off,” she adds.

2:45 PM : एमएसएमई सेक्टर

भारत से होने वाले निर्यात में 49.8 प्रतिशत योगदान एमएसएमई सेक्टर का

(572 words)

आत्मनर्भर भारत मुहिम के साथ केंद्र सरकार का फोकस देश के सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्योगों को मजबूती प्रदान करने पर है, ताकि भारत के उत्पाद लोकल से ग्लोबल तक का सफर तय करें। जाहिर है यह अभियान एमएसएमई को नई मजबूती प्रदान करेगा। अगर वर्तमान स्थिति को देखें तो देश से होने वाले कुल निर्यात का 49.8 प्रतिशत एमएसएमई सेक्टर से आता है।

सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम मंत्री नितिन गडकरी ने लोकसभा में एक सवाल के जवाब में कहा है कि, ‘वाणिज्यिक आसूचना और सांख्यिकी महानिदेशालय से प्राप्त सूचना के अनुसार वर्ष 2019-20 के दौरान अखिल भारतीय निर्यात में एमएसएमई से संबंधित उत्पादों के निर्यात की हिस्सेदारी 49.8 प्रतिशत थी। यह बात उन्होनें लोकसभा में सांसदों द्वारा जीडीपी में एमएसएमई का योगदान के संदर्भ में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में कही।

एमएसएमई के प्रोत्साहन के लिए विभिन्न योजनाएं कार्यान्वित करता है मंत्रालय

गडकरी ने आगे कहा कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय, विभिन्न योजनाओं और पैकेजों द्वारा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के क्षेत्र के विकास और एमएसएमई के प्रोत्साहन के लिए विभिन्न योजनाओं का कार्यान्वयन करता है। इसमें प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी), सूक्ष्म एवं लघु उद्यम-क्लस्टर विकास कार्यक्रम (एमएसई – सीडीपी), पूर्वोत्तर क्षेत्र एवं सिक्किम में एमएसएमई के संवर्धन हेतु योजना, टूलरूम एवं प्रौद्योगिकी केंद्र, मिशन सौर चरखा (एमएससी), पारंपरिक उद्योगों के पुनरुद्धार के लिए निधि योजना (स्फूर्ति), खरीद और विपणन सहायता योजना, उद्यमिता कौशल विकास कार्यक्रम (ईएसडीपी), सूक्ष्म और लघु उद्यमों (एमएसई) के लिए क्रेडिट गारंटी योजना, क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी और प्रौद्योगिकी उन्नयन योजना (सीएलसीएस – टीयूएस) शामिल है।

एमएसएमई सहयोग के लिए सरकार ने कई पहल

उन्‍होंने कहा कि हाल ही में, कोविड -19 के प्रसार के उपरांत सरकार ने ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ के तहत देश में एमएसएमई क्षेत्र के सहयोग के लिए, विशेष रूप से कोविड-19 महामारी से प्रभावित क्षेत्रों में सहायता देने के लिए कई पहल की हैं। सरकार ने एमएसएमई के लिए 20,000 करोड़ रुपए के अधीनस्थ ऋण, एमएसएमई सहित व्यापार के लिए 3 लाख करोड़ रुपए के कोलेट्रल मुक्त ऑटोमेटिक ऋण, एमएसएमई निधियों की निधि के माध्यम से 50,000 करोड़ रुपए की इक्विटी का समावेशन, एमएसएमई के वर्गीकरण के लिए नए संशोधित मानदंड, व्यापार की सुगमता के लिए ‘उद्यम पंजीकरण’ के माध्यम से एमएसएमई का नया पंजीकरण और 200 करोड़ रुपए तक की खरीद के लिए कोई भी वैश्विक निविदा नहीं होगी। इससे एमएसएमई को मदद मिलेगी।

19 हजार से अधिक शिकायतें निस्तारित

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा इसी वर्ष एक जून को ऑनलाइन पोर्टल ‘चैंपियंस’ की शुरुआत की गई है। इसमें ई-गवर्नेन्स के पहलुओं को शामिल किया जा सकेगा। जिसमें एमएसएमई की शिकायत निवारण और हैंड-होल्डिंग का पहलू भी शामिल है। पोर्टल के माध्यम से, 14 सितम्बर तक कुल 19,181 शिकायतों का निवारण किया गया है।

विनिर्माण उत्पाद में 37.3 प्रतिशत का योगदान

लोकसभा में दिए गए उत्तर के अनुसार भारतीय रिजर्व बैंक ने भी एमएसएमई के वित्तीय दबाव को कम करने के लिए कई उपायों की घोषणा की है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) द्वारा संचालित 73 वें दौर के राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण (एनएसएस ) ( जुलाई 2015 – जून 2016) के अनुसार एमएसएमई क्षेत्र में अनुमानित रोजगार प्राप्त व्यक्ति लगभग 11.10 करोड़ हैं। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय, सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय से प्राप्त सूचना के अनुसार, वर्ष 2018-19 के दौरान एमएसएमई क्षेत्र ने अखिल भारतीय सकल घरेलू उत्पाद में 30.3 प्रतिशत और अखिल भारतीय विनिर्माण उत्पाद में 37.3 प्रतिशत का योगदान दिया है।

1:00 PM : वैज्ञानिकों में जगी उम्मीद

कोरोना से बचने के लिये फ्लू वैक्सीन पर हुआ शोध, वैज्ञानिकों में जगी उम्मीद

जहां एक ओर कोरोना वैक्सीन का ट्रायल चल रहा है, वहीं दूसरी ओर वैक्सीन के संक्रमण को कम करने के लिये वैज्ञानिक कई अलग-अलग शोध में लगे हुए हैं। इसी बीच ब्राजील से जहां फ्लू वैक्सीन पर शोध हुआ तो वहीं इंपीरियल कॉलेज और ऑक्सफोर्ड में नाक से टीका देने का ट्रायल हो रहा है।

फ्लू का टीका कोरोना से बचाने में मदद कर रहा है इस बारे में बताते हुये सफदरजंग अस्‍पताल, नई दिल्ली की डॉ रूपाली मलिक ने जानकारी दी कि ब्राजील में 90 हजार लोगों पर एक शोध हुआ है, जिसमें पाया गया कि जिन लोगों में फ्लू का टीका लगा था, उनमें कोविड से मृत्यु दर 30-35 प्रतिशत कम थी। हांलाकि कई अन्य शोध कहते हैं कि फ्लू वैक्सीन अक्सर इंफ्लूएंजा वायरस में तो काम करती है, लेकिन नॉन इफ्लूएंजा रेस्पेरेट्री इलनेस (non influenza respiratory illness) में उतनी कारगर नहीं है। इसलिये इस वक्त फ्लू वैक्सीन कितनी कारगर है, यह कहना मुश्किल है। लेकिन हां यह जरूर कह सकते हैं कि अगर फ्लू की वैक्सीन आम वायरस से दूर रखती है तो कहीं न कहीं कोरोना के वायरस से बचने का प्रतिशत बढ़ सकता है।

नेजल स्प्रे हो सकती है प्रभावी

हाल ही में चीन की वैक्सीन के बारे में जानने को मिला को वो नेजल स्प्रे के जरिये वैक्सीन पर शोध कर रहे हैं। इस बीच इंपीरियल कॉलेज और ऑक्सफोर्ड में भी नाक से टीका देने का ट्रायल हो रहा, ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल है कि क्या नाक से देने पर वैक्सीन ज्यादा प्रभावी होती है। इस पर डॉ रूपाली ने कहा कि जब नाक से वैक्सीन देते हैं तो दो तरह की इम्युनिटी बनती है। एक लोकल और दूसरी सिस्टमिक इम्युनिटी। वहीं इंजेक्शन से केवल सिस्टमिक इम्युनिटी ही बनती है। वैसे हमारे पास फ्लू से बचने के लिये पहले से नेज़ल वैक्सीन उपल्ब्ध है, तो उसी के आधार पर उम्मीद की जा रही है कि यह ज्यादा प्रभावी होगी। चूंकि ज्यादातर मामलों में वायरस नाक से प्रवेश करता है तो लोकल इम्युनिटी भी जरूरी है, जो संक्रमण को कम कर सकती है। हांलाकि अब जरूरी नहीं है कि सबको नेजल वैक्सीन दी जा सके, कई लोगों को नाक में एलर्जी हो सकती है। लेकिन हां अगर परीक्षण सफल होता है, इसे काफी प्रभावी मान सकते हैं।

WHO ने स्पूतनिक वैक्सीन को अप्रूवल नहीं

वहीं रूस ने ने अपनी वैक्सीन का प्रोडक्शन शुरू कर दिया है, तो भारत में भी एक कंपनी ने स्पूतनिक वैक्सीन के लिये करार किया है। तो क्या सरकार ने भी रूस की वैक्सीन को अनुमति दे दी है। इस पर उन्होंने कहा कि अभी रूस की वैक्सीन का प्रोडक्शन चल रहा है, लेकिन अभी WHO ने स्पूतनिक वैक्सीन को अप्रूवल नहीं दिया है। रूस से अभी इस बारे में बात-चीत जारी है। भारत की कुछ कंपनियों के साथ करार भी हुआ है। भारत सरकार पूरी तरह से आश्वस्त होने के बाद ही लोगों को स्पूतनिक वैक्सीन देने की अनुमति देगी। किसी को परेशान होने की जरूरत नहीं है।

इस दौरान डॉ रूपाली ने स्पष्ट किया है कि अनलॉक में लोग मान रहे हैं कि वायरस खत्म हो गया है, तो कई मास्क और भौतिक दूरी से उब गए हैं। ऐसे लोगों को बार-बार हाथ साफ करना समय की बर्बादी लगता है, लेकिन वायरस से बचने के लिये केवल यही उपाय हैं। जब तक वैक्सीन नहीं आती तब तक कड़ाई से नियमों का पालन करें। ध्‍यान रहे, वैक्सीन के सफल होने के बाद भी लोगों तक पहुंचने में लंबा वक्त लग सकता है। हमारे देश की जनसंख्या भी बहुत ज्यादा है। इसलिये ज़िम्मेदारी को समझें और जागरूक नागरिक बनें।

9:00 AM : एलओसी पर पहुंचे जनरल नरवणे

एलओसी पर पहुंचे जनरल नरवणे, अग्रिम चौकियों का किया निरीक्षण

लद्दाख सीमा पर चीन से तनाव बढ़ने के बाद बार-बार सीज फायर के उल्लंघन, जम्मू-कश्‍मीर में लगातार हो रही आतंकी वारदातों और एलओसी पर घुसपैठ की नाकाम कोशिशों के बीच थल सेना अध्‍यक्ष जनरल एमएम नरवणे गुरुवार को एलओसी की अग्रिम चौकियों पर पहुंचे। वहां उन्‍होंने स्थितियों का जायजा लिया और फिर श्रीनगर पहुंच कर उपराज्यपाल से मुलाकात की।

दरअसल पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ तनाव बढ़ने के बाद से पाकिस्तान की ओर से सीज फायर का उल्लंघन करने की घटनाएं बढ़ने से देश की पश्चिमी सीमा पर भी हालात ठीक नहीं हैं। इसीलिए भारतीय थलसेना के प्रमुख जनरल नरवणे गुरुवार को श्रीनगर, जम्मू और कश्मीर के दौरे पर पहुंचे और राज्य में बलों और सुरक्षा स्थिति की परिचालन तैयारियों की समीक्षा की।

3186 बार पाकिस्तान ने किया युद्धविराम का उल्लंघन

पाकिस्तान की ओर से सीज फायर का उल्लंघन किये जाने से 2014 के बाद से भारत के 75 सैनिक शहीद हुए हैं। इस साल 01 जनवरी से 07 सितम्बर के बीच जम्मू क्षेत्र में नियंत्रण रेखा पर 3,186 युद्धविराम उल्लंघन हुए हैं। 2020 में पाकिस्तान की ओर से संघर्ष विराम उल्लंघन का आंकड़ा आश्चर्यजनक है। पिछले 6 महीने से भी कम समय में 2000 से अधिक बार सीजफायर का उल्लंघन हुआ है।

अगर पिछले वर्षों की तुलना की जाए तो 2018 में उतने उल्लंघन नहीं हुए। 2019 में जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म किये जाने के बाद संघर्ष विराम उल्लंघन के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई थी। तब से लगातार सीमा पार से संघर्ष विराम उल्लंघन की घटनाओं में वृद्धि हुई है। इसके अलावा भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर सीमा पार से गोलीबारी की 242 घटनाएं हुईं हैं। इसके अलावा इस साल 31 अगस्त तक जम्मू में भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर सीमा पार से गोलीबारी की 242 घटनाएं हुई हैं।

सीमावर्ती इलाकों में बार-बार गोलीबारी

इस गोलीबारी की घटनाओं में 7 सितम्बर तक सेना के 8 सैनिक गंभीर रूप से और 2 जवान मामूली रूप से हताहत हुए हैं। जम्मू-कश्मीर में अंतरराष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा पर बीएसएफ के भी 5 जवान हताहत हुए हैं। पाकिस्तान की सीमा पर 2015 में 04, 2016 में 07, 2017 में 23, 2018 में 19, 2019 में 13 और 2020 में 14 सितम्बर तक 09 जवान शहीद हो चुके हैं। पाकिस्तान पिछले 15 दिनों से आतंकियों की घुसपैठ कराने के इरादे से संघर्ष विराम का उल्लंघन करके सीमावर्ती क्षेत्र के गांव मंजाकोट, बालाकोट, केरी क़स्बा, केरनी, उरी, मनकोट, शाहपुर, रामपुर, नौशेरा, खारी, करमरा, सुंदरबनी, गुलपुर, देगवार, कलाल, सावजैन आदि इलाकों को निशाना बनाकर मोर्टार शेल दाग रहा है। अब सीमा पार से न केवल छोटे हथियारों से बल्कि भारी हथियारों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

अग्र‍िम चौकियों का किया निरीक्षण

सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे आज पाकिस्तान की सीमा पर सेना और सुरक्षा स्थिति की परिचालन तैयारियों की समीक्षा करने के लिए श्रीनगर, जम्मू और कश्मीर पहुंचे। उन्होंने चिनार कार्प्स के सैन्य अधिकारियों के साथ राज्य में बलों और सुरक्षा स्थिति की परिचालन तैयारियों की समीक्षा की। इसके बाद नियंत्रण रेखा (एलओसी) की कई अग्रिम चौकियों का भी निरीक्षण किया।

सेना प्रमुख ने सेना के वरिष्ठ कमांडरों के साथ बैठक करके लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के जमीनी हालातों के बारे में जानकारी ली और समीक्षा करके चौकस बने रहने के निर्देश दिए। उन्होंने व्यावसायिकता और कर्तव्य के प्रति समर्पण के उच्च मानकों के लिए सैनिकों की सराहना की। सेना प्रमुख ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के साथ भी बातचीत की।

(हिन्दुस्थान समाचार)

17 September 2020

6:30 PM : NEP

‘The NEP gives equal importance to vocational training’

The new National Educational Policy gives importance to the vocational skill training of the students which now will be treated equally at par with the main academic courses tells Jyoti Gupta, Educationalist.

She says “the vocational training has been here for quite some time. The skill subject has been introduced by CBSE for quite a few years but the problem was that induction linkages were not there. Also, the career path was not defined for the children. It was taken as a different stream which was something separate from the academic stream. But now the equal importance is being given to the vocational subjects like the academic subjects. Also, these skill subjects are going to be introduced right from the class sixth onwards.”

She adds “so the students will now come prepared that the skill subjects are as important as the academic subjects. It will also be taken as the cross-linkages with the industry and also taken as higher education as well. It will be a welcome move that a skill university would be created. The NEP is talking about this so the skill development is going to be more dynamic.”

She points out that “now the children will grow up knowing that they have to take one or two skill subjects. They will give equal importance to it. What is the use of vocational training when you have already done your graduation? So now the children would not be wasting their time on anything on which they do not intend to make their career.”

She further says that “now the question is does we have the capacity to give voice to this idea. Of course, we can as the same teachers will be trained for the vocational courses. There are some specialized teachers who would be required from outside. The NEP talks about hiring experts from outside as well. So it especially speaks that the courses related to even art integrated, sports integrated, or agriculture or health-based courses will have community-based courses.”

NEP states it is expected that by 2025, at least 50% of learners in schools and higher education would have exposure to the vocational system.

According to the NEP “A concerted national effort will be made to ensure universal access and affordable opportunity to all children of the country to obtain quality holistic education–including vocational education – from preschool to Class 12.”

The policy also proposes ‘local teacher education programs’ in which local resource persons can be hired by schools for shorter courses on vocational crafts.

5:58 PM : India always supports Peace and stability in West Asia

5:50 PM : First of its kind initiative in the country

Our objective is to redevelop close to 50 railway station by the end of next year; this would mean an investment of close to 1 lakh crore in the Indian Railways: Amitabh Kant, CEO, NITI Aayog.

5:00 PM : UN Secretary General Antonio Guterres says

UN Secretary General Antonio Guterres says nations need to come together to provide vital treatment to suppress transmission and save lives over next year.

4:13 PM : Generating employment

4:00 PM : New method of COVID test

IIT Madras claims that its new method to test for the SARSCoV2 virus in a person that caused COVID-19 disease can be detected in just five minutes from his saliva.

2:32 PM : वेबसाइट लॉन्च

2:02 PM : COVID-19 Updates:

1:49 PM : Defence Minister in RS

11:21 AM : Stay tuned to DD India & DD News

9:12 AM : प्रधानमंत्री के जन्‍मदिन पर विशेष

पीएम मोदी के अभूतपूर्व सफर के प्रमुख मील के पत्थर

तेरह वर्ष तक गुजरात की कमान संभालने के बाद देश का नेतृत्व अपने हाथों में लेने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब मई 2014 में पीएम पद की शपथ ली, तो सड़कों पर सन्नाटा छा गया, देश भर में ज्यादातर लोग टीवी स्क्रीन के सामने आंखें बिछा कर बैठ गए, क्योंकि हर कोई देश के सबसे बड़े परिवर्तन का गवाह बनना चाहता था। ये वो मौका था जब 1984 के बाद पहली बार किसी एक राजनीतिक दल ने पूर्ण बहुमत हासिल किया था। अब उसी प्रधानमंत्री का दूसरा कार्यकाल जारी है। और उनकी सरकार एक के बाद एक बड़े निर्णय ले रही है। चुनौतियों के बीच अवसरों को खोजने वाले पीएम मोदी का कल यानी 17 सितम्बर को जन्म दिन है।

पीएम मोदी के जन्मदिन पर हम उन फैसलों पर प्रकाश डालेंगे जो आज मील का पत्थर बन चुके हैं। प्रस्‍तुत है पीएम मोदी के अभूतपूर्व सफर के कुछ मील के पत्थर:

• तीन दशक बाद बहुमत के जनादेश के मूलमंत्र के साथ बने पहले पीएम। सबसे लंबे समय तक रहे गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री हैं।

• आज तक की सबसे अधिक सुधार उन्मुख सरकार। एक तरफ सामाजिक, प्रशासनिक, आर्थिक से लेकर दूसरी तरफ सांस्कृतिक और शैक्षिक विषयों तक मोदी सरकार के विकास की पहुंच है। सरल शब्दों में यह चहुंमुखी विकास वाली सरकार है।

• सरकार ने महिलाओं के जीवन को आसान बनाने के लिए अभूतपूर्व निर्णय लिए। गरीब महिलाओं को एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध कराने से लेकर सेना में स्थायी कमीशन तक सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय मिलता है और ट्रिपल तलाक प्रथा को समाप्त करने में भी उसकी अहम भूमिका रही।

• साहसिक निर्णय लेने वाले अब तक के सबसे बड़े दिल वाले पीएम। बड़ी मूल्यवर्ग की मुद्रा के विमुद्रीकरण से लेकर योजन अयोग को नीति अयोग में परिवर्तित करने तक के निर्णय की बात हो या फिर नागरिकता संशोधन विधेयक पारित किए जाने तक की, वह भारतीय राजनीति को राह दिखा रहा है क्योंकि उसने जो किया है, वह किसी भी पिछले राजनेता ने ऐसा अब तक नहीं किया है।

• प्राचीन भारतीय ज्ञान की महिमा को फिर से स्थापित करना। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस से लेकर आयुर्वेद तक और नव नियोजित पर्यटक सर्किट इसका उदाहरण है। उनके जन्‍मदिन से ठीक एक दिन पहले राज्यसभा में पारित आयुर्वेद शिक्षण और अनुसंधान संस्थान विधेयक-2020 प्रत्‍यक्ष उदाहरण है। यह विधेयक आयुर्वेद अनुसंधान को नई दिशा प्रदान करेगा।

• राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों को हल करना, जिसे दुनिया ने अनसुलझा हुआ माना। अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के साथ ही, अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण, एक शांतिपूर्ण न्यायिक फैसले के बाद, पूर्वोत्तर में दशकों पुराने जातीय मुद्दों को हल करना इसके उदाहरण हो सकते हैं।

• गरीब किसानों के लिए निरंतर, नियमित रूप से वित्तीय सहायता के लिए अपनी तरह की योजना पीएम- किसान। कृषि उत्पादों को अपने राज्य से बाहर बेचने के सारे बंधन तोड़ दिये। किसान की मेहनत को सीधे ग्राहक तक ले जाने से रोकने वाली सारी बंदिशों को समाप्‍त कर दिया।

• आत्मनिर्भर भारत अभियान : विश्व कोविड 19 की चुनौती से जब जुझ रहा था, इस आपदा को अवसर में बदलने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने आत्मनिर्भर भारत का मंत्र दिया। ताकि छोटे से छोटा उद्योग हो या फिर बड़ी से बड़ी परियोजनाएं, इस दिशा में भारत सिर्फ आत्मनिर्भर ही ना बने बल्कि पूरी दुनिया निवेश के लिए भारत की तरफ आकर्षित हो। इस नीति पर मोदी सरकार का काम लगातार जारी है।

• आयुष्मान भारत … विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना।

• गरीबों के लिए सबसे संवेदनशील सरकार… असंगठित क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधारों से लेकर स्टार्ट-अप इंडिया तक, पीएम गरीब कल्याण योजना, देश भर में एकल राशन कार्ड और इन छह वर्षों में सामाजिक सुधार के लिए दर्जनों कानून हुए पारित।

• रक्षा सुधार: सीडीएस से ओआरओपी तक और दशकों से अछूते रहे ऐतिहासिक खरीद के आदेश। और अब रक्षा क्षेत्र में एक नई सुबह आत्मनिर्भर भारत पर जोर है। झूठ पर दशकों से टिके पाकिस्तान और चीन की छवि का कठोर फैसलों द्वारा पर्दाफाश।

• भारत को एक नई पहचान देते हुए, वैश्विक क्षेत्र में एक नया विश्वास हासिल हुआ।

• उनके कार्यकाल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में 50 प्रतिशत का इजाफा हुआ।

• नए समीकरण, इस्लामी दुनिया में नई दोस्ती।

• नई शिक्षा नीति… दुनिया की सबसे लोकतांत्रिक, पारदर्शी नीति कतार में अंतिम पंक्ति में खड़े लोगों तक के सुझाव को शामिल करके तैयार किया गया।

• भारत ने पिछले पांच वर्षों में अक्षय ऊर्जा में अपनी स्थापित क्षमता को 2.5 गुना बढ़ाया है। वहीं सौर ऊर्जा की स्थापित क्षमता में 13 गुना वृद्धि हुई है। वैश्विक स्तर पर भारत अब अक्षय ऊर्जा के मामले में चौथे स्थान पर है। यह दर्शाता है कि भारत जलवायु परिवर्तन को लेकर कितना गंभीर है।

8:39 AM : इंग्लिश प्रीमि‍यर लीग

8:39 AM : एलएसी पर तैनात सेना

माइनस 50 डिग्री तक तापमान में सैनिकों को सुरक्षित रखने के किये गए इंतजाम

चीन के साथ जारी सीमा विवाद और पड़ोसी देश की सैन्‍य गतिविधियों को देखते हुए एलएसी पर भारतीय सेना ने भी अपनी तैयारियां पूरी रखी हैं। लद्दाख के बर्फीले पहाड़ों पर जमा देने वाली ठंड के बीच सैनिक तैनात हैं। आने वाली सर्दियों में माइनस 50 डिग्री तक तापमान में सैनिकों को सुरक्षित रखने के किये गए लिए इंतजाम किए जा रहे हैं। सैनिकों के लिए अग्रिम चौकियों तक जरूरी हथियार, राशन, हीटर और साजो-सामान पहुंचाएं जा रहे हैं।

लद्दाख सरहद पर चीनी सेना से लम्बी लड़ाई के लिए भारतीय सेनाओं की तैयारियां इन दिनों जोरों पर हैं। वायुसेना के परिवहन विमानों से सैनिकों की जरूरत का सामान लेह-लद्दाख पहुंचाया जा रहा है। आने वाली सर्दियों को देखते हुए जरूरी हथियार, राशन और साजो-सामान को अग्रिम चौकियों तक पहुंचाने के लिए चिनूक हेलीकॉप्टर को लगाया गया है। बर्फबारी से रास्ते बंद होने पहले लद्दाख में हर सामान का स्टॉक किये जाने की योजना है। इसलिए भोजन और अन्य आवश्यक वस्तुओं से लदे ट्रक लगभग हर दिन बड़े सैन्य काफिले में लेह-लद्दाख पहुंच रहे हैं। हालांकि इससे पहले ठंड के दिनों में सड़कों को छह महीने के लिए बंद कर दिया जाता था लेकिन अब इस अवधि को घटाकर 120 दिन कर दिया गया है।

ठंड में भी जमे रहेंगे सैनिक

भारत ने पिछले चार माह में द्विपक्षीय, सैन्य और कूटनीतिक वार्ताओं के जरिये चीन से सीमा विवाद हल करने की हरसंभव कोशिश कर ली है लेकिन चीनियों के अड़ियल रुख को देखते हुए अब भारतीय सेना ने भी ठंड के दिनों में एलएसी पर जमे रहने की तैयारी शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में बर्फबारी और भीषण ठंड के मौसम को ध्यान में रखते हुए सेना ने एक साल के लिए पर्याप्त मात्रा में आवश्यक वस्तुओं का स्टॉक कर लिया है।

1962 में चीन ने अक्टूबर ही शुरू किया था युद्ध

याद रहे कि चीन ने सन 1962 का युद्ध अक्टूबर के महीने में ही शुरू किया था, इसलिए वार्ताओं के जरिये चार माह का समय बिताकर इस बार फिर चीन की तरफ से अक्टूबर में किसी भी तरह का दुस्साहस किये जाने की आशंकाओं से इनकार नहीं किया जा सकता। सैनिकों के लिए सामानों का स्टॉक करने में लगे सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि भारत एलएसी पर लम्बी तैनाती नहीं चाहता लेकिन अब ऐसी स्थिति बन रही है तो हम उसके लिए भी पूरी तरह तैयार हैं।

सेना ने किया राशन-ईंधन का स्टॉक

वायुसेना का परिवहन विमान सी-17 ग्लोब मास्टर और अमेरिकी हेलीकॉप्टर चिनूक सेना तालमेल के साथ काम कर रहे हैं। सी-17 ग्लोब मास्टर से सर्दियों के कपड़े, टेंट, हीटिंग उपकरण और राशन लेह-लद्दाख लाया जा रहा है। जो अनलोडिंग होने के बाद सेना के अधिकारियों की देखरेख में चिनूक हेलीकॉप्टरों के जरिये ऊंचाइयों की अग्रिम चौकियों पर तैनात सैनिकों तक पहुंचाया जा रहा है। एयर कमाडोर डीपी हिरानी ने कहा कि भारतीय सेना के लोकेशन पर भेजे गए टेंट माइनस 50 डिग्री तक तापमान को झेलने की क्षमता रखते हैं। भारतीय सेना के राशन गोदाम एलएसी माउंट पर भरे हुए हैं। लेह में सेना का ईंधन डिपो तेल टैंकर लाइन से भरा हुआ है। सेना ने राशन, गरम कपड़े, उच्च ऊंचाई वाले टेंट और ईंधन का भी बड़े पैमाने पर स्टॉक कर लिया है।

लेह स्थित 14 कोर के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल अरविंद कपूर ने कहा कि हमारा लॉजिस्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर इतने स्मार्ट तरीके से बनाया गया है कि बाहर से किसी तरह की सूचना मिलते ही प्लग एंड प्ले मोड के तहत प्रभावी तरीके से यूनिट में शामिल हो सकते हैं। फ्रंटलाइन पर तैनात हर जवान को अत्याधुनिक शीतकालीन कपड़े और तंबू दिए गए हैं। सबसे अच्छी गुणवत्ता वाले राशन का इंतजाम किया गया है, जो अत्यधिक पोषण और उच्च कैलोरी वाले हैं। सेना के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि भारत के पास ऐसे स्ट्रैटजिक एयरलिफ्ट प्लेटफॉर्म हैं, जिससे सड़क मार्ग कटने पर भी भारतीय सेना और एयरफोर्स मिलकर एक-डेढ़ घंटे के भीतर ही दिल्ली से लद्दाख और अग्रिम चौकियों तक जरूरी सामान पहुंचाया जा सकता है। हालांकि इसी महीने रोहतांग टनल का भी उद्घाटन होने की उम्मीद है, जिसके बाद लद्दाख रीजन तक हर मौसम में पहुंच आसान हो जाएगी।

बर्फीले पहाड़ों पर तैनात हुए भारतीय सैनिक

चीन के साथ लद्दाख में लंबे समय से बना तनावपूर्ण माहौल जल्द खत्म होता दिखाई नहीं देता, इसलिए कई अन्य राज्यों में तैनात उन सैनिकों को भी रिजर्व के तौर पर यहां लाया जा रहा है, जो शून्य तापमान में भी सीमा की रक्षा करने का अनुभव रखते हैं। ताकि ठंड के दिनों में अग्रिम चौकियों पर तैनात सैनिकों की अदला-बदली में कोई दिक्कत न हो। भारतीय सैनिकों को शून्य तापमान और बर्फबारी के बीच भी देश की हिफाजत के लिए डटे रहने की आदत है। सेना के जवान सियाचिन और सिक्किम जैसी ठंडी जगहों पर पहले से तैनात हैं। एलएसी पर जो अतिरिक्त फ़ौज भेजी गई है, वह पहले से बर्फीले पहाड़ों पर तैनात रह चुकी है। कारगिल में 18 हजार फीट ऊंची बर्फ की चोटियों से पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़ने का अनुभव रखने वाली भारतीय सेना के लिए लद्दाख की खून जमा देने वाली बर्फीली पहाड़ियां कोई मायने नहीं रखतीं। इसलिए सेना ने ठंड के दिनोंं में भी चीनियों से मोर्चा संभालने के इरादे से खुद को तैयार कर लिया है। लद्दाख के उच्च ऊंचाई वाले युद्ध क्षेत्र में विशेषज्ञता वाले भारतीय बल तैनात हैं।

प्रति माह 8,000 करोड़ रुपये का खर्च

लद्दाख में सर्दियों के दिनों में 30-40 हजार अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती पर प्रति माह 8,000 करोड़ रुपये (1.8 बिलियन डॉलर) खर्च होने का अनुमान है, जिसके लिए केंद्र सरकार की मंजूरी मिल चुकी है। 9000 से 12000 फीट की ऊंचाई तक तैनात सैनिकों को एक्सट्रीम कोल्ड क्लाइमेट (ईसीसी) क्लोदिंग दी जाती है। इससे ज्यादा ऊंचाई पर तैनात सैनिकों को स्पेशल क्लोदिंग एंड माउंटेनियरिंग इक्विपमेंट (एससीएमई) दिए जाते हैं। एक जवान को एससीएमई देने पर करीब 1.2 लाख रुपये तक खर्च आता है। एलएसी पर तैनात सभी सैनिकों के लिए क्लोदिंग सहित सभी जरूरी सामान पहुंचा दिया गया है और रिजर्व स्टॉक भी भेजने का काम जारी है। एक अधिकारी ने बताया कि अग्रिम चौकियों पर तैनात सैनिकों को स्पेशल राशन दिया जाता है। दरअसल अत्यधिक ऊंचाई पर तैनात सैनिकों को ज्यादा भूख नहीं लगती लेकिन उन्हें सही पोषण और जरूरी कैलरी देने के लिए हर दिन 72 आइटम दिए जाते हैं, जिसमें से वह अपनी पसंद की चीज चुन सकते हैं।

(हिन्दुस्थान समाचार)

8:26 AM : Recoveries 4 times more than Active Cases

8:15 AM : पीएम मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएं

8:15 AM : पीएम मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएं

8:14 AM : पीएम मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएं

8:12 AM : पीएम मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएं

8:00 AM : Today an eye on

• The “Seva Saptah” is being observed to mark PM Modi’s 70 birthday on Sept 17

• The collection titled ‘Letters To Mother’- letters written by the PM referring to his ‘ambitions and anxieties’- will be released today

• Defence Minister Rajnath Singh’s statement on Indo-China border standoff in Rajya Sabha

• Madhya Pradesh govt to begin serving milk to children in anganwadis from today during Seva Saptah

• Supreme Court to hear on the telecast of the programme based on the theme of ‘UPSC Jihad’ on Sudarshan TV

• BRICS nations NSAs’ virtual meeting

• Twitter to start removing fake election tweets

• First meeting of independent panel probing WHO’s pandemic response

TODAY IN PARLIAMENT

LOK SABHA

BILL FOR CONSIDERATION AND PASSING

• The Farmers’ Produce Trade and Commerce (Promotion and Facilitation) Bill,2020
• The Farmers (Empowerment and Protection) Agreement on Price Assurance and Farm Services Bill,2020

RAJYA SABHA

• Defence Minister Rajnath Singh to make a statement on the ‘Developments on our borders in Ladakh’

BILL FOR CONSIDERATION AND PASSING

• The Salaries and Allowances ofMinisters (Amendment) Bill, 2020
• The Homoeopathy Central Council (Amendment) Bill, 2020

• The Indian Medicine Central Council (Amendment) Bill,2020

16 September 2020

5:00 PM : G20 Saudi Arabia Environment Minister's meeting

4:55 PM : 13 crore free LPG refills

More than 13 crore free LPG refills have been delivered to PM Ujjwala Yojana beneficiaries against PMGKY Advance given to them during Corona crisis.
Rs 9,670.41 crore has been incurred by industry on this Free Refill Scheme: Minister of Petroleum & Natural Gas

4:30 PM : कोविड वैक्सीन

भारत में एक बार फिर ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन के तीसरे चरण का ट्रायल होगा शुरू

भारत में एक बार फिर से ऑक्सफोर्ड की कोरोना वैक्सीन का तीसरे चरण का ट्रायल शुरू होगा। भारतीय औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) ने सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को ट्रायल शुरू करने की अनुमति दे दी है।

दरअसल 11 सितम्बर को दवा कंपनी एस्ट्रोजेनेका के अध्ययन में शामिल हुए एक व्यक्ति की तबीयत खराब होने के बाद दूसरे देशों में ऑक्सफोर्ड कोविड-19 वैक्सीन का परीक्षण रोक दिया गया था, जिसके बाद डीसीजीआई ने सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को निर्देश दिया था कि वैक्सीन का दूसरे और तीसरे चरण का क्लीनिकल परीक्षण रोक दें।

चार दिन पहले डीजीसीआई ने तीसरे चरण के ट्रायल पर रोक लगा दी थी। हालांकि डीसीजीआई ने क्लीनिकल ट्रायल के लिए जांच के दौरान अतिरिक्त ध्यान देने समेत अन्य कई शर्तें रखी हैं। डीजीसीआई ने विपरीत परिस्थितियों से निपटने के लिए तय इलाज की जानकारी देने को कहा है।

आपको बता दें कि भारत में तीन वैक्सीन का ट्रायल चल रहा है। वैक्सीन के सफल होने पर इसे लोगों तक पहुंचाने के लिये एक कमेटी गठित की गई है। वहीं हाल ही में स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन पहले किसे मिलेगी वैक्सीन ये साफ करते हुये कहा कि हेल्थ वर्कर्स, कोरोना के खिलाफ फ्रंट लाइन वर्कर्स, कोरोना संक्रमण के संवेदनशील बड़ी उम्र के लोगों को वैक्सीन पहले उपलब्ध कराया जायेगा। इसमें जिन्हें पहले से कोई बीमारी है या कोमोरबिडीटी के लोग हैं उन्हें भी शामिल किया गया है। वहीं जब वैक्सीन का मास प्रोडक्शन हो जायेगा तो सभी को को मिलने लगेगी।

4:13 PM : KheloIndia

First 8 KheloIndia State Centre of Excellence to get financial support of Rs. 95.19 cr in 4 years: Kiren Rijiju

3:15 PM : CoronaWatch

3:15 PM : CoronaWatch

2:04 PM : Minister using e-car

1:51 PM : Toys Quality Control

1:13 PM : COVID-19 Updates:

1:39 AM : COVID Tracker

8:16 AM : Himachal Pradesh

State cabinet to allow people to enter or exit state without E-COVID registration. Inter-state movement of public transport buses will not be resumed.

8:10 AM : Today on Eye

  • Madhya Pradesh government is scheduled to start a series of public welfare programmes starting today
  • Lok Janshakti Party (LJP) to hold a crucial meeting of its MPs amid reports of discomfort with Nitish Kumar’s JD (U)
  • The 50th Director General Level Border Co-ordination talk between the BSF and BGB will begin at Dhaka (Sept 16-19)
  • The farmers’ organisation of TMC will organise protests against the Centre’s agricultural policy across the state
  • Maharashtra Congress to stage statewide protest demanding withdrawal of Centre’s decision to ban export of onions
  • World Ozone Day is observed today to spread awareness among people about the depletion of Ozone Layer

Parliament Monsoon Session 2020

Lok Sabha Legislative Business

Bill For Consideration And Passing

  1. The Banking Regulation (Amendment) Bill, 2020
  2. The Farmers’ Produce Trade and Commerce (Promotion and Facilitation) Bill, 2020
  3. The Farmers (Empowerment and Protection) Agreement on Price Assurance and Farm Services Bill, 2020

Rajya Sabha Legislative Business

Bills For Consideration & Passing

  1. of Teaching & Research in Ayurveda Bill, 2020
  2. Salaries and allowances of Ministers (amend) Bill,2020
  3. Homeopathy Central Council (amend) Bill,2020
  4. Indian Medicine Central Council (Amend) Bill, 2020

15 September 2020

5:22 PM : बिहार चुनाव

बिहार चुनाव : सोशल मीडिया पर वर्चुअल रैलियां कर रहे राजनीतिक दल

बिहार में इस बार विधानसभा का चुनाव बहुत ही अलग तरीके से हो रहा है। कोरोना के कारण सोशल मीडिया पर अधिक इसका प्रभाव देखा जा रहा है। डिजिटल भारत के चुनाव में बड़ी-बड़ी रैलियां वर्चुअल माध्यम से हो रही हैं।

वर्ष 2015 तक के विधानसभा चुनाव और 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में लोग नेताओं को सुनने के लिए मैदान में जमा होते थे। खुले मैदान में रैलियां होती थीं, हेलीकॉप्टर से नेता उतरते थे। रैलियों में भीड़ को देखकर जीत-हार का आंकलन किया जाता था। प्रशासनिक स्तर पर पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर रैली की अनुमति देने की व्यवस्था की जाती थी, लेकिन इस बार अभी तक मैदान में रैलियां शुरू नहीं हुई हैं। वर्चुअल माध्यम से बड़े-बड़े नेता लोगों को संबोधित कर रहे हैं।

मतदाता घर बैठे जान रहे खूबियां और खामियां

नेताओं का भाषण सुनने के लिए कहीं जाने की जरूरत नहीं है। जूम एप, फेसबुक लाइव और लिंक के माध्यम से घर बैठे लोग नेताओं का भाषण सुन रहे हैं। घर बैठे लोग जान रहे हैं कि सरकार ने गरीबों के कल्याण के लिए क्या-क्या योजना चलाई हैं? कैसे सभी क्षेत्रों का समग्र विकास हो रहा है? लोग घर बैठे ही सुन रहे हैं कि सरकार में क्या-क्या खामियां हैं?

दावेदार सोशल मीडिया पर बता रहे अपने कार्य

बात करें दावेदारों के दावों की तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म खोलिए, आपके क्षेत्र के सभी दलीय ही नहीं निर्दलीय उम्मीदवार भी दिख जाएंगे। फेसबुक हो या ट्विटर, व्हाट्सएप हो या इंस्टाग्राम प्लेटफार्म, अल सुबह से देर रात तक तमाम दावेदारों की कई पोस्टें पढ़ने-देखने को मिल जाएंगी। भाजपा, जदयू, लोजपा के दावेदार दिखा रहे हैं कि केंद्र और बिहार की सरकार ने क्या-क्या किया। कांग्रेस के दावेदार दिखा रहे हैं कि उनके नेतृत्व वाली जब सरकार थी तो देश में क्या-क्या योजना शुरू की गई थी।

राजद के दावेदार दिखाते हैं कि लालू यादव के नेतृत्व में क्या हुआ। पप्पू यादव की जाप के कार्यकर्ता भी आलाकमान द्वारा बिहार वासियों और देश के विभिन्न हिस्सों के लोगों को की गई मदद का बखान कर रहे हैं। मैदान में आप के कार्यकर्ता भी कूद पड़े हैं और वह दिल्ली के विकास कार्यों को गिना रहे हैं। इस जोर आजमाइश में निर्दलीय भी कहीं पीछे नहीं हैं। वह दिखा रहे हैं कि सत्ताधारी दल और विपक्ष ने बिहार में क्या किया और क्या नहीं किया, क्या होनी चाहिए।

मिनट-टू-मिनट डाल रहे अपने वक्तव्य

दावेदारों की सुबह की शुरुआत और रात में नींद भी उन्हें सोशल मीडिया पर बगैर पोस्ट के नहीं आती। दिन भर के तमाम बातों को मिनट-टू-मिनट सोशल मीडिया पर डाल रहे हैं। डालें भी क्यों न, वर्तमान केन्द्र सरकार ने देश को डिजिटल जो बना दिया है। देश में मोबाइल युग की शुरुआत राजीव गांधी ने की थी, लेकिन मोबाइल क्रांति हुई तो नरेन्द्र मोदी के शासन वाली सरकार में। जिसने हर घर में 4-जी मोबाइल पहुंचा दिया। लोग मिनटों में दुनिया से न केवल जुड़ जाते हैं, बल्कि घर बैठे-बैठे दुनिया भर की हलचल का लाइव देख लेते हैं।

(हिन्दुस्थान समाचार)

5:09 PM : Doordarshan turning 61 today

4:49 PM : COVID update by Health Ministry

  • अब तक 5 करोड़ 80 लाख से ज्यादा टेस्ट किये गए हैं
  • देश मे कोविड 19 के एक्टिव मरीज़ों की संख्या 9 लाख 90 हज़ार 61 है
  • देश की पॉजिटिविटी दर 8.14% है
  • 1 करोड़ से 2 करोड़ टेस्ट तक पहुंचने में हमे 27 दिन लगे
  • पिछले 1 हफ्ते में 76 लाख टेस्ट हुए हैं
  • 14 राज्यों में केवल 5 हज़ार एक्टिव केस हैं। कर्नाटक में कुछ स्थिरता दिख रही है। महाराष्ट्र में लगातार मामले बढ़ रहे हैं
  • महाराष्ट्र में मृत्यु दर में बढ़ोतरी हो रही है और उत्तर प्रदेश में भी मृत्यु दर बढ़ रही है
  • तमिलनाडु में प्रति दिन मृत्यु दर में कमी आ रही है
  • देश मे ठीक होने वाले मरीजों की कुल संख्या 38 लाख 59 हज़ार 399 है। ये विश्व की सबसे ज्यादा recovered की संख्या है

4:05 PM : Press Briefing

3:55 PM : लोकसभा में रक्षामंत्री

2:23 PM : 'सेवा सप्ताह'

12:09 PM : Foundation stone of seven projects

11:47 AM : Gyms, yoga centres resume operations in Delhi

10:50 AM : COVID-19 Update

9:16 AM : जीवन का भाग है दूरदर्शन

8:40 AM : Engineer's Day

8:35 AM : COVID-19 Testing Update:

8:24 AM : Engineers' Day

7:13 AM : Expert's opinion

India shows strategic confidence in dealing with China on the border row

India is taking all the right steps to counter Chinese aggression unlike in the past there is more strategic confidence Vis a Vis dealing with China on the border tells the expert.

“There can be many reasons for China misleading the world on India. There is one strong internal reason and other external reasons. The internal reason could be that the government of China is under pressure for indulging in strategic overexpansion. Like it has a problem with India it has also problems with a number of its neighbors apart from the USA,” says Ambassador Mohan Kumar, Former Senior Diplomat.

Kumar adds “the recent visit of the Foreign Minister of China to Europe didn’t go well. There are a host of problems and China does not want to give an impression to the domestic audience that it is the aggressor. The external reason could be that China has been caught in the bind. This is not a typical reactive India. If you take India’s position ten-fifteen years ago then we were in a more reactive mode. Now what I see is a different India which does not want to budge or give in which has surprised the Chinese.”

Kumar notes that “this is why you see a mixed messaging. On the one hand, they have asserted that India is the aggressor but if you closely see the Chinese foreign ministry statement that says that there is a hope that there will be a deal a conclusion to this imbroglio. Further, it says that the place is inhabitable and the winter is very harsh. So it hopes for a compromise.”

“If you look at the decisions taken over the last six-seven years then you will find that each of them is making a projection of a much more confident India to handle the strategic issues in India border and beyond. This is what China probably has not liked. Actually the effort was to coerce us into diluting our confidence. This was especially done in conjunction with Pakistan,” says Lt Gen S. A. Hasnain, (Retd) Former GOC, 15 Corps.

Hasnain adds “the Chinese cannot make a dent easily for which they have to bring a very large force. On the night of August 29 and 30, we improved our strategic capabilities by occupying the heights in our own territory. Earlier we avoided because of the fuzziness of the Line of Control. That decision was in fact taken which comes from our overall strategic confidence.”

Hasnain points out that “this is not to the liking of China. They are using every tactic to try and coerce us to make sure that we go back. Since we have acquired this advantage here the Chinese on the northern bank in the fingers area are feeling the pressure.”

7:10 AM : Yoshihide Suga

7:01 AM : हवा में विमान को मार गिराने वाली ब्रह्मोस

भारत-रूस बनाएंगे हवा में विमान को मार गिराने वाली ब्रह्मोस

भारत और रूस के बीच हुए एक करार के तहत दोनों देश मिलकर ब्रह्मोस मिसाइल का नया वर्जन बनाएंगे। दोनों देश 2024 तक ऐसी ब्रह्मोस मिसाइल बनाएंगे जो लड़ाकू विमान को हवा में मार गिराने में सक्षम होगी। नई ब्रह्मोस मिसाइल लॉन्च करेंगे जो अवाक्स सिस्टम से लैस होगी। नई मिसाइल का उपयोग प्रमुख हवाई लक्ष्यों को नष्ट करने के लिए किया जा सकेगा, जबकि पिछले संस्करण केवल जमीन या समुद्र पर लक्ष्य को नष्ट करने में सक्षम थे।

नई मिसाइल पर्याप्त हल्की होगी

रूस और भारत ने अपने संयुक्त ब्रह्मोस प्रोजेक्ट के तहत एक योजना अपनाई है, जिसमें एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (एडब्ल्यूएसीएस) सिस्टम से लैस नई क्रूज मिसाइल बनाई जानी है, जो हवा में ही विमानों को मार गिराने में सक्षम होगी। इस प्रोजेक्ट के रूसी निदेशक अलेक्जेंडर मिकोशेव के अनुसार यह मिसाइल 2024 तक लॉन्च के लिए तैयार होगी। उन्होंने पुष्टि की है कि नई ब्रह्मोस मिसाइल एलसीए तेजस से ले जाने लायक पर्याप्त हल्की होगी। यह 400-500 किलोमीटर की रेंज की मिसाइल होगी। उन्होंने कहा कि इसमें लक्ष्य-प्राप्ति के विभिन्न उपकरण होंगे लेकिन एक ही प्लेटफॉर्म का उपयोग करेंगे। 1998 में रूस और भारत ने संयुक्त प्रोजेक्ट स्थापित करके हाइपरसोनिक मिसाइल ब्रह्मोस बनाई जो केवल जमीन या समुद्र पर लक्ष्य को नष्ट करने में सक्षम थीं।

कोविड-19 के बावजूद ऑर्डर मिले

उन्होंने बताया कि हाल ही में कोविड महामारी के बावजूद रूसी-भारतीय ब्रह्मोस मिसाइल उद्यम को इस वर्ष की शुरुआत से छह महीने में अतिरिक्त 1 बिलियन डॉलर के ऑर्डर मिले हैं। फरवरी में कंपनी को 4.5 बिलियन डॉलर के ऑर्डर मिले हैं। प्रोजेक्ट के तहत 40 प्रतिशत मिसाइलें सशस्त्र बलों के लिए और शेष नौसेना और वायु सेना के लिए हैं। उन्होंने कहा कि फिलहाल, हाइपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइल की योजना को दो चरणों में विभाजित किया गया है, जिसमें 2024 तक एयरक्राफ्ट को मार गिराने वाली नई ब्रह्मोस मिसाइल बनानी है, जो अवाक्स सिस्टम से लैस होगी। दूसरी 2026 या 2027 इससे तेज गति की मिसाइल डिजाइन करना है। कंपनी के सह-निदेशक के अनुसार इसके इंजीनियरों ने पहले ही कुछ मिसाइल घटकों का परीक्षण किया है, जो इसे लक्ष्य गति तक पहुंचने में मदद करेंगे।

(हिन्दुस्थान समाचार)

14 September 2020

5:49 PM : PM Modi addressing Rajya Sabha

5:31 PM : Diesel Loco Shed

5:22 PM : Vice President

5:01 PM : MoUs with 8 countries

4:21 PM : 11 bills will be taken up to replace the ordinances

3:06 PM : Lok Sabha today passed:

2:11 PM : Lok Sabha Session

2:02 PM : Statement in Lok Sabha Session

1:11 PM : Dr.Harsh Vardhan in Lok Sabha

Health Minister Dr.Harsh Vardhan in Lok Sabha said that the country has collectively fought against the #COVID19 pandemic to contain its effect. The minister informed,the fatality rate stands at 1.67% whereas the global fatality rate is around 3.2%.

12:49 PM : Ministry of Micro, Small & Medium Enterprises

Ministry of Micro, Small & Medium Enterprises(MSME) writes to CMDs of top 500 Corporate Enterprises to show solidarity with smaller units and clear MSME dues on priority.

Ministry has also taken up the issue with States and motivated them to monitor and see that such payments are made expeditiously.

Around Rs. 10000 crores have been paid by the Ministries & CPSEs.

10:55 AM : COVID-19 Updates

10:23 AM : COVID-19 : 77.88% स्वस्थ

9:46 AM : COVID-19 Testing Update

9:00 AM : हिन्दी दिवस की शुभकामनाएं।

8:18 AM : TODAY IN PARLIAMENT

LOK SABHA

• DR. HARSH VARDHAN to make a statement regarding Covid Pandemic and the Steps taken by the Government of India.

BILLS FOR CONSIDERATION AND PASSING
• The National Commission for Homoeopathy Bill, 2020

• The National Commission for Indian System of Medicine Bill,2020

RAJYA SABHA

• MOTIONS FOR ELECTION OF DEPUTY CHAIRMAN

BILLS FOR CONSIDERATION AND PASSING
• The Aircraft (Amendment) Bill, 2020

• The Institute of Teaching and Research in Ayurveda Bill, 2020

8:10 AM : हिन्दी दिवस की शुभकामनाएं

8:00 AM : मानसून सत्र आज से

मानसून सत्र आज से, लोकसभा अध्यक्ष ने लिया तैयारियों का जायजा

संसद के मानसून सत्र से पूर्व लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने रविवार को संसद परिसर का दौरा कर स्वास्थ्य एवं सुरक्षा उपायों तथा अन्य तैयारियों का जायजा लिया और अधिकारियों को कई दिशा-निर्देश भी दिए।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने रविवार सुबह संसदीय सौध में बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक की अध्यक्षता की। इसके बाद करीब डेढ़ घंटे तक संसद परिसर का दौरा किया। उन्होंने सबसे पहले प्रवेश द्वार का निरीक्षण किया तथा वहां लगाए गए थर्मल कैमरा की कार्यप्रणाली को समझा। उन्होंने प्रवेश द्वार पर तैनात प्रत्येक कर्मचारी को भी सैनेटाइजर उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए। इसके बाद उन्होंने सांसदों के लिए तैयार की गई कोविड टेस्टिंग फैसिलिटी, सभा कक्ष, काॅरीडोर, इनर लाॅबी, आउटर लाॅबी, वेटिंग हाॅल, मीडिया स्टैंड और परिसर में अन्य स्थानों को देखा तथा छोटी-मोटी कमियों को दूर करने के निर्देश दिए।

निरीक्षण के बाद लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि संसद का मानसून सत्र विपरीत परिस्थितियों में आयोजित किया जा रहा है। मानसून सत्र के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा के माकूल इंतजाम किए गए हैं। केंद्र सरकार की गाइडलाइंस तथा विशेषज्ञ संस्थानों के सुझावों का पालन करते हुए सभी स्थानों पर सैनीटाइजेशन व अन्य व्यवस्थाएं माकूल रहें, यह सुनिश्चित किया गया है।

उन्होंने विश्वास जताया कि सदन का संचालन निर्बाध तथा व्यवस्थित रहेगा तथा सभी दलों के सहयोग से संसद पूर्व की भांति कार्य उत्पादकता हासिल करने में सफल रहेगी।

इससे पूर्व बिजनेस एडवाइजरी कमेटी में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सभी दलों को स्वास्थ्य सुरक्षा व अन्य तैयारियों का विस्तृत ब्यौरा दिया। बिरला ने बताया कि बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि असाधारण परिस्थितियों में स्वास्थ्य संबंधी प्रोटोकाॅल्स का पालन करते हुए सत्र के दौरान विधायी विषयों पर अधिक से अधिक सार्थक एवं सकारात्मक चर्चा हो। सभी दलों ने विधायी कार्यों व अन्य विषयों में अधिकतम सहयोग के लिए आश्वस्त किया है। सांसद संवैधानिक दायित्वों की पूर्ति के लिए कटिबद्ध हैं।

लोकसभा अध्यक्ष ने बताया कि सत्र से पूर्व सभी सांसदों व उनके परिजनों का कोविड टेस्ट करवाया गया है। सभी सांसदों को सैनेटाइजर, मास्क, ग्लव्ज सहित अन्य स्वास्थ्य सुरक्षा संबंधी सामग्री की किट भेजी गई है। संसद के सभी अधिकारियों-कर्मचारियों का भी टेस्ट करवाया गया। सत्र की पूरी अवधि के दौरान परिसर में टेस्ट की सुविधा रहेगी। उन्होंने कहा कि यदि किसी सदस्य को स्वास्थ्य संबंधी शिकायत होती है तो उनके उचित उपचार की पूरी व्यवस्था की गई है।

(हिन्दुस्थान समाचार)

7:56 AM : हिन्दी दिवस विशेष

हिन्दी दिवस विशेष : हिन्दी भाषा से जुड़ी खास बातें

‘हिन्दी’ कहते या सुनते ही एक गर्व की अनुभूति होती है। 1 अरब 324 करोड़ हिन्दुस्तानियों की राजभाषा हिन्दी है। प्रति वर्ष 14 सितम्बर को हिन्दी दिवस मनाया जाता है। हिन्दी भाषा विश्व में चौथी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। हिन्दी दिवस पूरे भारत में हिन्दी भाषा के सम्मान और महत्व को समझने के लिए मनाया जाता हैं। हिन्दी भाषा का एक बहुत ही गहरा इतिहास है, जो इंडो-आर्यन शाखा और इंडो-यूरोपीय भाषा परिवार से जुड़ा हुआ है। आखिर क्यों मनाया जाता है हिन्दी दिवस? हिन्दी दिवस पर कौन-कौन से पुरस्कार दिये जाते हैं? आखिर, भारत के अलावा और कौन सा राष्ट्र है, जहां की आधिकारिक भाषा ‘हिन्दी’ है।

आइये जानते तमाम ऐसे ही रोचक तथ्य :-

14 सितम्बर को ही क्यों मनाते हैं हिन्दी दिवस

आजादी मिलने के दो साल बाद 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा में एक मत से हिन्दी को राजभाषा घोषित किया गया और इसके बाद से हर साल 14 सितंबर को हिन्दी दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। हिंदी की अनदेखी को रोकने के लिए हर साल 14 सितंबर को देशभर में हिन्दी दिवस मनाया जाता है।

‘हिन्दी’ को ही क्यों मिला राजभाषा का दर्जा

किसी भी भाषा को राष्ट्र भाषा अथवा राजभाषा चुनने से पहले उसके कुछ विशेष गुण होने चाहिए। उस भाषा को देश के ज्यादातर भागों में लिखा पढ़ा जाता हो या उन्हें समझ हो। उस भाषा की शब्दाबली इतनी समर्थ हो की उससे सभी प्रकार के ज्ञान-विज्ञान के विषयों को अभिव्यक्त किया जा सके। साथ ही, ऐसी भाषा के साहित्य का एक विशाल भंडार होना चाहिए तथा दर्शन, ज्योतिष विज्ञान, साहित्य और इतिहास के विषय में सभी पुस्तकें होनी चाहिए। भाषा का सुन्दर और सरल होना और भी आवश्यक है।

आज के भारत में हिन्दी ही एक मात्र भाषा है, जिसमें यह सब गुण पाए गए हैं। इसीलिए हिन्दी को राजभाषा के रूप में चुना गया है। आज हिन्दी भाषा को पूरे विश्व भर में सम्मान के नजरों से देखा जाता है। यहाँ तक की टेक्नोलॉजी के जमाने में आज विश्व की सबसे बड़ी कंपनियां जैसे गूगल, फेसबुक भी हिन्दी भाषा को बढ़ावा दे रहे।

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्व. अटल बिहारी बाजपेयी ने राष्ट्र संघ में अपना प्रथम वक्तव्य हिन्दी भाषा में प्रस्तुत किया था। भारत के केंद्र में हिन्दी भाषा का प्रयोग किया जाता है। हिन्दी भाषा का साहित्य पौराणिक और संपन्न है।

भारत के संविधान में हिन्दी का उद्भव

26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान लागू होने के साथ ही राजभाषा नीति भी लागू हुई। संविधान के अनुच्छेद 343 (1) के तहत यह स्पष्ट किया गया है कि भारत की राजभाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी है। संघ के शासकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग होने वाले अंकों का रूप भारतीय अंकों का अंतर्राष्ट्रीय रूप है। हिन्दी के अतिरिक्त अंग्रेजी भाषा का प्रयोग भी सरकारी कामकाज में किया जा सकता है।

अनुच्छेद 343 (2) के अंतर्गत यह भी व्यवस्था की गई है कि संविधान के लागू होने के समय से 15 वर्ष की अवधि तक, अर्थात वर्ष 1965 तक संघ के सभी सरकारी कार्यों के लिए पहले की भांति अंग्रेजी भाषा का प्रयोग होता रहेगा। यह व्यवस्था इसलिए की गई थी कि इस बीच हिन्दी न जानने वाले हिन्दी सीख जायेंगे और हिन्दी भाषा को प्रशासनिक कार्यों के लिए सभी प्रकार से सक्षम बनाया जा सकेगा।

आयोग का गठन और कार्य

अनुच्छेद 344 में यह कहा गया कि संविधान प्रारंभ होने के 5 वर्षों के बाद और फिर उसके 10 वर्ष बाद राष्ट्रपति एक आयोग बनाएँगे, जो अन्य बातों के साथ साथ संघ के सरकारी कामकाज में हिन्दी भाषा के उत्तरोत्तर प्रयोग के बारे में और संघ के राजकीय प्रयोजनों में से सब या किसी के लिए अंग्रेजी भाषा के प्रयोग पर रोक लगाए जाने के बारे में राष्ट्रपति को सिफारिश करेगा।

आयोग की सिफारिशों पर विचार करने के लिए इस अनुच्छेद के खंड 4 के अनुसार 30 संसद सदस्यों की एक समिति के गठन की भी व्यवस्था की गई। संविधान के अनुच्छेद 120 में कहा गया है कि संसद का कार्य हिंदी में या अंग्रेजी में किया जा सकता है।

वर्ष 1965 तक 15 वर्ष पूर्ण हो चुके थे। लेकिन उसके बाद भी अंग्रेजी को हटाया नहीं गया और अनुच्छेद 334 (3) में संसद को यह अधिकार दिया गया कि वह 1965 के बाद भी सरकारी कामकाज में अंग्रेजी का प्रयोग जारी रखने के बारे में व्यवस्था कर सकती है। अंग्रेजी और हिन्दी दोनों भारत की राजभाषा है।

जब लाया गया भाषा संशोधन विधेयक

26 जनवरी 1965 को संसद में यह प्रस्ताव पारित हुआ कि ‘हिन्दी का सभी सरकारी कार्यों में उपयोग किया जाएगा, लेकिन उसके साथ साथ अंग्रेजी का भी सह राजभाषा के रूप में उपयोग किया जाएगा।’ वर्ष 1967 में संसद में ‘भाषा संशोधन विधेयक’ लाया गया। इसके बाद अंग्रेजी को अनिवार्य कर दिया गया। इस विधेयक में धारा 3(1) में हिन्दी की चर्चा तक नहीं की गई। इसके बाद अंग्रेजी का विरोध शुरू हुआ। 5 दिसंबर 1967 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने राज्यसभा में कहा कि हम इस विधेयक में विचार विमर्श करेंगे।

इन्होनें दिया अप्रतिम योगदान

स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद हिन्दी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलाने के लिए पुरूषोत्तम दास टंडन, काका कालेलकर, मैथिलीशरण गुप्त, रामचंद्र शुक्ल, हजारी प्रसाद द्विवेदी, सेठ गोविन्ददास और ब्यौहर राजेन्द्र सिंह आदि लोगों ने बहुत से प्रयास किए। जिसके चलते इन्होंने दक्षिण भारत की कई यात्राएँ भी की।

यहां सबसे ज्यादा बोली जाती है ‘हिन्दी’

हिन्दी बोलने वाली अधिकांश आबादी उत्तर भारत में केंद्रित है। हिन्दी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड और झारखंड सहित कई भारतीय राज्यों की आधिकारिक भाषा है। बिहार देश का पहला राज्य था, जिसने अपनी एकमात्र आधिकारिक भाषा के रूप में हिन्दी को अपनाया। बंगाली, तेलुगु और मराठी देश की अन्य व्यापक रूप से बोली जाने वाली भाषा हैं।

विदेशों में भी बोली जाती है ‘हिन्दी’

भारत की आजादी के बाद भारत सरकार ने हिन्दी भाषा को और भी उन्नत बनाने के लिए जोर दिया और इसमें कुछ सुधार और शब्दाबली को बेहतर बनाया गया। भारत के साथ-साथ देवनागरी भाषा अन्य कई देशों में बोली जाती है। मॉरीशस, फिजी, सूरीनाम, गुयाना, त्रिनिदाद एवं टोबैगो और नेपाल, युगांडा, यमन, न्यूजीलैण्ड आदि देशों में भी हिन्दी भाषी लोगों ने हिन्दी का परचम उठा रखा है।

यहां की आधिकारिक भाषा है ‘हिन्दी’

विश्व में चौथे स्थान पर सबसे ज़्यादा बोली जाने वाली भाषा ‘हिन्दी’ केवल भारत की ही नहीं, अपितु दक्षिण प्रशांत महासागर क्षेत्र में ‘फिजी’ नामक द्वीपीय देश की आधिकारिक भाषा के रूप में दर्जा प्राप्त है।

भारत में 66 फीसदी लोग बोलते हैं ‘हिन्दी’

वर्ष 1997 में हुए एक सर्वेक्षण में पाया गया था कि भारत में 66 फीसदी लोग हिंदी बोलते हैं, जबकि 77 प्रतिशत इसे समझ लेते हैं। डिजिटल माध्यम में 2016 में हिंदी समाचार पढ़ने वालों की संख्या 5.5 करोड़ थी, जो 2021 में बढ़कर 14.4 करोड़ होने का अनुमान है।

हिन्दी दिवस पर पुरस्कार

हिन्दी दिवस के अवसर पर भारत के राष्ट्रपति हिन्दी साहित्य से जुड़े कई लोगों को पुरस्कार प्रदान करते हैं और उनको सम्मानित करते हैं। हिन्दी दिवस के अवसर पर राजभाषा कीर्ति पुरस्कार, और राजभाषा गौरव पुरस्कार जैसे पुरस्कार दिए जाते हैं।

राजभाषा गौरव पुरस्कार, हिन्दी भाषा में भारत के किसी भी नागरिक द्वारा ज्ञान-विज्ञान के मौलिक पुस्तक लिखने पर और केन्द्र सरकार के कर्मियों (सेवानिवृत्त सहित) द्वारा पुस्तक या उत्कृष्ट लेख लिखने हेतु मिलता है। यह पुरस्कार तकनीकी, विज्ञान से जुड़े हिन्दी भाषा के पुस्तक लेखन को प्रोत्साहित करने के लिए दिया जाता है। इसमें उन पुस्तकों को लिया जाता है, जो प्रथम बार प्रकाशित हुई हो। किसी अन्य पुस्तक का अनुवाद न हो।

इसमें प्रथम पुरस्कार दो लाख रुपये, द्वितीय पुरस्कार डेढ़ लाख रुपये और तृतीय पुरस्कार 75,000 रुपये मिलता है। जबकि 10 लोगों को प्रोत्साहन पुरस्कार बतौर 10 हजार रुपये दिया जाता है। पुरस्कार के साथ स्मृति चिन्ह सभी 13 पुरस्कार प्राप्त करने वालों को दिया जाता है।

12 September 2020

9:34 AM : PLA agreed to hand over the five youth

9:03 AM : राष्‍ट्रीय राजमार्ग 44

वन्य जीवों के लिए बड़ी सौगात है NH44 पर एलीवेटेड रोड

जब कोई राष्‍ट्रीय राजमार्ग किसी वन्‍य जीव अभयारण्य से गुजरता है, तो सबसे बड़ा खतरा अभयारण्य में रहने वाले जानवरों के लिए सबसे बड़ा खतरा रहता है। यही कारण है कि जंगलों से बीच से निकलने वाले मार्गों पर रात के वक्त वाहनों की आवाजाही बंद कर दी जाती है। नागपुर-सिवानी राजमार्ग पर जानवरों की सुरक्षा को देखते हुए एलीवेटेड हाईवे बनाया गया है, ताकि जंगली जानवर ओवर-ब्रिज के नीचे से होते हुए जंगल में एक जगह से दूसरी जगह जा सकें।

एक समय था जब राष्‍ट्रीय राजमार्ग 44 पर के दोनों तरफ रहने वाले वन्‍य जीव आये दिन सड़क दुर्घटना का शिकार हो जाते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा, क्योंकि इस राष्‍ट्रीय राजमार्ग पर 16 किलोमीटर लंबा ओवर-ब्रिज बनाया गया है। अब वाहन ऊपर चलेंगे और जानवर नीचे घूमेंगे। पेंज-नेवगांव वन्‍य अभयारण्‍य को बाघों के संरक्षण के लिए जाना जाता है। यह अपने-आप में ऐसा पहला समर्पित कॉरिडोर है।

ब्रिज के नीचे से गुजरने वाले अंडर-पास की सुविधा होने से जानवरों की दुर्घटना से मृत्यु नहीं होगी। साथ ही बाघों की आबादी बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। इस कॉरिडोर के चीने से पांच अंडरपास और 4 छोटे पुल हैं। 16 किलोमीटर लंगे इस कॉरिडोर में 6.6 किलोमीटर लंगी सड़क वन्‍य क्षेत्र से गुजरती है। ब्रिज के नीचे से निकलने वाले जानवरों की गतिविधियों को रिकॉर्ड करने के लिए अंडरपास और पुल के नीचे सीसीटीवी कैमरे लगाये गए हैं।

अब तक वन्‍य जीवों की 18 प्रजातियां अंडरपास का उपयोग करती नज़र आयी हैं। इनमें छोटे स्तनधारी जानवरों की 7 प्रजातियां शामिल हैं, जिनमें जंगली बिल्ली, नेवले, पाम सिवेट, छोटे भारतीय खरहे, रस्‍टी स्‍पॉटेड कैट, भारतीय साही, शामिल हैं। इनके अलावा अंगुलेट प्रजाति के 5 जंगली जनवरों की गतिविधियां सीसीटीवी में कैद हुईं। इनमें चित्तीदार हिरण, गौर, सांभर, नीलगाय और जंगली सुअर शामिल हैं।

भारतीय वन्यजीव संस्‍थान के डॉ. बिलाल हबीब ने कहा कि 20 हजार किलोमीटर से अधिक लंबाई की संड़के हैं, जो वन्‍य जीव अभयारण्यों से होकर गुजरती हैं। और ऐसी जगहों पर जानवरों के साथ दुर्घटनाएं आम बात हैं। यह ओवर-ब्रिज एक शुरुआत है, आने वाले समय में ऐसे और उदाहरण देखने को मिलेंगे।

8:45 AM : Airport Express Line

8:29 AM : JK-IGRAMS

जनता की शिकायतों को लगातार मॉनीटर करेगी जम्मू-कश्‍मीर सरकार

जम्मू-कश्‍मीर में लेफ्टनेंट गवर्नर पद ग्रहण करने के बाद पूर्व सांसद मनोज सिन्‍हा ने केंद्रशासित प्रदेश की जनता के लिए एक ऐसा सिस्‍टम लॉन्‍च किया है, जिसमें जनता की शिकायतों का समाधान जब तक नहीं हो जाता, तब तक सरकार उनको निरंतर मॉनीटर करेगी। इस सिस्‍टम कानाम है जम्मू-कश्‍मीर इंटीग्रेटेड ग्रीवियांस रिड्रेस एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (JK-IGRAMS)।

यह केंद्रशासित राज्‍य का पहला ऑनलाइन ग्रीवियांस मैनेजमेंट सिस्‍टम है, जो केंद्र सरकार के साथ लिंक है। इस सिस्‍टम में यहां के 20 जिलों के 1500 सरकारी कार्यालयों को कनेक्‍ट किया जाएगा। एक तरह से देखा जाए तो भ्रष्‍टाचार को रोकने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है। आगे चलकर इस वेबसाइट की पहुंच को ब्‍लॉक व तहसील तक बढ़ाया जाएगा। JK-IGRAMS सिस्‍टम का अनावरण एलजी मनोज सिन्‍हा ने किया।

JK-IGRAMS से जुड़ी खास बातें :

• इस सिस्‍टम में डिस्‍ट्र‍िक्ट कलेक्‍टर और उपायुक्त के स्तर पर शिकायतें स्‍वीकार की जाएंगी।
• इस नए सिस्‍टम को उच्‍च स्तर पर मॉनीटर किया जाएगा।
• जनता की शिकायतों के त्वरित निवारण के लिए प्रत्येक जिले में एक विशेष टीम होगी।
• श्रीनगर में JK-IGRAMS का कॉल सेंटर स्‍थापित किया गया है, जहां पर टेलीकॉलर लोगों की शिकायतें सिस्‍टम में प्रविष्‍ट करेंगे।
• शुरुआत में इस सिस्‍टम में 250 कार्यालयों को इंटीग्रेट किया गया है। आगे चलकर यह संख्‍या 1500 के करीब हो जाएगी।
• यह सिस्‍टम 24 घंटे सातों दिन सक्रिय रहेगा। यानी जम्मू-कश्‍मीर के लोग किसी भी समय प्रशासनिक कार्यों से संबंधी शिकायत या अपनी समस्‍या दर्ज करा सकेंगे।
• शिकायत दर्ज करने के लिए इसके लिए मोबाइल नंबर जरूरी होगा, क्योंकि शिकायतकर्ता की पुष्टि के लिए मोबाइल पर ओटीपी भेजा जाएगा।
• वहीं कॉल सेंटर सुबह 9:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक फोन पर शिकायतें स्‍वीकार करेगा। रविवार या सार्वजनिक अवकाश को छोड़ कर।

इस मौके पर एलजी मनोज सिन्‍हा ने कहा कि जम्मू-कश्‍मीर में जो भी बदलाव किए जा रहे हैं, वो सभी पीपुल-सेंट्रिक यानी लोगों की जरूरतों को ध्‍यान में रखते हुए और गुड गवर्नेंस यानी अच्‍छे शासन को विकसित करने के लिए किए जा रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि जनता की बात का हर तरह से जवाब देने और उनकी समस्‍याओं को सुनने व हल करने में समर्थ प्रशासन हीं एक अच्‍छा प्रशासन हो सकता है। और यह प्रशासनिक प्रक्रिया के प्रभावी होने का सूचक भी है। उन्‍होंने कहा कि घाटी के लोगों में सरकार के प्रति विश्‍वास को मेजबूत बनाने के लिए सरकार गुड गवर्नेंस को प्राथमिकता दे रही है।

8:01 AM : PM Modi to inaugurate PMAY - Gramin in MP

Prime Minister Narendra Modi will inaugurate 1.75 lakh houses built under the Pradhan Mantri Awaas Yojana – Gramin (PMAY-G) in Madhya Pradesh today. All these houses have been built or completed during the challenging COVID-19 period.

11 September 2020

6:34 PM : Startup ecosystems

5:59 PM : Research on antibodies

CSIR-CDRI (Central Drug Research Institute) is carrying out a research study that involves testing of people for antibodies against SARS-CoV-2.
The test is VOLUNTARY and free of cost and is open to all CSIR staff and students.

3:29 PM : 16.11 lakh tonne of urea

National Fertilizers Limited produces  recording 13% growth in April-August 2020-16.11 lakh tonne of urea2021; Reports jump in fertilizer sales and production

2:34 PM : RailMadad Helpline 139

1:45 PM : COVID-19 UPDATES

1:59 PM : Griha Pravesham

1:16 PM : Recovery cases

India’s 60% COVID19 daily new recovery cases are from 5 States Maharashtra, Tamil Nadu, Andhra Pradesh, Karnataka and Uttar Pradesh. With this, the total number of recoveries has touched 35,42,663 taking Recovery Rate to 77.65%

12:34 PM : Aero India show

12:22 PM : Metro train services

12:10 PM : राफेल विमान से जुड़ी खास बातें

जानिए राफेल विमान से जुड़ी खास बातें

भारतीय वायुसेना के अम्बाला एयरफोर्स स्टेशन पर आज पांच राफेल विमानों की इंडक्शन सेरेमनी सम्पन्न हुई। इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और फ्रांस की रक्षा मंत्री फ्लोरेंस पर्ली उपस्थित रहीं। सेरेमनी के दौरान पांचों राफेल फाइटर विमानों ने अपनी अद्भुत क्षमताओं का रोचक प्रदर्शन किया। साथ में भारतीय वायुसेना के अन्य विमानों व हेलीकॉप्‍टरों ने आसमान में करतब दिखाये।

आइये एक नज़र डालते हैं राफेल की कुछ ऐसी खूबियों पर जो आपको जरूर मालूम होनी चाहिए:

राफेल में लग सकती हैं तीन तरह की मिसाइल

भारत को दो इंजन वाले राफेल विमान की दरकार काफी लम्बे समय से थी। राफेल लड़ाकू विमान का कॉम्बैट रेडियस 3700 किलोमीटर है। राफेल में हवा से हवा में मार करने वाली तीन तरह की मिसाइल लगाई जा सकती हैं, जिसमें मीटियोर मिसाइल, स्कैल्प मिसाइल और हैमर मिसाइल हैं। अभी इसमें मीटियोर मिसाइल, स्कैल्प मिसाइल लगाई गई हैं और आने वाले दिनों में हैमर मिसाइल लगाए जाने की योजना है।

एक मिनट में 18 हजार मीटर की ऊंचाई पर पहुंच सकता है राफेल

राफेल लड़ाकू विमान की खासियत यह है कि यह टेक ऑफ करते ही ऊंचाई तक पहुंचने में अन्य विमानों से काफी आगे है। राफेल की ऊंचाई पर जाने की क्षमता 300 मीटर प्रति सेकंड है, जो चीन-पाकिस्तान के विमानों को भी मात देता है। अर्थात, राफेल उड़ान भरते ही एक मिनट में 18 हजार मीटर की ऊंचाई पर जा सकता है। मौजूदा समय में चीन से टकराव के चलते बर्फीली पहाड़ियों वाली लद्दाख सीमा के हिसाब से राफेल लड़ाकू विमान फिट बैठता है। राफेल वह मल्टी रोल लड़ाकू विमान है और यह पहाड़ों पर कम जगह में भी उतर सकता है। इसे समुद्र में चलते हुए युद्धपोत पर उतार सकते हैं।

एक साथ 40 टारगेट पहचान सकता है राफेल

राफेल पर लगी गन एक मिनट में 2500 फायर करने में सक्षम है। राफेल में जितना तगड़ा रडार सिस्टम है। ये 100 किलोमीटर के दायरे में एक बार में एक साथ 40 टारगेट की पहचान कर सकता है। राफेल में अभी जो मिसाइलें लगी हैं, वो सीरिया, लीबिया जैसी जगहों में इस्तेमाल हो चुकी हैं। इसके अलावा जल्द ही इजराइली स्पाइस-2000 को भी इसमें जोड़ा जाएगा।

2022 तक हो जाएगी सभी 36 विमानों की आपूर्ति

भारतीय वायुसेना को अभी तक पांच राफेल लड़ाकू विमान मिले हैं। दूसरी खेप में चार और राफेल अक्टूबर में आने वाले हैं। वर्ष 2022 तक सभी 36 विमानों की आपूर्ति किये जाने का भरोसा फ्रांसीसी रक्षा मंत्री ने दिया है। जिन्हें अलग-अलग एयरबेस पर तैनात किया जाएगा। 36 राफेल विमानों में से 30 लड़ाकू विमान होंगे और छह ट्रेनर होंगे। ट्रेनर विमान ट्विन-सीटर होंगे और उनमें फाइटर जेट्स की लगभग सभी विशेषताएं होंगी।

अंबाला के बाद पश्चिम बंगाल में होगी दूसरी एयरबेस

राफेल लड़ाकू विमान अभी अंबाला एयरबेस पर तैनात हैं, जो चीन और पाकिस्तान सीमा के पास है। ऐसे में मौजूदा परिस्थितियों में ये बिल्कुल भारत के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। राफेल जेट का पहली स्क्वाड्रन ‘गोल्डन एरोज’ अंबाला हवाई अड्डे पर बनाई गई है। जबकि, दूसरी स्क्वाड्रन पश्चिम बंगाल में हासिमारा बेस पर होगी। एक बार फ्यूल भरने पर यह लगातार 10 घंटे की उड़ान भर सकता है। इसमें हवा में ही फ्यूल भरा जा सकता है। फ्रांस से भारत आते समय भी रास्ते में फ्रांसीसी विमानों ने राफेल को हवा में ही ईंधन दिया था।

(हिन्दुस्तान समाचार)

11:05 AM : School Education in 21st Century

10:56 AM : विश्व बंधुत्व दिवस

9:10 AM : भारत पर कितना होगा असर

ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन का ट्रायल रुकने से भारत पर कितना होगा असर बता रहे हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ

वैक्सीन की उम्मीद को उस वक्त निराशा हाथ लगी, जब ऑक्सफोर्ड और सीरम इंस्‍ट‍िट्यूट की वैक्सीन का क्लीनिकल ट्रायल रोक दिया गया। हांलाकि ऑक्सफोर्ड को उम्मीद है कि वैक्सीन का ट्रायल दोबोरा शुरू होगा। जहां तक वैक्सीन आने की बात है तो पीएचएफआई के अध्‍यक्ष डॉ. के श्रीनाथ रेड्डी कहते हैं कि भारत में तीन वैक्सीन का ट्रायल चल रहा है, ऑक्सफ़ोर्ड उनमें से एक है, जिसका ट्रायल रोका गया है। बाकी दो में सफलता मिल सकती है।

उन्होंने कहा कि अभी दो वैक्सीन का ट्रायल जारी है। ऑक्सफ़ोर्ड की वैक्सीन अभी खारिज नहीं हुई है, सिर्फ ट्रायल रोका गया है। इसके एक वॉलंटियर की रीढ़ की हड्डी में कुछ परेशानी आई है, जिसके बाद वैज्ञानिकों से इसे रोक दिया। इसकी जांच ऐसे वैज्ञानिक कर रहे हैं जो वैक्सीन से पहले किसी भी तरह से जुड़े नहीं थे। अगर इस जांच में पाया गाया कि यह प्रभाव वैक्सीन से ऐसा हुआ है, या किसी अन्य वॉलंटियर में भी यह समस्या आयी तो इसे खारीज कर दिया जायेगा। लेकिन अगर इसकी वजह से नहीं होगा, तो आगे का ट्रायल शुरू किया जायेगा।

वैक्सीन के सहारे न रहें

वैक्सीन कब तक आने की उम्मीद है, इसके उत्तर में डॉ रेड्डी कहते हैं कि पूरी दुनिया में 32 वैक्सीन क्लीनिकल ट्रायल में हैं। उम्मीद है कि जल्द ही कहीं न कहीं ट्रायल सफल हो जाएगा। लेकिन यह भी हो सकता है कि वायरस कभी खत्म नहीं हो, इसलिये इससे बचाव करना जरूरी है। इसके लिए जो भी नियम बनाये गए हैं, उनका पालन करें। कम से कम एक साल तक मान सकते हैं कि वायरस ऐसे ही परेशान करता रहेगा। वैक्सीन आने के बाद भी पूरी दुनिया में वैक्सीन पहुंचने में समय लगेगा। इसलिये लापरवाही नहीं करनी है।

मृत्यु दर कम करने में प्लाज्मा थैरपी कारगर नहीं

कोरोना के बढते केस में भारत की रिकवरी रेट 77 प्रतिशत से भी उपर पहुंच गई है, वायरस से लोगों को बचाने के लिये चिकित्साकर्मी कई दवाइयों का प्रयोग कर रहे हैं। हांलाकि ICMR ने प्लाज्मा थैरपी को ज्यादा कारगर नहीं बताया है। इस पर डॉ रेड्डी ने बताया कि जब वायरस को कंट्रोल करने के लिये कोई दवा नहीं थी, तब प्लाज्मा थैरपी को एक ट्रायल के तौर पर अनुमति दी गई। क्योंकि यह कई बीमारियों में पहले मृत्यु दर को कम करने में मददगार रही है। शुरुआत में कुछ लोगों को फायदा भी हुआ, लेकिन पिछले दिनों से कुछ मरीजों पर बहुत फायदा नहीं दिखा। इसलिए अभी इसे पूरी तरह कारगर इलाज नहीं कह सकते।

बच्चों को जरूर लगवायें टीका

वहीं अनलॉक के बीच अभी भी कई लोगों में वायरस का डर बना हुआ है, ऐसे में लोग नवजात बच्चों को लगने वाला कई जरूरी टीका भी नहीं लगवा रहे हैं। इस पर उन्होंने कहा कि बच्चे के स्वास्थ्‍य के लिए टीकाकरण बहुत जरूरी है, इसलिये अगर कोई टीका नहीं लग पाया है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। जहां तक कोरोना के संक्रमण की बात है, तो बच्चों में अभी तक कोरोना का असर काफी कम रहा है। दरअसल कई बीमारियां होती हैं, जिनका टीका लगवाना बहुत जरूरी है।

8:00 AM : मास्को में बैठक, जापान के साथ समझौता और राफेल

मास्को में बैठक, जापान के साथ समझौता और राफेल

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने चीनी समकक्ष वांग यी के साथ गुरुवार को मॉस्को में शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन की बैठक में दो घंटे से अधिक समय तक बात की। पूर्वी लद्दाख में मई से जारी सैन्य संकट का समाधान करने की मांग की। भारत और चीन वास्‍तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर स्थिति के बारे में पांच बिन्‍दुओं पर सहमत हुए।

मास्‍को में शंघाई सहयोग संगठन देशों के मंत्रियों के सम्‍मेलन के अवसर पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच अलग से द्विपक्षीय बैठक हुई। दोनों मंत्रियों ने एलएसी पर शीघ्र सेना को पीछे हटाने और तनाव दूर करने के उपाय करने पर सहमति व्‍यक्‍त की। दोनों विदेश मंत्री इस बात पर सहमत थे कि सीमावर्ती क्षेत्रों में वर्तमान स्थिति किसी भी देश के हित में नहीं है। दोनों ने इस बात पर भी सहमति जताई कि दोनों देशों के सैन्‍य अधिकारियों को बातचीत जारी रखनी चाहिए और सीमा पर समुचित दूरी बनाए रखनी चाहिए।

दोनों देश इस बात पर भी सहमत थे कि मतभेदों को विवादों का रूप लेने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। द्विपीक्षीय बैठक के बाद जारी संयुक्‍त वक्‍तव्‍य में बताया गया कि विदेश मंत्रियों ने बात पर सहमति व्‍यक्‍त की कि भारत-चीन संबंधों के विकास के बारे में दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच हुई वार्ताओं के परिणामों से मार्गदर्शन लिया जाना चाहिए। इस बीच, विदेश मंत्रालय ने कहा है कि दोनों देशों के मंत्रियों ने सभी मौजूदा समझौतों और भारत-चीन सीमा मामलों संबंधी नियमों का अनुपालन करने और सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति तथा स्थिरता बनाए रखने पर भी सहमति जताई है। भारत-चीन के बीच जिन पांच सूत्रीय बिंदुओं पर बनी सहमति

· आपसी मतभेदों को विवाद नहीं बनने दिया जाएगा।

· दोनों देशों की सेनाएं विवाद वाले क्षेत्रों से पीछे हटें।

· तय मैकेनिज्म के अनुसार दोनों देश बातचीत जारी रखें।

· मौजूदा संधियों और प्रोटोकॉल्स को दोनों देश मानेंगे।

· दोनों देश ऐसा कोई कदम नहीं उठाएंगे जिससे तनाव बढ़े।

इससे पहले विदेश मंत्रियों के बीच पहली व्यक्तिगत बैठक आरआईसी (रूस-भारत-चीन) त्रिपक्षीय समूह की एक लंच बैठक के बाद शुरू हुई। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की मेजबानी में, द्विपक्षीय वार्ता शुरू होने से पहले एक आइस-ब्रेकर होने का इरादा था। चीन को संकेत स्पष्ट हो गया है: इसे भारतीय सैनिकों को हटाने की कोशिश में संघर्ष को जोखिम में डालना होगा या मुद्दों को हल करने के लिए एक उद्देश्यपूर्ण बातचीत की आवश्यकता पर विचार करना होगा।

जापान के साथ सैन्य समझौता

इधर देश में भारत ने जापान के साथ एक सैन्य लॉजिस्टिक समझौता किया। अमेरिका, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर के बाद यह छठा देश है, जिसके साथ भारत ने ऐसा सौदा किया है। प्रधानमंत्री नरेंद मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे के बीच फोन पर बातचीत के बाद यह समझौता हुआ। दोनों देशों के बीच सैन्य समझौता भारत-प्रशांत क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बढ़ाएगा।

उधर में अंबाला वायु सेना स्टेशन पर, भारत ने औपचारिक रूप से पांच 4.5-पीढ़ी के राफेल लड़ाकू जेट को भारतीय वायु सेना में शामिल किया। इस मौके पर रक्षा मंत्री ने कहा, “राफेल जेट्स का शामिल होना पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा और कड़ा संदेश है, विशेषकर उन लोगों पर जो हमारी सीमाओं पर नजर रखते हैं। इस तरह का प्रेरण हमारी सीमाओं पर बनाए गए वातावरण के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।”

10 September 2020

12:10 PM : ‘Pradhan Mantri Matsya Sampada Yojna’ & ‘e-gopala’

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9:36 AM : PM Garib Kalyan Yojana

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9 September 2020

2:30 PM : Union Minister Rijiju meets WADA President